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शराब ठेके के विरोध में जाम करने पहुंची महिलाओं पर पुलिस ने बरसाईं लाठियां
kaithal beauro
Updated Sat, 20 May 2017 12:19 AM IST
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- फोटो : kaithal beuaro
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शराब ठेके के विरोध में जाम लगाने के लिए पहुंची गांव करोड़ा की महिलाओं व पुलिस के बीच टकराव हो गया। पथराव के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर महिलाओं को सड़क से खदेड़ दिया। जिस कारण दर्जन भर महिलाओं को चोटें आई हैं। उन्हें अस्पताल लाया गया। साथ ही एसएचओ सहित दो अन्य पुलिस कर्मचारियों को भी चोटें आई हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
गांव कोटड़ा की महिला व पुरुषों ने गांव में फिर से खुले शराब ठेके को हटाने के लिए शुक्रवार सुबह कैथल असंध मार्ग पर जाम लगाकर जिला प्रशासन व सरकार के खिलाफ रोष जाहिर किया। जैसे ही ग्रामीणों ने कैथल असंध मार्ग पर जाम लगाया। सूचना मिलते ही राजौंद थाना प्रभारी रामकुमार पुलिस बल के साथ जाम स्थल पर पहुंचे व लोगों को समझाने लगे। पुलिस व लोगों के बीच तीखी नोक-झौंक हो गई। इसी बीच किसी ने पुलिस पर पथराव कर दिया। जिस पर पुलिस ने भी लाठीचार्ज करते हुए लोगों को वहां से खदेड़ दिया। लाठीचार्ज के चलते दर्जन भर महिलाओं को चोटें आई हैं। इनमें रानी, भजनी, स्नेहलता, सीमा, संतरो, माया, रीना, रेखा व पुरुष लहणा सिंह शामिल है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। मामला बढ़ता देख व स्थिति को संभालने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। तहसीलदार राजबीर व डीएसपी सतीश गौतम भी मौके पर पहुंचे गए। लोगों ने कहा कि वह गांव से शराब का ठेका हटवाने के लिए विरोध कर रहे थे। इसी बीच उनके पास राजौंद पुलिस पहुंची और प्रदर्शनकारियों को धमकाते हुए जाम खोलने की बात कही। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर लाठियां भांजी। उनका आरोप है कि ग्रामीणों व महिलाओं को दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया। इसमें आधा दर्जन महिलाएं व पुरुष जख्मी हो गए। जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
दूसरी ओर तीन पुलिस अधिकारी एएसआई सत्यवान, चैन सिंह, राजौंद थाना प्रभारी रामकुमार भी घायल हो गए।
राजौंद थाना प्रभारी रामकुमार का कहना है कि जाम खुलवाने के लिए जब वहां पुलिस पहुंची तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ हाथा पाई की। शांत करने के बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं रुके। इसके बाद ग्रामीणों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस को बचाव करते हुए लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें वह स्वयं व उनके कई कर्मचारी जख्मी हो गए। डीएसपी सतीश गौतम व तहसीलदार राजबीर द्वारा ग्रामीणों को समझा बुझाकर जाम खुलवाया गया।
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डीएसपी सतीश गौतम ने पुलिस द्वारा आश्वासन दिया गया कि वहां से शराब का ठेका हटा दिया जाएगा। इसके बाद जाम खोला गया। उधर ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई दिन पहले भी शराब का ठेका हटवाने का विरोध किया था। इसके बाद वहां से ठेका हटा दिया गया था। लेकिन फिर से वहीं ठेका खोलने के विरोध में उन्होंने प्रदर्शन किया था। घटना के बाद एसपी सुमेर प्रताप सिंह स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचेे। उन्होंने मौके पर पहुंचकर पूरी स्थिति का जायजा लिया।
रामपाल माजरा ने जानां घायलों का हाल
कैथल। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव एवं इनेलो नेता रामपाल माजरा ने घटना पर क्षोभ व्यक्त किया। तथा पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्वक तरीके से दलित महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की। वह अस्पताल पहुंचकर दलित घायल महिलाओं व परिजनों से मिले। माजरा ने इस बारे में सिविल सर्जन डा. मुनीष बंसल को फोन कर तुरंत मेडिकल सुविधाएं देने और दाखिल करने को कहा। माजरा ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि दलितों पर हो रहे अत्याचार इस बात के प्रमाण है कि सरकार दलित विरोधी है और उनके उत्पीड़न को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। कोटड़ा में शांतिपूर्वक धरने पर बैठी दलित महिलाओं को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। जो कि न केवल अमानवीय व्यवहार बल्कि निहत्थी महिलाओं पर किया गया जघन्य अपराध भी है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दलितों को न्याय देने के लिए त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित किया जाए।
