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Kaithal News: महाशिवरात्रि आज ः फूलों से सजाए गए शिवालय
Sat, 14 Feb 2026 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 14 Feb 2026 11:54 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महाशिवरात्रि पर पूजा-अर्चना के लिए शिवालयों में भव्य तैयारी की गई है। रविवार तड़के सुबह से ही भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगेंगे। शहर के 11 रुद्री मंदिर में इस बार भगवान शिव का सेहरा कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। मंदिर परिसर में रंग-बिरंगे फूलों से शादी वाला घर लिखकर सजावट की गई है और भगवान शिव का विशेष शृंगार कर उन्हें सेहरा बांधा गया।
मंदिरों को रंगीन लड़ियों, फूलों की मालाओं और आकर्षक प्रकाश सज्जा से दुल्हन की तरह सजाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन गया है। शहर के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। प्रशासन और मंदिर समितियां सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर सतर्क हैं।
मंदिर प्रांगण में महिलाओं और युवतियों ने शिव-पार्वती, नंदी और त्रिशूल की आकृतियों से सजी आकर्षक रंगोलियां बनाई हैं। इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न स्थानों से भव्य झांकियां निकाली जाएंगी। इन झांकियों में शिव परिवार भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय की सजीव प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।
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ब्रह्म मुहूर्त से खुलेंगे कपाट ः रविवार को 11 रुद्री मंदिर में प्रातः चार बजे से ही कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे, जबकि सामान्य दिनों में मंदिर सुबह पांच बजे खुलता है। ब्रह्म मुहूर्त से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और शिव चालीसा पाठ आरंभ होगा।
आराधना का शुभ समय
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 12:58 बजे तक
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शाम की पूजा का समय: राहुकाल के बाद से शाम 7:28 बजे तक
n निशीत काल (सबसे शुभ समय): रात्रि 12:09 बजे से 1:00 बजे तक
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सुबह लगभग 6 से 9 बजे तक जल अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। वहीं सायंकाल प्रदोष काल, लगभग शाम 6 बजे से 8:30 बजे तक, भगवान शिव को जल चढ़ाने का अत्यंत शुभ समय है। - पं. मुनिंद्र मिश्र, 11 रुद्री मंदिर
300 साल बाद बन रहे दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग
कलायत। महाशिवरात्रि का पर्व लगभग 300 वर्षों बाद बन रहे दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों के साथ आ रहा है। इस दिन 11 शुभ योग और 5 विशेष राजयोग बन रहे हैं, जो इस पर्व को अत्यंत फलदायी बना रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि पर प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, साध्य, शिव, शुक्ल, शोभन, सर्वार्थ सिद्धि, महालक्ष्मी, त्रिग्रही, राज तथा ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य राजयोग, बुध-शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग, सूर्य-शुक्र की युति से शुक्रादित्य योग तथा कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु की युति से चतुर्ग्रही योग बन रहा है। इन सभी शुभ योगों और राजयोगों के कारण यह महाशिवरात्रि विशेष रूप से पुण्यदायी और कल्याणकारी मानी जा रही है। श्रद्धालु विशेष मुहूर्त में भगवान शिव की आराधना कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। संवाद
ऐसे करें भोले बाबा का अभिषेक
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मन की शांति के लिए – दूध से अभिषेक
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धन प्राप्ति के लिए – गन्ने के रस से
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शत्रु नाश के लिए – सरसों के तेल से
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आरोग्य की कामना के लिए – गिलोय के रस से
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शिव भक्ति की प्राप्ति के लिए – गंगाजल से अभिषेक
शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक किया जाता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
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कैथल। महाशिवरात्रि पर पूजा-अर्चना के लिए शिवालयों में भव्य तैयारी की गई है। रविवार तड़के सुबह से ही भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगेंगे। शहर के 11 रुद्री मंदिर में इस बार भगवान शिव का सेहरा कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। मंदिर परिसर में रंग-बिरंगे फूलों से शादी वाला घर लिखकर सजावट की गई है और भगवान शिव का विशेष शृंगार कर उन्हें सेहरा बांधा गया।
मंदिरों को रंगीन लड़ियों, फूलों की मालाओं और आकर्षक प्रकाश सज्जा से दुल्हन की तरह सजाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन गया है। शहर के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। प्रशासन और मंदिर समितियां सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर सतर्क हैं।
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मंदिर प्रांगण में महिलाओं और युवतियों ने शिव-पार्वती, नंदी और त्रिशूल की आकृतियों से सजी आकर्षक रंगोलियां बनाई हैं। इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न स्थानों से भव्य झांकियां निकाली जाएंगी। इन झांकियों में शिव परिवार भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय की सजीव प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।
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ब्रह्म मुहूर्त से खुलेंगे कपाट ः रविवार को 11 रुद्री मंदिर में प्रातः चार बजे से ही कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे, जबकि सामान्य दिनों में मंदिर सुबह पांच बजे खुलता है। ब्रह्म मुहूर्त से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और शिव चालीसा पाठ आरंभ होगा।
आराधना का शुभ समय
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 12:58 बजे तक
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शाम की पूजा का समय: राहुकाल के बाद से शाम 7:28 बजे तक
n निशीत काल (सबसे शुभ समय): रात्रि 12:09 बजे से 1:00 बजे तक
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सुबह लगभग 6 से 9 बजे तक जल अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। वहीं सायंकाल प्रदोष काल, लगभग शाम 6 बजे से 8:30 बजे तक, भगवान शिव को जल चढ़ाने का अत्यंत शुभ समय है। - पं. मुनिंद्र मिश्र, 11 रुद्री मंदिर
300 साल बाद बन रहे दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग
कलायत। महाशिवरात्रि का पर्व लगभग 300 वर्षों बाद बन रहे दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों के साथ आ रहा है। इस दिन 11 शुभ योग और 5 विशेष राजयोग बन रहे हैं, जो इस पर्व को अत्यंत फलदायी बना रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि पर प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, साध्य, शिव, शुक्ल, शोभन, सर्वार्थ सिद्धि, महालक्ष्मी, त्रिग्रही, राज तथा ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य राजयोग, बुध-शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग, सूर्य-शुक्र की युति से शुक्रादित्य योग तथा कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु की युति से चतुर्ग्रही योग बन रहा है। इन सभी शुभ योगों और राजयोगों के कारण यह महाशिवरात्रि विशेष रूप से पुण्यदायी और कल्याणकारी मानी जा रही है। श्रद्धालु विशेष मुहूर्त में भगवान शिव की आराधना कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। संवाद
ऐसे करें भोले बाबा का अभिषेक
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मन की शांति के लिए – दूध से अभिषेक
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धन प्राप्ति के लिए – गन्ने के रस से
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शत्रु नाश के लिए – सरसों के तेल से
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आरोग्य की कामना के लिए – गिलोय के रस से
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शिव भक्ति की प्राप्ति के लिए – गंगाजल से अभिषेक
शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक किया जाता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।