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Kaithal News: कैथल में काका ने फहराया था पहली बार तिरंगा
Fri, 15 Aug 2025 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 15 Aug 2025 01:36 AM IST
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कमल बहल
कैथल। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर कैथल निवासी महाशय काका राम ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1920-22 के असहयोग आंदोलन, 1930-32 के सविनय अवज्ञा आंदोलन और 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 15 अगस्त 1947 को कैथल में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने का गौरव भी महाशय काका राम को ही प्राप्त हुआ। उन्होंने कमेटी चौक स्थित छज्जु कुंड पर तिरंगा फहराकर नगरवासियों को स्वतंत्रता का संदेश दिया।
यह जानकारी 92 वर्षीय साहित्यकार मास्टर श्याम लाल गौड़ ने दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1857 से देश में स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा था, लेकिन कैथल के लोग लगभग 45 साल बाद इस आंदोलन में सक्रिय हुए। महाशय काका राम ऐसे क्रांतिकारी थे, जिनका सीधा संपर्क महात्मा गांधी से था। वर्ष 1903 में वे कांग्रेस पार्टी के जिला महामंत्री बने और इसके बाद लगातार स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करते रहे।
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छह वर्ष की जेल ः महाशय काका राम को 1920 से 1942 के बीच विभिन्न आंदोलनों में छह वर्ष जेल में रहना पड़ा। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें पाकिस्तान स्थित मुल्तान की जेल में बंद किया गया, जहां उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी।
छठे दिन उनकी हालत गंभीर हो गई, जिसके बाद अंग्रेज सरकार ने उन्हें मुल्तान से गुजरात के राजकोट स्थित जेल में स्थानांतरित किया। संवाद
आंदोलन से परिवार भी जुड़ा था ः मास्टर श्याम लाल
साहित्यकार मास्टर श्याम लाल गौड़ ने बताया कि महाशय काका राम के पिता कपड़े के व्यापारी थे। 1932 में असहयोग आंदोलन के दौरान, जब महिलाओं ने शराब के ठेकों का घेराव किया, तब उनके पिता ने अपनी दुकान पर रखे विदेशी कपड़े को बीच बाजार में जलाकर बहिष्कार किया। यह घटना नगर में अंग्रेजी वस्त्रों के विरोध की प्रतीक बन गई। मास्टर गौड़ ने बताया कि महाशय काका राम ने न केवल स्वयं आजादी की लड़ाई लड़ी, बल्कि कैथल में अनेक युवाओं और नागरिकों को इस आंदोलन से जोड़ा। उनके प्रयासों से ही नगर में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद हुई और स्वतंत्रता की अलख जगाई गई।
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कैथल। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर कैथल निवासी महाशय काका राम ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1920-22 के असहयोग आंदोलन, 1930-32 के सविनय अवज्ञा आंदोलन और 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 15 अगस्त 1947 को कैथल में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने का गौरव भी महाशय काका राम को ही प्राप्त हुआ। उन्होंने कमेटी चौक स्थित छज्जु कुंड पर तिरंगा फहराकर नगरवासियों को स्वतंत्रता का संदेश दिया।
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यह जानकारी 92 वर्षीय साहित्यकार मास्टर श्याम लाल गौड़ ने दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1857 से देश में स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा था, लेकिन कैथल के लोग लगभग 45 साल बाद इस आंदोलन में सक्रिय हुए। महाशय काका राम ऐसे क्रांतिकारी थे, जिनका सीधा संपर्क महात्मा गांधी से था। वर्ष 1903 में वे कांग्रेस पार्टी के जिला महामंत्री बने और इसके बाद लगातार स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करते रहे।
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छह वर्ष की जेल ः महाशय काका राम को 1920 से 1942 के बीच विभिन्न आंदोलनों में छह वर्ष जेल में रहना पड़ा। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें पाकिस्तान स्थित मुल्तान की जेल में बंद किया गया, जहां उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी।
छठे दिन उनकी हालत गंभीर हो गई, जिसके बाद अंग्रेज सरकार ने उन्हें मुल्तान से गुजरात के राजकोट स्थित जेल में स्थानांतरित किया। संवाद
आंदोलन से परिवार भी जुड़ा था ः मास्टर श्याम लाल
साहित्यकार मास्टर श्याम लाल गौड़ ने बताया कि महाशय काका राम के पिता कपड़े के व्यापारी थे। 1932 में असहयोग आंदोलन के दौरान, जब महिलाओं ने शराब के ठेकों का घेराव किया, तब उनके पिता ने अपनी दुकान पर रखे विदेशी कपड़े को बीच बाजार में जलाकर बहिष्कार किया। यह घटना नगर में अंग्रेजी वस्त्रों के विरोध की प्रतीक बन गई। मास्टर गौड़ ने बताया कि महाशय काका राम ने न केवल स्वयं आजादी की लड़ाई लड़ी, बल्कि कैथल में अनेक युवाओं और नागरिकों को इस आंदोलन से जोड़ा। उनके प्रयासों से ही नगर में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद हुई और स्वतंत्रता की अलख जगाई गई।