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अभ्यास के दौरान ही आड़े आ रही संसाधनों की कमी
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Lack of resources coming in the way of exercise itself
- फोटो : Kaithal
सरकारी नुमाइंदों ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बनाए जाने वाले प्ले स्कूलों में बच्चों को निजी संस्थानों जैसी पूर्ण सुविधाएं देने का दावा किया है, लेकिन अभ्यास कक्षाओं के दौरान केंद्रों में वे संसाधन पर्याप्त नहीं हैं, जो एक प्ले स्कूल में होने चाहिए। जो संसाधन केंद्रों में पहले से हैं, उन्हीं के आधार पर अभ्यास कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
जिले के 191 आंगनबाड़ी केंद्रों को महिला एवं बाल विकास विभाग प्ले स्कूलों में बदलने की तैयारियों में जुटा है। बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा कैसे दी जाए, इसके लिए जिले की 1270 वर्करों को प्रशिक्षण दिया गया है। सितंबर माह में हुए प्रशिक्षण कार्य के बाद अब वर्करों को विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि वे बच्चों की करीब 20-20 दिन की अभ्यास कक्षाएं लगाएं। अब सभी केंद्रों में बच्चों की अभ्यास कक्षाएं लगाई जा रही हैं, जो तकरीबन पूरा होने को हैं।
कोरोना महामारी के दृष्टिगत अभी बच्चों को ज्यादा संख्या में केंद्रों में नहीं बुलाया जा रहा। फिर भी हर कार्यदिवस पर एक केंद्र में कम से कम 5-6 बच्चों को बुलाया जा रहा है और वर्कर उन्हें खेल-खेल में शिक्षण दे रही हैं। कहीं चुटकियां बजाकर तो कहीं नाच-गाकर बच्चों की अभ्यास कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
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सीडीपीओ कमलेश गर्ग ने बताया कि बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण में प्रयोग किए जाने वाले ज्यादातर उपकरण केंद्रों में हैं। अभ्यास कक्षाओं में बच्चों को उन्हीं के माध्यम से शिक्षण दिया जा रहा है। यह कार्य जिले में सभी केंद्रों पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिन केंद्रों में प्ले स्कूल बनेंगे, उनमें हर जरूरी सुविधा बच्चों को उपलब्ध करवाई जाएगी।
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जिले के 191 आंगनबाड़ी केंद्रों को महिला एवं बाल विकास विभाग प्ले स्कूलों में बदलने की तैयारियों में जुटा है। बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा कैसे दी जाए, इसके लिए जिले की 1270 वर्करों को प्रशिक्षण दिया गया है। सितंबर माह में हुए प्रशिक्षण कार्य के बाद अब वर्करों को विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि वे बच्चों की करीब 20-20 दिन की अभ्यास कक्षाएं लगाएं। अब सभी केंद्रों में बच्चों की अभ्यास कक्षाएं लगाई जा रही हैं, जो तकरीबन पूरा होने को हैं।
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कोरोना महामारी के दृष्टिगत अभी बच्चों को ज्यादा संख्या में केंद्रों में नहीं बुलाया जा रहा। फिर भी हर कार्यदिवस पर एक केंद्र में कम से कम 5-6 बच्चों को बुलाया जा रहा है और वर्कर उन्हें खेल-खेल में शिक्षण दे रही हैं। कहीं चुटकियां बजाकर तो कहीं नाच-गाकर बच्चों की अभ्यास कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
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सीडीपीओ कमलेश गर्ग ने बताया कि बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण में प्रयोग किए जाने वाले ज्यादातर उपकरण केंद्रों में हैं। अभ्यास कक्षाओं में बच्चों को उन्हीं के माध्यम से शिक्षण दिया जा रहा है। यह कार्य जिले में सभी केंद्रों पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिन केंद्रों में प्ले स्कूल बनेंगे, उनमें हर जरूरी सुविधा बच्चों को उपलब्ध करवाई जाएगी।