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Kaithal News: कलायत में निकाली कलश यात्रा
Thu, 14 Aug 2025 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 14 Aug 2025 01:40 AM IST
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42 कलायत: श्रीमद्भागवत पुराण की नगर परिक्रमा लगवाते आयोजक व कथा व्यास
संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्री कपिल मुनि मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा से पूर्व नगर फेरी एवं कलश यात्रा निकाली गई। वृंदावन से पधारे कथावाचक आचार्य भरत भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को भक्ति के महात्म्य से अवगत कराते हुए कहा कि भक्ति की व्याख्या नहीं हो सकती, व्याख्या केवल ज्ञान की होती है। भागवत का स्मरण ही जीवन का सार है, जो मानव को परम शांति व अभय प्रदान करता है।
आचार्य ने कहा कि जब जीव वेदांत, कर्मकांड और योग मार्ग की कठिनाइयों से थक जाता है, तब भक्ति का सहज मार्ग श्रीकृष्ण कृपा से खुलता है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा भगवान नारायण से ब्रह्मा, फिर नारद मुनि होते हुए वेदव्यास तक पहुंची, जिन्होंने इसे 18 हजार श्लोकों में रूपांतरित कर जनमानस के लिए सुलभ बनाया। सुखदेव मुनि द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई यह कथा देवताओं के लिए भी दुर्लभ मानी जाती है।
भागवत कथा के महत्व पर उन्होंने कहा कि मृत्यु के सत्य को जानने से मृत्यु का भय मिट जाता है, जैसे परीक्षित ने कथा श्रवण कर अभय प्राप्त किया। यह ग्रंथ वेद और उपनिषदों का सार है, हृदय को जाग्रत कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है और भगवान के प्रति गहरा अनुराग उत्पन्न करता है।
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कथा के प्रथम दिवस के अंत में आयोजक अजय शर्मा और मंदिर के मुख्य पुजारी संजय गौतम ने प्रसाद वितरण किया।
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कलायत। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्री कपिल मुनि मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा से पूर्व नगर फेरी एवं कलश यात्रा निकाली गई। वृंदावन से पधारे कथावाचक आचार्य भरत भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को भक्ति के महात्म्य से अवगत कराते हुए कहा कि भक्ति की व्याख्या नहीं हो सकती, व्याख्या केवल ज्ञान की होती है। भागवत का स्मरण ही जीवन का सार है, जो मानव को परम शांति व अभय प्रदान करता है।
आचार्य ने कहा कि जब जीव वेदांत, कर्मकांड और योग मार्ग की कठिनाइयों से थक जाता है, तब भक्ति का सहज मार्ग श्रीकृष्ण कृपा से खुलता है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा भगवान नारायण से ब्रह्मा, फिर नारद मुनि होते हुए वेदव्यास तक पहुंची, जिन्होंने इसे 18 हजार श्लोकों में रूपांतरित कर जनमानस के लिए सुलभ बनाया। सुखदेव मुनि द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई यह कथा देवताओं के लिए भी दुर्लभ मानी जाती है।
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भागवत कथा के महत्व पर उन्होंने कहा कि मृत्यु के सत्य को जानने से मृत्यु का भय मिट जाता है, जैसे परीक्षित ने कथा श्रवण कर अभय प्राप्त किया। यह ग्रंथ वेद और उपनिषदों का सार है, हृदय को जाग्रत कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है और भगवान के प्रति गहरा अनुराग उत्पन्न करता है।
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कथा के प्रथम दिवस के अंत में आयोजक अजय शर्मा और मंदिर के मुख्य पुजारी संजय गौतम ने प्रसाद वितरण किया।

42 कलायत: श्रीमद्भागवत पुराण की नगर परिक्रमा लगवाते आयोजक व कथा व्यास

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