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Kaithal News: कैथल के किसान ईश्वर कुंडु को मिलेगा मिलेनियर फार्मर अवॉर्ड
Mon, 17 Nov 2025 03:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 17 Nov 2025 03:13 AM IST
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16केएलटी4: किसान ईश्वर कुंडू
कलायत। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूसा नई दिल्ली स्थित संस्था में देश भर से कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वाले किसानों को सम्मानित किया जाएगा। समस्त भारत से नवीनमेषी किसानों का चयन किया गया। हरियाणा के कैथल जिले के किसान ईश्वर सिंह कुंडु की खोज को सम्मेलन में मिलेनियर सम्मान के लिए चुना गया है।
ईश्वर कुंडू ने बताया की सम्मान समारोह 6 व 7 दिसंबर को आयोजित होगा। कलायत उपमंडल के गांव कैलरम के किसान ईश्वर कुंडु ने केवल दसवीं तक ही शिक्षित होने के बावजूद बेहद सीमित संसाधनों में कृषि क्षेत्र के लिए कई खोजें की हैं।
उन्होंने कृषि को जहर मुक्त करने, किसान का खर्च कम करने, पैदावार बढ़ाने की दिशा में लगभग एक दशक तक शोध किए। उन्होंने अपनी खोज व विचार को केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक जाकर साबित किया कि हम बिना जहरीले रसायनों के भी खेती कर सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2004 में प्रथम फार्मूले की खोज की जिसे किसानों ने ही कमाल नाम दे दिया। उनकी खोज को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना, कृषि विज्ञान केंद्र कैथल और सिंजेंटा जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थान ने भी छह राज्यों में परीक्षण किए, जिससे 21 प्रतिशत तक पैदावार में वृद्धि पाई गई।
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ये खोज कमाल के नाम से देशभर में लोकप्रिय हो चुकी है। इसकी बदौलत कैथल जिले का नाम दुनिया भर में गूंज रहा है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम से लेकर श्री रामनाथ कोविन्द तक ने किसान की खोज को सम्मान दिया। उनके उत्पाद ने लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड सहित चार बार रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करवाए हैं। ये खोज पेटेंट गजट में प्रकाशित हो चुकी है। नवोनमेषी किसान ईश्वर कुंडू को राष्ट्रपति भवन में भी कई दिन राष्ट्रपति के मेहमान के तौर पर निवास का अवसर मिल चुका है।
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ईश्वर कुंडू ने बताया की सम्मान समारोह 6 व 7 दिसंबर को आयोजित होगा। कलायत उपमंडल के गांव कैलरम के किसान ईश्वर कुंडु ने केवल दसवीं तक ही शिक्षित होने के बावजूद बेहद सीमित संसाधनों में कृषि क्षेत्र के लिए कई खोजें की हैं।
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उन्होंने कृषि को जहर मुक्त करने, किसान का खर्च कम करने, पैदावार बढ़ाने की दिशा में लगभग एक दशक तक शोध किए। उन्होंने अपनी खोज व विचार को केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक जाकर साबित किया कि हम बिना जहरीले रसायनों के भी खेती कर सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2004 में प्रथम फार्मूले की खोज की जिसे किसानों ने ही कमाल नाम दे दिया। उनकी खोज को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना, कृषि विज्ञान केंद्र कैथल और सिंजेंटा जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थान ने भी छह राज्यों में परीक्षण किए, जिससे 21 प्रतिशत तक पैदावार में वृद्धि पाई गई।
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ये खोज कमाल के नाम से देशभर में लोकप्रिय हो चुकी है। इसकी बदौलत कैथल जिले का नाम दुनिया भर में गूंज रहा है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम से लेकर श्री रामनाथ कोविन्द तक ने किसान की खोज को सम्मान दिया। उनके उत्पाद ने लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड सहित चार बार रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करवाए हैं। ये खोज पेटेंट गजट में प्रकाशित हो चुकी है। नवोनमेषी किसान ईश्वर कुंडू को राष्ट्रपति भवन में भी कई दिन राष्ट्रपति के मेहमान के तौर पर निवास का अवसर मिल चुका है।