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Kaithal News: अनदेखी का शिकार बना कलायत का कपिल तीर्थ

Wed, 17 Sep 2025 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 17 Sep 2025 01:27 AM IST
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Kapil Tirtha of Kalayat became a victim of neglect
निशीकांत शर्मा
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कलायत। लुप्त सरस्वती नदी की प्रमाणिकता मिलने के 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी कलायत का कपिल मुनि तीर्थ उपेक्षा का शिकार है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधीन आने वाले इस तीर्थ को लेकर वर्षों से रिसर्च सेंटर व विकास योजनाओं की घोषणाएं हुईं, लेकिन धरातल पर आज तक कोई कार्य शुरू नहीं हो पाया। वर्तमान में यह पवित्र तीर्थ गंदगी के ढेर में तब्दील होकर अपनी पहचान बचाने के लिए जूझ रहा है।
2005 में फूटी थी दिव्य जलधारा : वर्ष 2005 में खुदाई के दौरान यहां से अलौकिक जल की धारा फूटी थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र का ध्यान खींचा। सरस्वती शोध संस्थान, इसरो, पुरातत्व विभाग और भूगर्भविदों सहित कई वैज्ञानिक यहां पहुंचे थे। पानी में मौजूद सुनहरे कणों की जांच के बाद वैज्ञानिकों ने इसे दिव्य जलधारा करार दिया था। संवाद
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2024 में फिर फूटी थी दिव्य धारा

अप्रैल 2024 में एक बार फिर तीर्थ से दिव्य जलधारा फूटी। सरस्वती बोर्ड के उपाध्यक्ष धूम्मन सिंह किरमच ने मौके पर पहुंचकर नमूने लिए और घाट व कुआं निर्माण का आश्वासन दिया। मगर एक वर्ष बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।
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किरमच बोले- मांगा गया है प्रस्ताव

सरस्वती बोर्ड उपाध्यक्ष धूम्मन सिंह किरमच ने बताया कि कपिल मुनि सरोवर की स्थिति मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के संज्ञान में है। तीर्थ कमेटी से विकास प्रस्ताव मांगा गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही सरस्वती नदी व तीर्थ के विकास कार्य धरातल पर दिखाई देंगे।
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