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मरीज कराहते रहें, यहां फिक्र किसे है...
नसीब सैनी
Updated Sat, 06 Jun 2015 12:12 AM IST
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कैथल। सुबह का समय। जगह...ओपीडी। बच्चों के वार्ड में रूम-111 व 115 के सामने मरीजों की भारी भीड़...। यहां स्किन स्पेशिलिस्ट एवं आंख, नाक व कान की डॉक्टर तो थीं, लेकिन सामान्य सर्जन एवं अन्य डॉक्टर नहीं थे। लोग इसी आस में इंतजार करते रहे कि डॉक्टर आएंगे। लेकिन रूम-111 में डॉक्टर नहीं आए। दो बजने में महज एक मिनट पहले यहां एक डॉक्टर आया।
टहलते हुए पहुंचे डॉक्टर साहब ने एक या दो मरीज को देखे और तेजी से निकल गए। एक मरीज के कागज हाथ में पकड़ने के बाद वापस थमा दिए। सुबह 9 बजे से इंतजार कर रहे मरीज हक्के-बक्के रह गए। कोई ऑफ्शन नहीं बची, इसीलिए डॉक्टर को कोसा और मायूस होकर लौट गए।
कांगथली निवासी सुखदेव, कैथल निवासी भारत भूषण, खरकां निवासी अमरजीत सिंह, चंदाना गेट निवासी राजेश कुमार, कोयल निवासी रामकली दिन भर डॉक्टर का इंतजार करते रहे। मरीज सुखदेव का तो कहना था कि उसकी पर्ची हाथ में लेने के बाद वापस थमा दी। इसी प्रकार से रूम -115 के बाहर भी मरीज सुबह 10 से 2 बजे तक इंतजार करते रहे। लेकिन आंख, नाक व गले के डॉक्टर को छोड़कर दूसरे डॉक्टर नहीं आए। अंत में आंख व नाक की डॉक्टर ने ही दूसरे मरीजों की जांच की।
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उधर, टेलीफोन पर पूछने पर डॉक्टर साहब ने बताया कि वे तीन पोस्टमार्टम करके आए हैं। ओपीडी ड्यूटी 2 बजे तक होती है। इसके अलावा मुझे कोई बात नहीं करनी है।
अस्पताल में इलाज नहीं, मायूसी मिलती है
कहने को इंदिरा गांधी मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल है। लेकिन यहां इलाज के बजाय मर्ज बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अभाव में मरीज दिन भर बिलबिलाते रहते हैं। थक हार कर लौट जाते हैं, लेकिन फिक्र किसे है। मरीजों को डर रहता है कि कहीं दो ना बज जाएं, उन्हें अगले दिन फिर से आना पड़ेगा।
कई दिन भटकने के बाद यहां इलाज पूरा हो पाता है। लेकिन लाख दावों के बावजूद सरकार एवं विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। ‘अमर उजाला’ ने शुक्रवार को जिला अस्पताल की नब्ज टटोली तो पता चला कि यहां इलाज तो होता है, लेकिन तब, जब मर्ज बढ़ जाए। आलम यह है कि सुबह 8 बजे आने के बाद दो बजे तक इंतजार करना पड़ता है और बिना चेकअप के घर लौटना पड़ता है। अगर किसी तरह डॉक्टर को दिखाने की बारी आ भी जाए तो टेस्ट में इतना समय लग जाता है कि उन्हें अगले दिन फिर से आना पड़ता है।
महिला रोग विभाग के बाहर हालात बेकाबू
सबसे ज्यादा परेशानी महिला रोग विभाग के बाहर है। शुक्रवार को यहां जिले भर से 140 से ज्यादा मरीजों ने एंट्री की दर्ज हुई है। जबकि उन्हें देखने के लिए महज एक डॉक्टर ड्यूटी पर थीं। 24 घंटे इस विभाग में केवल 3 डॉक्टर ही रहती हैं। इस वजह से मरीजों को कई दिन तक चक्कर लगाने पड़ते हैं।
यहां अपनी पत्नी को लेकर आए खेड़ी गुलाम अली निवासी सोमा राम ने बताया कि 9 बजे से लेकर 12 बजे तक उनका नंबर नहीं आया है। सोनू ने कहा कि वे 9 बजे से खड़े हैं। 70वां नंबर है। लेकिन अभी तक पता ही नहीं कौन सा नंबर चल रहा है। बरसाना निवासी ईशम सिंह ने कहा कि परिवार की महिला को लेकर आए हैं। लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी नंबर नहीं आ रहा है।
जसवंती निवासी कृष्णा देवी ने कहा कि 2 दिन से इलाज के लिए आ रहे हैं। लेकिन अब तक नंबर नहीं आया। छौत निवासी पूजा का भी यही कहना था कि तीन घंटों से इंतजार कर रहे हैं। हड्डियों के डॉक्टर के रूम के बाहर भी भीड़ लगी है। लेकिन यहां भी हालत वही। केवल एक ही डॉक्टर यहां मरीजों को देखने के लिए है।
