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समस्याओं से जूझ रहा है स्वास्थ्य विभाग
kaithal beauro
Updated Thu, 27 Apr 2017 12:27 AM IST
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- फोटो : kaithal beuaro
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सामान्य अस्पताल के हालत सरकार बनने के बाद सुधरने की बजाय बिगड़ते जा रहे है। पिछले करीब दो वर्षों से मरीजों की सुविधाओं के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है। घटते डॉक्टर व बढ़ते मरीजों की संख्या जिले के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है। जिला अस्पताल में केवल 13 डॉक्टर काम चला रहे हैं। जबकि अस्पताल को चलाने के लिए 55 डॉक्टरों की आवश्यकता है। इसके अलावा बड़ी परियोजनाओं में अस्पताल बिलकुल पिछड़ा हुआ है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1200 से 1400 मरीजों की ओपीडी है। दवाई लेने से लेकर ईलाज करवाने व टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को घंटो तक लाइनों में खड़े रहना पड़ता है। यहां तक की पीने के पानी की भी समस्या बनी हुई है। मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर भी काम नहीं हुआ है।
यह है जिला अस्पताल की बड़ी समस्याएं-
1. जिला अस्पताल पिछले दो वर्ष से अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं है। गर्भवती महिलाओं को बाहर से प्राइवेट डॉक्टरों से भारी भरकम फीस देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है।
2. मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा के बावजूद सिटी स्कैन व एमआरआई की सुविधा नहीं है।
3. तीन साल पहले जिला अस्पताल को 200 बैड का बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जो आज तक पूरी नहीं हो पाई। इसके तहत सीएमओ कार्यालय को शिफ्ट किया जाना था। लेकिन अभी तक यह कागजों में ही चल रहा है।
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4. डॉक्टरों की भारी कमी के कारण 1400 से ज्यादा की ओपीडी में मरीज परेशान होते हैं। स्वीकृत 55 पदों पर 13 डॉक्टर जिला अस्पताल का काम चला रहे हैं।
मरीज बोले अस्पताल में आकर ईलाज की जगह मिलती है बीमारी- ईलाज करवाने के लिए आई महिला ओमवति, कैलाशो, मुर्ति, राकेश, राजबीर ने बताया कि अस्पताल में पांच घंटे के बाद इलाज मिलना शुरू होता है।
अस्पताल पहले तो ओपीडी की पर्ची के लिए एक घंटा लाइन में खड़े होना पड़ता है। इसके बाद डॉक्टरों के लिए घंटों तक का इंतजार करना पड़ता है। फिर ब्लड टेस्ट के लिए फिर घंटो तक कभी-कभी एक दिन का इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद जब दवाई लेने के बात आती है तो वहां भी घंटो तक लाइन में खड़ा होना पड़ता है। ऐसे ईलाज लेने के लिए आया मरीज ओर अधिक बिमार हो जाता है।
अस्पताल में पीने तक का पानी नहीं है-जिला अस्पताल में मरीजों के लिए पीने तक का पानी नहीं है। मरीज अपने लिए पीने का पानी बाहर से खरीदकर या घर से लेकर आते है। जिसके कारण मरीजों को गर्मी के मौमस में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्ग महिला सामो देवी ने बताया कि वह काफी देर प्यासी है। अस्पताल में पीने के पानी को कोई प्रबंध नहीं है। अस्पताल में केवल दो वाटर कूलर हैं। दोनों के दोनों खराब पड़े है।
जिला अस्पताल में मैन पॉवर की कमी है। जो भी संसाधन हैं। उनके हिसाब से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। सिटी स्कैन व एमआरआई के लिए टीम दौरा कर चुकी है। अल्ट्रासाउंड के लिए रेडक्रॉस से बातचीत चल रही है।
डा. मनीष बंसल, सीएमओ, कैथल।
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यह है जिला अस्पताल की बड़ी समस्याएं-
1. जिला अस्पताल पिछले दो वर्ष से अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं है। गर्भवती महिलाओं को बाहर से प्राइवेट डॉक्टरों से भारी भरकम फीस देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है।
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2. मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा के बावजूद सिटी स्कैन व एमआरआई की सुविधा नहीं है।
3. तीन साल पहले जिला अस्पताल को 200 बैड का बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जो आज तक पूरी नहीं हो पाई। इसके तहत सीएमओ कार्यालय को शिफ्ट किया जाना था। लेकिन अभी तक यह कागजों में ही चल रहा है।
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4. डॉक्टरों की भारी कमी के कारण 1400 से ज्यादा की ओपीडी में मरीज परेशान होते हैं। स्वीकृत 55 पदों पर 13 डॉक्टर जिला अस्पताल का काम चला रहे हैं।
मरीज बोले अस्पताल में आकर ईलाज की जगह मिलती है बीमारी- ईलाज करवाने के लिए आई महिला ओमवति, कैलाशो, मुर्ति, राकेश, राजबीर ने बताया कि अस्पताल में पांच घंटे के बाद इलाज मिलना शुरू होता है।
अस्पताल पहले तो ओपीडी की पर्ची के लिए एक घंटा लाइन में खड़े होना पड़ता है। इसके बाद डॉक्टरों के लिए घंटों तक का इंतजार करना पड़ता है। फिर ब्लड टेस्ट के लिए फिर घंटो तक कभी-कभी एक दिन का इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद जब दवाई लेने के बात आती है तो वहां भी घंटो तक लाइन में खड़ा होना पड़ता है। ऐसे ईलाज लेने के लिए आया मरीज ओर अधिक बिमार हो जाता है।
अस्पताल में पीने तक का पानी नहीं है-जिला अस्पताल में मरीजों के लिए पीने तक का पानी नहीं है। मरीज अपने लिए पीने का पानी बाहर से खरीदकर या घर से लेकर आते है। जिसके कारण मरीजों को गर्मी के मौमस में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्ग महिला सामो देवी ने बताया कि वह काफी देर प्यासी है। अस्पताल में पीने के पानी को कोई प्रबंध नहीं है। अस्पताल में केवल दो वाटर कूलर हैं। दोनों के दोनों खराब पड़े है।
जिला अस्पताल में मैन पॉवर की कमी है। जो भी संसाधन हैं। उनके हिसाब से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। सिटी स्कैन व एमआरआई के लिए टीम दौरा कर चुकी है। अल्ट्रासाउंड के लिए रेडक्रॉस से बातचीत चल रही है।
डा. मनीष बंसल, सीएमओ, कैथल।