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Kaithal News: कचरा प्रबंधन के बारे में छात्र-छात्राओं को किया जागरूक
Fri, 05 Jul 2024 06:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 05 Jul 2024 06:52 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। इको क्लब के अंतर्गत चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर के चौथे दिन गुरुवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बीर बांगड़ा में कचरा प्रबंधन एवं निष्पादन विषय के अंतर्गत एक गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें सभी छात्र-छात्राओं को प्रार्थना सभा में विस्तार पूर्वक कचरे के बारे में तथा उनके प्रबंधन एवं निष्पादन के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।
विद्यालय प्राचार्य सुरेंद्र कुमार ने सभी छात्र-छात्राओं को बताया कि हमें अपने दैनिक जीवन में बनने वाले कचरे का किस प्रकार से प्रबंध करना है। इसके लिए विद्यार्थियों को स्मार्ट बोर्ड पर इससे संबंधित वीडियो भी दिखाकर जानकारी दी गई। प्राचार्य ने बताया कि अगर हम गले हुए सूखे कचरे को अलग-अलग कर लें, तो कचरा निष्पादन करने में हमें आसानी हो सकती है।
उन्होंेने बताया कि गीले कचरे में हमारे घरों में उपयोग में लाई गई सब्जियों के छिलके पेड़ों के पत्ते घास तिनके तथा गाय भैंसों के गोबर इत्यादि को हमें अलग ढेर में या अलग कूड़े दान में रखना चाहिए तथा उसे फिर जमीन में गड्ढा खोदकर उसके द्वारा केंचुए की खाद बनाई जा सकती है। इससे हमारी भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ेगी तथा होने वाली गंदगी से भी हमारा पर्यावरण प्रदूषण नहीं होगा।
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सूखे कचरे में धातुओं के डब्बे, कील, कांच की बोतले, प्लास्टिक के डब्बे इत्यादि होते हैं क्योंकि यह सभी पदार्थ है। इनका अपघटन जीवाणुओं के द्वारा नहीं हो सकता अगर हम इन्हें ऐसे ही खुला छोड़ देंगे तो हमारे पर्यावरण को बहुत अधिक हानि होती है तथा हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता है। अत: हमें इसे रीसाइक्लिंग करना चाहिए।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि अपने घरों में भी अलग-अलग रंग के दो कूड़ेदान रखने चाहिए, जिसमें हम अपने घर में गीले कचरे व सूखे कचरे को अलग-अलग तरीके से निपटान कर सकते हैं। यह बहुत जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के हिंदी प्रवक्ता तेजपाल तथा वीरेंद्र सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
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राजौंद। इको क्लब के अंतर्गत चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर के चौथे दिन गुरुवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बीर बांगड़ा में कचरा प्रबंधन एवं निष्पादन विषय के अंतर्गत एक गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें सभी छात्र-छात्राओं को प्रार्थना सभा में विस्तार पूर्वक कचरे के बारे में तथा उनके प्रबंधन एवं निष्पादन के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।
विद्यालय प्राचार्य सुरेंद्र कुमार ने सभी छात्र-छात्राओं को बताया कि हमें अपने दैनिक जीवन में बनने वाले कचरे का किस प्रकार से प्रबंध करना है। इसके लिए विद्यार्थियों को स्मार्ट बोर्ड पर इससे संबंधित वीडियो भी दिखाकर जानकारी दी गई। प्राचार्य ने बताया कि अगर हम गले हुए सूखे कचरे को अलग-अलग कर लें, तो कचरा निष्पादन करने में हमें आसानी हो सकती है।
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उन्होंेने बताया कि गीले कचरे में हमारे घरों में उपयोग में लाई गई सब्जियों के छिलके पेड़ों के पत्ते घास तिनके तथा गाय भैंसों के गोबर इत्यादि को हमें अलग ढेर में या अलग कूड़े दान में रखना चाहिए तथा उसे फिर जमीन में गड्ढा खोदकर उसके द्वारा केंचुए की खाद बनाई जा सकती है। इससे हमारी भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ेगी तथा होने वाली गंदगी से भी हमारा पर्यावरण प्रदूषण नहीं होगा।
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सूखे कचरे में धातुओं के डब्बे, कील, कांच की बोतले, प्लास्टिक के डब्बे इत्यादि होते हैं क्योंकि यह सभी पदार्थ है। इनका अपघटन जीवाणुओं के द्वारा नहीं हो सकता अगर हम इन्हें ऐसे ही खुला छोड़ देंगे तो हमारे पर्यावरण को बहुत अधिक हानि होती है तथा हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता है। अत: हमें इसे रीसाइक्लिंग करना चाहिए।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि अपने घरों में भी अलग-अलग रंग के दो कूड़ेदान रखने चाहिए, जिसमें हम अपने घर में गीले कचरे व सूखे कचरे को अलग-अलग तरीके से निपटान कर सकते हैं। यह बहुत जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के हिंदी प्रवक्ता तेजपाल तथा वीरेंद्र सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए।