फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   kaithal, school,bus

जान जोखिम में डालकर स्कूल का सफर

Sat, 21 Jan 2017 12:07 AM IST
kaithal beuro
kaithal beuro Updated Sat, 21 Jan 2017 12:07 AM IST
विज्ञापन
kaithal, school,bus
oop - फोटो : amar ujala
पहले अंबाला के साहा और अब यूपी के एटा में स्कूल वाहन की टक्कर में बच्चों की जान गंवाने के बावजूद बच्चों को स्कूल लाने व ले जाने के लिए नियमों की पालना नहीं हो रही है। बच्चों के जान को खतरे में डालकर स्कूल लाया जाया जा रहा है। स्कूल संचालक तो नियमों का उल्लंघन कर ही रहे हैं। साथ में प्रशासन व अभिभावकों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अमर उजाला द्वारा शुक्रवार सुबह शहर के प्रमुख मार्गों से गुजर रहे वाहन चालकों को देखा तो कई तरह की खामियां नजर आईं।
विज्ञापन

बसों को अंधाधुंध चलाते हैं वाहन चालक
शुक्रवार सुबह बस चालक अपनी मर्जी से गलत साईड, तेज गति से बसों, ऑटो व वैन चलाते हुए पाए गए। कुरुक्षेत्र रोड बाईपास चौक पर एक बस चालक चौक पर गलत तरीके से बस ले जाते हुए दिखा। एक बस चालक मोबाइल पर बात करते हुए भी पाया गया। जो हादसों का कारण बन सकता है।
विज्ञापन


बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया
करनाल रोड पर रेलवे फाटक के निकट 25 सीटर बस में 63 बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा हुआ था। बस में इतनी भीड़ थी कि बच्चों से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। इसमें कोई प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स नहीं था। कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे। केवल चालक के बैठने के लिए मुश्किल से जगह बची हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


केवल नाम के लगे हैं कैमरे
करनाल रोड पर एक स्कूल बस में महज नाम का सीसीटीवी कैमरा मिला। उसमें ना कोई रिकॉर्डिंग हो रही थी। ना ही डिस्पले थी। जिस कारण खानापूर्ती करते हुए कैमरे को बसों में लटकाया हुआ है। कई बसों में स्पीडोमीटर भी नहीं पाए गए।

ना ड्रेस, ना अटेंडेंट, चालक नौसीखिए
कई स्कूल वाहनों में बस चालक ना तो ड्रेस में मिले। ना ही उन बसों में अटेंडेंट नजर आए। अंबाला रोड पर एक स्कूल मिनी बस का चालक बीस साल से भी कम उम्र का था। जबकि नियमानुसार स्कूल बस के लिए कम से कम पांच साल का अनुभव जरुरी है।

ऑटो चालक ठूंस-ठूंस कर ले जा हैं बच्चों को
ना केवल स्कूल बसों बल्कि ऑटो चालक भी बच्चों को ठूंस-ठूंस कर ले जाते हुए मिले। अधिकतर ऑटो चालकों ने अपनी साईड की सीटों पर भी ठंड के बावजूद बच्चों को बैठाया हुआ था। नियमों का पालन करने के नाम पर कुछ वर्षों पूर्व ऑटो चालकों ने किराया तो बढ़ा दिया था। लेकिन बच्चों की संख्या फिर से वहीं पहुंच गई। अभिभावक विनय गुलाटी ने कहा कि प्रशासन को स्कूल वाहनों के लिए किराया भी तय करना चाहिए।
स्कूल वाहनों का रंग भी दूसरा मिला-नियमानुसार स्कूल वाहनों का रंग पीला होना चाहिए। लेकिन अधिकतर स्कूलों के वाहनों का रंग पीला नहीं मिला। क्वालिस सहित क्रूजर जैसी गाड़ियों को स्कूल वाहन के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। जिनका रंग भी पीला नहीं है।


आरटीए ओमप्रकाश का कहना है कि पिछले महीने स्कूल सुरक्षा वाहन समिति की बैठक हुई थी। इस बार फिर यह बैठक प्रस्तावित है। दिसंबर माह में भी कई स्कूल वाहनों के चालान किए गए हैं। फिर भी स्कूल वाहन चालक नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं यातायात पुलिस प्रभारी दीपक कुमार ने कहा कि स्कूल संचालकों को स्कूलों जाकर नियमों का पालन करने का आह्वान किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed