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Kaithal News: जिंदगी हामियां तेरी भरता रहा, रोज जीता... मरता रहा...
Mon, 15 Jul 2024 06:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 15 Jul 2024 06:09 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के सभागार में रविवार को साहित्य सभा कैथल की मासिक गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का आगाज करते हुए सबसे पहले ईश्वर गर्ग ने सुनाया- ‘तरह-तरह की सुविधाएं हैं छलना केवल, काम आदमी को वादे पर पलना केवल।’ रविंद्र कुमार रवि ने सुनाया- ‘जिंदगी हामियां तेरी भरता रहा, रोज जीता रहा रोज मरता रहा...।’
अध्यात्म के रंग में रंगी रचना प्रस्तुत करते हुए डॉक्टर प्रद्युमन भल्ला ने कहा, ‘क्या बताऊं कि क्या हो गया, जब गुरु रहनुमा हो गया। खूब हैरान हूं देख कर, आदमी अब खुदा हो गया।’ श्याम सुंदर गौड़ ने अपनी बात कुछ यूं रखी- ‘काम करने का सबके अलग-अलग नजरिया है।’ दिनेश बंसल दानिश ने कहा- ‘हम काम यूं करें कि हुनर बोलने लगे, मेहनत दिखे सभी का असर बोलने लगे।’ अनिल गर्ग ने हास्य का रंग यूं बिखेरा- ‘सास-ससुर मेरे घने सयाने।’
सावित्री धारीवाल ने सुनाया- ‘जिंदगी बड़े कहा आदि रहो का सफर है अधूरा सा अरमान है जिंदगी।’ रिसाल जांगड़ा ने अपनी बात कुछ यों रखी- ‘यादों का एक बड़ा खजाना रखता हूं, दिल में गुजरा हुआ जमाना रखता हूं।’ एयर होस्टेस के कर्तव्य पर शमशेर कैंडल ने कहा कि ‘अपना कार्य तो सभी करते हैं या कहिए ड्यूटियां करनी पड़ती है यह वायुयान की परिचारिकाएं ही है जो काम करते-करते मुस्कुराती रहती है।’
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बलवान कुंडू सावी ने सुनाया- ‘क्या हुआ तू पथिक अकेला दिवस निशि तू चलता चल।’ रामपाल गॉड ने कहा- ‘दुनिया झूठा कवे है, कोई गुप्ती से कोई उजागर दुश्मन सबका पावै से।’ रविंद्र मित्तल ने सबका भला मांगते हुए कहा- ‘जिंदगी की सुबह हो अनंत खुशियां और आनंद हो जिसमें जीवन पर्यंत।’
नीरू मेहता ने कहा- ‘राम तुम बन गए क्या यह महज ककई का वचन था, दशरथ का कथन था।’ इनके अतिरिक्त भोलाराम, सोहनलाल सोनी, अनिल कौशिक, डाक्टर चतुर्भुज बंसल ने भी अपनी रचनाएं रखी।
गोष्ठी की अध्यक्षता सभा के प्रधान अमृतलाल मदन ने की व मंच संचालन डॉ. प्रद्युमन भल्ला ने किया। इससे पूर्व गोष्ठी के आरंभ में दिवंगत टीसी अग्रवाल के प्रति दो मिनट का मौन साहित्य सभा के सदस्यों ने रखकर उनके लिए प्रार्थना की।
इसके बाद डॉ. प्रद्युमन भल्ला की 20वीं किताब लघु कविता संग्रह धुंध होते संबंध का विमोचन किया। इस पुस्तक में उनकी 100 लघु कविताएं संगृहीत हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रद्युमन भल्ला को हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला द्वारा बाबू बालमुकुंद गुप्त सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
अंत में गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे साहित्य सभा के प्रधान अमृतलाल मदान ने अध्यक्ष टिप्पणी के बाद कविता रचना प्रक्रिया सुनाई, जन्मनें लगती है जब-जब नई कविता या नव काव्य। रिसाल जांगड़ा ने सबका आभार जताया।