उसी की कई अन्य जगह भी ड्यूटी रहती है। ऐसे में मरीज चिल्लाते रहते हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इसी प्रकार से बच्चों के डॉक्टर के रूम के बाहर भी 2 बजे तक भी महिलाओं की भीड़ रही। गौरतलब है कि अस्पताल में दौरा करने पर प्रथम एवं द्वितीय तल पर पानी के साथ-साथ बिजली एवं पंखों सहित मशीनों की सुविधा तो नजर आ रही है। लेकिन डॉक्टरों के अभाव में केवल इलाज नहीं मिलता है।
100 बेड पर 150 से मरीज
100 बेडों की सुविधा वाले इस अस्पताल में हर समय करीब 150 से ज्यादा मरीज दाखिल रहते हैं। कई बार एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को रखना पड़ता है। इसके अलावा कई बार स्टॉफ नर्सों की संख्या भी कम पड़ जाती है।
42 में से महज 22 डॉक्टर
जिला अस्पताल में 42 डॉक्टरों के पदों पर महज 22 डॉक्टर हैं। जो हैं, उनमें से अधिकतर अपनी ड्यूटी से इतना तंग आ गए हैं कि वे मरीजों के साथ भी कई बार सामान्य बर्ताव नहीं कर पाते। इन से ही एक साथ-कई ड्यूटियां ली जा रही हैं। यहां रेडियोलॉजिस्ट, दो महिला रोग विशेषज्ञों, दो हड्डियों के डॉक्टर एवं फिजिशियन की आवश्यकता है। लेकिन न जाने यह कमी कब पूरी होगी।
सामान्य मरीजों के लिए खाना बंद होने से परेशानी
अस्पताल में पहले एक संस्था द्वारा सभी मरीजों को खाना दिया जाता था। लेकिन विभागीय अधिकारियों को न जाने क्यों यह अखर गया। अब इसे बंद कर दिया गया है। इस कारण अब जरूरतमंदों को खाना न मिलने से परेशानी होती है।
अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन डॉक्टरों की संख्या नहीं बढ़ी। 22 डॉक्टरों के साथ प्रतिदिन 1000 से ज्यादा की ओपीडी चलाई जा रही है। इन्हीं डॉक्टरों में से डॉक्टरों को कोर्ट, कैंप एवं पोस्टमार्टम ड्यूटी करनी पड़ती है। कई डॉक्टर छुट्टी भी ले लेते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी डॉक्टरों की कमी है। जो डॉक्टर 2 बजे आकर मरीजों का इलाज किए बिना चला गया, उसके बारे में पता करवाया जाएगा। रूम-111 वाले डॉक्टर की शुक्रवार को पोस्टमार्टम में ड्यूटी थी। रूम नंबर 115 वाले डॉक्टर शुक्रवार को कलायत में कैंप में हिस्सा लेने गए हैं। लेकिन दोनों ही कमरों में एक-एक डॉक्टर तैनात थे।
-डा. आरपी गोयल, इंचार्ज अस्पताल।
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टहलते हुए पहुंचे डॉक्टर साहब ने एक या दो मरीज को देखे और तेजी से निकल गए। एक मरीज के कागज हाथ में पकड़ने के बाद वापस थमा दिए। सुबह 9 बजे से इंतजार कर रहे मरीज हक्के-बक्के रह गए। कोई ऑफ्शन नहीं बची, इसीलिए डॉक्टर को कोसा और मायूस होकर लौट गए।
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कांगथली निवासी सुखदेव, कैथल निवासी भारत भूषण, खरकां निवासी अमरजीत सिंह, चंदाना गेट निवासी राजेश कुमार, कोयल निवासी रामकली दिन भर डॉक्टर का इंतजार करते रहे। मरीज सुखदेव का तो कहना था कि उसकी पर्ची हाथ में लेने के बाद वापस थमा दी। इसी प्रकार से रूम -115 के बाहर भी मरीज सुबह 10 से 2 बजे तक इंतजार करते रहे। लेकिन आंख, नाक व गले के डॉक्टर को छोड़कर दूसरे डॉक्टर नहीं आए। अंत में आंख व नाक की डॉक्टर ने ही दूसरे मरीजों की जांच की।
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अस्पताल में इलाज नहीं, मायूसी मिलती है
कहने को इंदिरा गांधी मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल है। लेकिन यहां इलाज के बजाय मर्ज बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अभाव में मरीज दिन भर बिलबिलाते रहते हैं। थक हार कर लौट जाते हैं, लेकिन फिक्र किसे है। मरीजों को डर रहता है कि कहीं दो ना बज जाएं, उन्हें अगले दिन फिर से आना पड़ेगा।