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गांव कोटड़ा की महिला व पुरुषों ने गांव में फिर से खुले शराब ठेके को हटाने के लिए शुक्रवार सुबह कैथल असंध मार्ग पर जाम लगाकर जिला प्रशासन व सरकार के खिलाफ रोष जाहिर किया। जैसे ही ग्रामीणों ने कैथल असंध मार्ग पर जाम लगाया। सूचना मिलते ही राजौंद थाना प्रभारी रामकुमार पुलिस बल के साथ जाम स्थल पर पहुंचे व लोगों को समझाने लगे। पुलिस व लोगों के बीच तीखी नोक-झौंक हो गई। इसी बीच किसी ने पुलिस पर पथराव कर दिया। जिस पर पुलिस ने भी लाठीचार्ज करते हुए लोगों को वहां से खदेड़ दिया। लाठीचार्ज के चलते दर्जन भर महिलाओं को चोटें आई हैं। इनमें रानी, भजनी, स्नेहलता, सीमा, संतरो, माया, रीना, रेखा व पुरुष लहणा सिंह शामिल है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। मामला बढ़ता देख व स्थिति को संभालने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। तहसीलदार राजबीर व डीएसपी सतीश गौतम भी मौके पर पहुंचे गए। लोगों ने कहा कि वह गांव से शराब का ठेका हटवाने के लिए विरोध कर रहे थे। इसी बीच उनके पास राजौंद पुलिस पहुंची और प्रदर्शनकारियों को धमकाते हुए जाम खोलने की बात कही। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर लाठियां भांजी। उनका आरोप है कि ग्रामीणों व महिलाओं को दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया। इसमें आधा दर्जन महिलाएं व पुरुष जख्मी हो गए। जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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दूसरी ओर तीन पुलिस अधिकारी एएसआई सत्यवान, चैन सिंह, राजौंद थाना प्रभारी रामकुमार भी घायल हो गए।
राजौंद थाना प्रभारी रामकुमार का कहना है कि जाम खुलवाने के लिए जब वहां पुलिस पहुंची तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ हाथा पाई की। शांत करने के बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं रुके। इसके बाद ग्रामीणों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस को बचाव करते हुए लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें वह स्वयं व उनके कई कर्मचारी जख्मी हो गए। डीएसपी सतीश गौतम व तहसीलदार राजबीर द्वारा ग्रामीणों को समझा बुझाकर जाम खुलवाया गया।
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डीएसपी सतीश गौतम ने पुलिस द्वारा आश्वासन दिया गया कि वहां से शराब का ठेका हटा दिया जाएगा। इसके बाद जाम खोला गया। उधर ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई दिन पहले भी शराब का ठेका हटवाने का विरोध किया था। इसके बाद वहां से ठेका हटा दिया गया था। लेकिन फिर से वहीं ठेका खोलने के विरोध में उन्होंने प्रदर्शन किया था। घटना के बाद एसपी सुमेर प्रताप सिंह स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचेे। उन्होंने मौके पर पहुंचकर पूरी स्थिति का जायजा लिया।
रामपाल माजरा ने जानां घायलों का हाल
कैथल। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव एवं इनेलो नेता रामपाल माजरा ने घटना पर क्षोभ व्यक्त किया। तथा पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्वक तरीके से दलित महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की। वह अस्पताल पहुंचकर दलित घायल महिलाओं व परिजनों से मिले। माजरा ने इस बारे में सिविल सर्जन डा. मुनीष बंसल को फोन कर तुरंत मेडिकल सुविधाएं देने और दाखिल करने को कहा। माजरा ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि दलितों पर हो रहे अत्याचार इस बात के प्रमाण है कि सरकार दलित विरोधी है और उनके उत्पीड़न को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। कोटड़ा में शांतिपूर्वक धरने पर बैठी दलित महिलाओं को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। जो कि न केवल अमानवीय व्यवहार बल्कि निहत्थी महिलाओं पर किया गया जघन्य अपराध भी है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दलितों को न्याय देने के लिए त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित किया जाए।