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Kaithal News: संतुलित रखें वात, पित्त, कफ ः डाॅ. शकुंतला
Sat, 26 Oct 2024 02:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 26 Oct 2024 02:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। नौंवे आयुर्वेदिक दिवस पर जिला के सभी आयुष आरोग्य मंदिरों में प्रकृति परीक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों ने आमजन को अच्छे स्वास्थ्य संबंधित जानकारी दी। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डाॅ. शकुंतला दहिया ने बताया कि वात पित कफ का सही संतुलन ही अच्छे स्वास्थ्य की निशानी होती है। उन्होंने कहा कि आमजन को अपने शरीर की प्रकृति पहचान कर खान पान का ध्यान रखना चाहिए।
डाॅ. दहिया ने बताया कि आजकल गलत खान पान एवं दिनचर्या के बिगड़ने से हमारे शरीर के वात पित और कफ प्रकृति असंतुलित हो जाती है। इसके कारण ही सारे रोग पैदा हो रहे है। वात पित कफ का सही संतुलन हो तो स्वास्थ्य बेहतर माना जाता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी प्रकृति का पता होना चाहिए और प्रकृति को ध्यान में रखते हुए ही आहार ग्रहण करना चाहिए। दहिया ने बताया कि आयुर्वेद हमारे जीवन का अंग प्राचीन काल से ही रहा है। हल्दी, जीरा, अजवाइन, मैथी का प्रयोग हमारे घरों में घरेलू नुस्खों के तौर पर चलता आ रहा है। आयुर्वेदिक न केवल बीमारी ठीक करता है, बल्कि बीमार ही नहीं होने देता। ऐसी आयुर्वेदिक पद्धति का प्रचार प्रसार करने में आयुष विभाग कार्य कर रहा है।
चीका में लगाया योग शिविर
गुहला-चीका। भारतीय योग संस्थान जिला इकाई चीका द्वारा हुड्डा स्कूल वालों केंद्र पर शुद्धिकरण क्रिया को लेकर एक शिविर लगाया गया। शुद्धिकरण क्रियाएं करवाने के लिए विशेष रूप से कैथल के जिला प्रधान शिक्षक सतपाल भारद्वाज, संरक्षक प्रदीप शर्मा, मुख्य शिक्षक संजीव कुमार गर्ग व रामबिलास चीका पहुंचे।
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क्रियाएं करवाने से पहले योग शिक्षक सतपाल भारद्वाज ने बताया के बदलते मौसम में शुद्धि क्रियाओं का विशेष लाभ रहता है। इन क्रियाओं के करने से व्यक्ति मौसमी बीमारियां नजला, जुकाम, खांसी आदि से बचा रहता है। संवाद
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कैथल। नौंवे आयुर्वेदिक दिवस पर जिला के सभी आयुष आरोग्य मंदिरों में प्रकृति परीक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों ने आमजन को अच्छे स्वास्थ्य संबंधित जानकारी दी। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डाॅ. शकुंतला दहिया ने बताया कि वात पित कफ का सही संतुलन ही अच्छे स्वास्थ्य की निशानी होती है। उन्होंने कहा कि आमजन को अपने शरीर की प्रकृति पहचान कर खान पान का ध्यान रखना चाहिए।
डाॅ. दहिया ने बताया कि आजकल गलत खान पान एवं दिनचर्या के बिगड़ने से हमारे शरीर के वात पित और कफ प्रकृति असंतुलित हो जाती है। इसके कारण ही सारे रोग पैदा हो रहे है। वात पित कफ का सही संतुलन हो तो स्वास्थ्य बेहतर माना जाता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी प्रकृति का पता होना चाहिए और प्रकृति को ध्यान में रखते हुए ही आहार ग्रहण करना चाहिए। दहिया ने बताया कि आयुर्वेद हमारे जीवन का अंग प्राचीन काल से ही रहा है। हल्दी, जीरा, अजवाइन, मैथी का प्रयोग हमारे घरों में घरेलू नुस्खों के तौर पर चलता आ रहा है। आयुर्वेदिक न केवल बीमारी ठीक करता है, बल्कि बीमार ही नहीं होने देता। ऐसी आयुर्वेदिक पद्धति का प्रचार प्रसार करने में आयुष विभाग कार्य कर रहा है।
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चीका में लगाया योग शिविर
गुहला-चीका। भारतीय योग संस्थान जिला इकाई चीका द्वारा हुड्डा स्कूल वालों केंद्र पर शुद्धिकरण क्रिया को लेकर एक शिविर लगाया गया। शुद्धिकरण क्रियाएं करवाने के लिए विशेष रूप से कैथल के जिला प्रधान शिक्षक सतपाल भारद्वाज, संरक्षक प्रदीप शर्मा, मुख्य शिक्षक संजीव कुमार गर्ग व रामबिलास चीका पहुंचे।
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क्रियाएं करवाने से पहले योग शिक्षक सतपाल भारद्वाज ने बताया के बदलते मौसम में शुद्धि क्रियाओं का विशेष लाभ रहता है। इन क्रियाओं के करने से व्यक्ति मौसमी बीमारियां नजला, जुकाम, खांसी आदि से बचा रहता है। संवाद