कई दिन भटकने के बाद यहां इलाज पूरा हो पाता है। लेकिन लाख दावों के बावजूद सरकार एवं विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। ‘अमर उजाला’ ने शुक्रवार को जिला अस्पताल की नब्ज टटोली तो पता चला कि यहां इलाज तो होता है, लेकिन तब, जब मर्ज बढ़ जाए। आलम यह है कि सुबह 8 बजे आने के बाद दो बजे तक इंतजार करना पड़ता है और बिना चेकअप के घर लौटना पड़ता है। अगर किसी तरह डॉक्टर को दिखाने की बारी आ भी जाए तो टेस्ट में इतना समय लग जाता है कि उन्हें अगले दिन फिर से आना पड़ता है।
महिला रोग विभाग के बाहर हालात बेकाबू
सबसे ज्यादा परेशानी महिला रोग विभाग के बाहर है। शुक्रवार को यहां जिले भर से 140 से ज्यादा मरीजों ने एंट्री की दर्ज हुई है। जबकि उन्हें देखने के लिए महज एक डॉक्टर ड्यूटी पर थीं। 24 घंटे इस विभाग में केवल 3 डॉक्टर ही रहती हैं। इस वजह से मरीजों को कई दिन तक चक्कर लगाने पड़ते हैं।
यहां अपनी पत्नी को लेकर आए खेड़ी गुलाम अली निवासी सोमा राम ने बताया कि 9 बजे से लेकर 12 बजे तक उनका नंबर नहीं आया है। सोनू ने कहा कि वे 9 बजे से खड़े हैं। 70वां नंबर है। लेकिन अभी तक पता ही नहीं कौन सा नंबर चल रहा है। बरसाना निवासी ईशम सिंह ने कहा कि परिवार की महिला को लेकर आए हैं। लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी नंबर नहीं आ रहा है।
जसवंती निवासी कृष्णा देवी ने कहा कि 2 दिन से इलाज के लिए आ रहे हैं। लेकिन अब तक नंबर नहीं आया। छौत निवासी पूजा का भी यही कहना था कि तीन घंटों से इंतजार कर रहे हैं। हड्डियों के डॉक्टर के रूम के बाहर भी भीड़ लगी है। लेकिन यहां भी हालत वही। केवल एक ही डॉक्टर यहां मरीजों को देखने के लिए है।
उसी की कई अन्य जगह भी ड्यूटी रहती है। ऐसे में मरीज चिल्लाते रहते हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इसी प्रकार से बच्चों के डॉक्टर के रूम के बाहर भी 2 बजे तक भी महिलाओं की भीड़ रही। गौरतलब है कि अस्पताल में दौरा करने पर प्रथम एवं द्वितीय तल पर पानी के साथ-साथ बिजली एवं पंखों सहित मशीनों की सुविधा तो नजर आ रही है। लेकिन डॉक्टरों के अभाव में केवल इलाज नहीं मिलता है।
100 बेड पर 150 से मरीज
100 बेडों की सुविधा वाले इस अस्पताल में हर समय करीब 150 से ज्यादा मरीज दाखिल रहते हैं। कई बार एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को रखना पड़ता है। इसके अलावा कई बार स्टॉफ नर्सों की संख्या भी कम पड़ जाती है।
42 में से महज 22 डॉक्टर
जिला अस्पताल में 42 डॉक्टरों के पदों पर महज 22 डॉक्टर हैं। जो हैं, उनमें से अधिकतर अपनी ड्यूटी से इतना तंग आ गए हैं कि वे मरीजों के साथ भी कई बार सामान्य बर्ताव नहीं कर पाते। इन से ही एक साथ-कई ड्यूटियां ली जा रही हैं। यहां रेडियोलॉजिस्ट, दो महिला रोग विशेषज्ञों, दो हड्डियों के डॉक्टर एवं फिजिशियन की आवश्यकता है। लेकिन न जाने यह कमी कब पूरी होगी।
सामान्य मरीजों के लिए खाना बंद होने से परेशानी
अस्पताल में पहले एक संस्था द्वारा सभी मरीजों को खाना दिया जाता था। लेकिन विभागीय अधिकारियों को न जाने क्यों यह अखर गया। अब इसे बंद कर दिया गया है। इस कारण अब जरूरतमंदों को खाना न मिलने से परेशानी होती है।
अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन डॉक्टरों की संख्या नहीं बढ़ी। 22 डॉक्टरों के साथ प्रतिदिन 1000 से ज्यादा की ओपीडी चलाई जा रही है। इन्हीं डॉक्टरों में से डॉक्टरों को कोर्ट, कैंप एवं पोस्टमार्टम ड्यूटी करनी पड़ती है। कई डॉक्टर छुट्टी भी ले लेते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी डॉक्टरों की कमी है। जो डॉक्टर 2 बजे आकर मरीजों का इलाज किए बिना चला गया, उसके बारे में पता करवाया जाएगा। रूम-111 वाले डॉक्टर की शुक्रवार को पोस्टमार्टम में ड्यूटी थी। रूम नंबर 115 वाले डॉक्टर शुक्रवार को कलायत में कैंप में हिस्सा लेने गए हैं। लेकिन दोनों ही कमरों में एक-एक डॉक्टर तैनात थे।
-डा. आरपी गोयल, इंचार्ज अस्पताल।