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Kaithal News: महादेव की महिमा अपरंपार, करते हैं सबका उद्धार
Fri, 08 Mar 2024 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 08 Mar 2024 01:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। महाशिवरात्रि का त्योहार भगवान शिव को समर्पित है। यह त्योहार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है। इस साल आठ मार्च को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। इस दिन भगवान शिव के भक्त व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं। भगवान को प्रसन्न करने के लिए इस दिन भक्त भगवान शिव को बेलपत्र और एक लोटा जल अर्पित करते हैं।
भगवान शिव को कई नामों से जाना जाता है। जो भक्त भगवान भोले शंकर के इन 108 नामों का नियमित रूप से जाप करता है तो भगवान शिव उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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भोले के भक्त बोले
पीपल के वृक्ष में होता है त्रिदेवों का वास
पीपल के वृक्ष पर त्रिदेवों का वास माना जाता है। इस पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास माना जाता है। हिंदू धर्म में पीपल का पेड़ सदैव पूज्यनीय है। मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से भगवान शिव तो प्रसन्न होंगे ही साथ में भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी की कृपा भी आपको प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि के दिन पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करने, दीप जलाने और धूप-दीप करने से समस्त कष्ट मिट जाएंगे -ऊषा चौधरी
बेल और जल से भोलेनाथ होते है प्रसन्न
भोलेनाथ थोड़ी सी भक्ति और बेलपत्र और जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। किवदंती है कि समुद्र मंथन के समय जब कालकूट नाम का विष निकला तो इसके प्रभाव से सभी देवता और जीव-जंतु व्याकुल होने लगे। इस समय भगवान शिव ने इस विष को हथेली पर रखकर पी लिया। विष के प्रभाव से स्वयं को बचाने के लिए उन्होंने इसे अपने कंठ में ही रख लिया। शिवजी का कंठ नीला पड़ गया इसलिए महादेव को नीलकंठ कहा जाने लगा। - ममता वधवा
रात्रि में निकाली जाती है भगवान शिव की बरात
महाशिवरात्रि के दिन व्रत धारण करने वाले व्यक्ति मंदिरों में मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की शादी भी हुई थी, इसलिए रात्रि में शिवजी की बारात निकाली जाती है। रात में पूजन कर फलाहार किया जाता है। अगले दिन का हवन किया जाता है। -कृष्ण गर्ग
वैराग्य छोड़ गृहस्थ जीवन में किया था प्रवेश
फाल्गुन माह की चतुर्दशी को माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। इस दिन शिवजी ने वैराग्य जीवन छोड़ गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। शिव और शक्ति के मिलन के उत्सव के तौर पर महाशिवरात्रि के दिन भक्त पूजन और व्रत करके इस उत्सव को मनाते हैं। यह दिन भगवान शिव के सम्मान में भी मनाया जाता है। - प्रशांत आनंद
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सीवन। महाशिवरात्रि का त्योहार भगवान शिव को समर्पित है। यह त्योहार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है। इस साल आठ मार्च को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। इस दिन भगवान शिव के भक्त व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं। भगवान को प्रसन्न करने के लिए इस दिन भक्त भगवान शिव को बेलपत्र और एक लोटा जल अर्पित करते हैं।
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भगवान शिव को कई नामों से जाना जाता है। जो भक्त भगवान भोले शंकर के इन 108 नामों का नियमित रूप से जाप करता है तो भगवान शिव उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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भोले के भक्त बोले
पीपल के वृक्ष में होता है त्रिदेवों का वास
पीपल के वृक्ष पर त्रिदेवों का वास माना जाता है। इस पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास माना जाता है। हिंदू धर्म में पीपल का पेड़ सदैव पूज्यनीय है। मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से भगवान शिव तो प्रसन्न होंगे ही साथ में भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी की कृपा भी आपको प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि के दिन पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करने, दीप जलाने और धूप-दीप करने से समस्त कष्ट मिट जाएंगे -ऊषा चौधरी
बेल और जल से भोलेनाथ होते है प्रसन्न
भोलेनाथ थोड़ी सी भक्ति और बेलपत्र और जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। किवदंती है कि समुद्र मंथन के समय जब कालकूट नाम का विष निकला तो इसके प्रभाव से सभी देवता और जीव-जंतु व्याकुल होने लगे। इस समय भगवान शिव ने इस विष को हथेली पर रखकर पी लिया। विष के प्रभाव से स्वयं को बचाने के लिए उन्होंने इसे अपने कंठ में ही रख लिया। शिवजी का कंठ नीला पड़ गया इसलिए महादेव को नीलकंठ कहा जाने लगा। - ममता वधवा
रात्रि में निकाली जाती है भगवान शिव की बरात
महाशिवरात्रि के दिन व्रत धारण करने वाले व्यक्ति मंदिरों में मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की शादी भी हुई थी, इसलिए रात्रि में शिवजी की बारात निकाली जाती है। रात में पूजन कर फलाहार किया जाता है। अगले दिन का हवन किया जाता है। -कृष्ण गर्ग
वैराग्य छोड़ गृहस्थ जीवन में किया था प्रवेश
फाल्गुन माह की चतुर्दशी को माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। इस दिन शिवजी ने वैराग्य जीवन छोड़ गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। शिव और शक्ति के मिलन के उत्सव के तौर पर महाशिवरात्रि के दिन भक्त पूजन और व्रत करके इस उत्सव को मनाते हैं। यह दिन भगवान शिव के सम्मान में भी मनाया जाता है। - प्रशांत आनंद