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प्योदा में बन सकता है संस्कृत विवि

Sat, 14 Jan 2017 12:23 AM IST
kaithal beuro
kaithal beuro Updated Sat, 14 Jan 2017 12:23 AM IST
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गांव मूंदड़ी में बनने वाला संस्कृत विश्वविद्यालय को अब गांव प्यौदा में बनाया जा सकता हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लवकुश तीर्थ वाली ऐतिहासिक जन्म स्थली गांव मूंदड़ी में इसे बनाने का ऐलान किया था। लेकिन गांव मूंदड़ी की पंचायत ने जमीन देने के लिए कई शर्तें रख दीं। जिस पर अब गांव प्यौदा ने बिना किसी शर्त के विश्वविद्यालय बनाए जाने की पेशकश की है। पंचायत के प्रस्ताव को प्रशासन ने सरकार के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है।
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इन शर्तों पर अटका हैं गांव में विश्वविद्यालय को बनाने का मामला
गांव मूंदड़ी के सरपंच सुभाष चंद ने बताया कि उनके गांव में बनने वाले विश्वविद्यालय को बनाने ग्रामीणों के हितों के लिए कुछ शर्तें हैं।  अगर उनके गांव में विश्व विद्यालय में लगने वाले तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी उसके गांव के लोगों को ही लगाया जा सके। विश्वविद्यालय का नाम गांव मूंदड़ी के नाम पर हो। जिससे इसका नाम पूरे देश में प्रसिद्ध हो। विश्वविद्यालय में होने वाले दाखिले में गांव के विद्यार्थियों के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो। इसके अलावा गांव पंचायत द्वारा दी जाने वाली जमीन के बदले हर वर्ष ग्राम पंचायत को 5 लाख रुपये की फंडिंग दी जाए। यदि यह विश्वविद्यालय किसी अन्य गांव में बनता है तो उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन वह अपने गांव के लोगों के हितों में रहकर ही कोई फैसला करेंगे।
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3 जनवरी को दिया प्रस्ताव
गांव प्यौदा के ग्राम सचिव सतीश ने बताया कि गांव की पंचायती जमीन में विश्वविद्यालय बनाने की पेशकश की गई है। 3 जनवरी को इस बारे में प्रस्ताव प्रशासन को दे दिया गया है। इसमें प्रशासन ने 20 एकड़ जमीन मांगी थी जिसके 30 एकड़ जमीन का प्रस्ताव दिया गया। अभी यह प्रस्ताव जिला प्रशासन के पास विचारधीन है। जो सरकार के पास जाने के बाद प्रस्तावित हो जाएगा।
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बढ़ेगा गांव का गौरव
गांव प्यौदा के सरपंच प्रतिनिधि राममेहर ने कहा कि अगर सरकार उनके गांव में महार्षि वाल्मीकि संस्कृति विश्वविद्यालय का निर्माण करती हैं तो इससे गांव का गौरव बढ़ेगा। क्योंकि इस विश्वविद्यालय में अन्य राज्यों व जिलों से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आएंगे। तो उनके गांव के विद्यार्थियों को भी इससे प्ररेणा मिलेगी। जिससे वह कड़ी मेहनत करके अपने मुकाम को हासिल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को जमीन देने का फैसला उन्होंने गांव के विकास को देखकर दिया है। अगर सरकार उनके गांव को विश्वविद्यालय का तोहफा देती है तो उनका गांव काफी आगे बढ़ेगा।
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