{"_id":"69d959ea700ef7d50000b577","slug":"kurukshetra-through-the-ages-discussion-on-the-topic-kaithal-news-c-245-1-kht1007-147725-2026-04-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: कुरुक्षेत्र युगों के माध्यम से विषय पर हुआ विचार-विमर्श","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: कुरुक्षेत्र युगों के माध्यम से विषय पर हुआ विचार-विमर्श
Sat, 11 Apr 2026 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 11 Apr 2026 01:43 AM IST
विज्ञापन
10 ढांड 01 संगोष्ठी में भाग लेते हुए छात्र छात्राएं तथा स्टाफ सदस्य।
संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। बाबू अनंत राम जनता महाविद्यालय, कौल के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में ‘कुरुक्षेत्र युगों के माध्यम से’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी में सहभागिता की। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. पुष्पा रानी के निर्देशन में हुआ, जिसमें छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए विचार-विमर्श में योगदान दिया।
यह संगोष्ठी भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद, श्रीमद्भगवद्गीता अध्ययन केंद्र, स्वदेशी शोध संस्थान, जियो गीता तथा विजन कुरुक्षेत्र के सहयोग से विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग द्वारा आयोजित की गई।
डॉ. पुष्पा रानी ने बताया कि संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों से आए विद्वानों ने भारतीय अध्यात्म, संस्कृति और इतिहास की समृद्ध परंपरा पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि कुरुक्षेत्र, जो धर्म, इतिहास और संस्कृति की पावन भूमि है, उसे अपनी समग्र पहचान को और व्यापक रूप में स्थापित करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
संगोष्ठी में यह भी प्रतिपादित किया गया कि इतिहास केवल लिखित ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि मौखिक
परंपराएं, अभिलेख, लोककथाएं और प्राचीन स्रोत भी इतिहास बोध के महत्वपूर्ण आधार हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल ने कहा कि संगोष्ठी में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन कर छात्र-छात्राओं ने महत्वपूर्ण ज्ञान अर्जित किया।
उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में शोधपरक दृष्टिकोण विकसित होता है और वे अपनी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।
विज्ञापन
ढांड। बाबू अनंत राम जनता महाविद्यालय, कौल के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में ‘कुरुक्षेत्र युगों के माध्यम से’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी में सहभागिता की। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. पुष्पा रानी के निर्देशन में हुआ, जिसमें छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए विचार-विमर्श में योगदान दिया।
यह संगोष्ठी भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद, श्रीमद्भगवद्गीता अध्ययन केंद्र, स्वदेशी शोध संस्थान, जियो गीता तथा विजन कुरुक्षेत्र के सहयोग से विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग द्वारा आयोजित की गई।
विज्ञापन
डॉ. पुष्पा रानी ने बताया कि संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों से आए विद्वानों ने भारतीय अध्यात्म, संस्कृति और इतिहास की समृद्ध परंपरा पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि कुरुक्षेत्र, जो धर्म, इतिहास और संस्कृति की पावन भूमि है, उसे अपनी समग्र पहचान को और व्यापक रूप में स्थापित करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
संगोष्ठी में यह भी प्रतिपादित किया गया कि इतिहास केवल लिखित ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि मौखिक
परंपराएं, अभिलेख, लोककथाएं और प्राचीन स्रोत भी इतिहास बोध के महत्वपूर्ण आधार हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल ने कहा कि संगोष्ठी में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन कर छात्र-छात्राओं ने महत्वपूर्ण ज्ञान अर्जित किया।
उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में शोधपरक दृष्टिकोण विकसित होता है और वे अपनी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।