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कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के सभागार में रविवार को साहित्य सभा कैथल की मासिक गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का आगाज करते हुए सबसे पहले ईश्वर गर्ग ने सुनाया- ‘तरह-तरह की सुविधाएं हैं छलना केवल, काम आदमी को वादे पर पलना केवल।’ रविंद्र कुमार रवि ने सुनाया- ‘जिंदगी हामियां तेरी भरता रहा, रोज जीता रहा रोज मरता रहा...।’
अध्यात्म के रंग में रंगी रचना प्रस्तुत करते हुए डॉक्टर प्रद्युमन भल्ला ने कहा, ‘क्या बताऊं कि क्या हो गया, जब गुरु रहनुमा हो गया। खूब हैरान हूं देख कर, आदमी अब खुदा हो गया।’ श्याम सुंदर गौड़ ने अपनी बात कुछ यूं रखी- ‘काम करने का सबके अलग-अलग नजरिया है।’ दिनेश बंसल दानिश ने कहा- ‘हम काम यूं करें कि हुनर बोलने लगे, मेहनत दिखे सभी का असर बोलने लगे।’ अनिल गर्ग ने हास्य का रंग यूं बिखेरा- ‘सास-ससुर मेरे घने सयाने।’
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सावित्री धारीवाल ने सुनाया- ‘जिंदगी बड़े कहा आदि रहो का सफर है अधूरा सा अरमान है जिंदगी।’ रिसाल जांगड़ा ने अपनी बात कुछ यों रखी- ‘यादों का एक बड़ा खजाना रखता हूं, दिल में गुजरा हुआ जमाना रखता हूं।’ एयर होस्टेस के कर्तव्य पर शमशेर कैंडल ने कहा कि ‘अपना कार्य तो सभी करते हैं या कहिए ड्यूटियां करनी पड़ती है यह वायुयान की परिचारिकाएं ही है जो काम करते-करते मुस्कुराती रहती है।’
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बलवान कुंडू सावी ने सुनाया- ‘क्या हुआ तू पथिक अकेला दिवस निशि तू चलता चल।’ रामपाल गॉड ने कहा- ‘दुनिया झूठा कवे है, कोई गुप्ती से कोई उजागर दुश्मन सबका पावै से।’ रविंद्र मित्तल ने सबका भला मांगते हुए कहा- ‘जिंदगी की सुबह हो अनंत खुशियां और आनंद हो जिसमें जीवन पर्यंत।’
नीरू मेहता ने कहा- ‘राम तुम बन गए क्या यह महज ककई का वचन था, दशरथ का कथन था।’ इनके अतिरिक्त भोलाराम, सोहनलाल सोनी, अनिल कौशिक, डाक्टर चतुर्भुज बंसल ने भी अपनी रचनाएं रखी।
गोष्ठी की अध्यक्षता सभा के प्रधान अमृतलाल मदन ने की व मंच संचालन डॉ. प्रद्युमन भल्ला ने किया। इससे पूर्व गोष्ठी के आरंभ में दिवंगत टीसी अग्रवाल के प्रति दो मिनट का मौन साहित्य सभा के सदस्यों ने रखकर उनके लिए प्रार्थना की।
इसके बाद डॉ. प्रद्युमन भल्ला की 20वीं किताब लघु कविता संग्रह धुंध होते संबंध का विमोचन किया। इस पुस्तक में उनकी 100 लघु कविताएं संगृहीत हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रद्युमन भल्ला को हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला द्वारा बाबू बालमुकुंद गुप्त सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
अंत में गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे साहित्य सभा के प्रधान अमृतलाल मदान ने अध्यक्ष टिप्पणी के बाद कविता रचना प्रक्रिया सुनाई, जन्मनें लगती है जब-जब नई कविता या नव काव्य। रिसाल जांगड़ा ने सबका आभार जताया।