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चंदे पर रार : जब तक हिसाब नहीं दिया जाता तब तक चुप नहीं बैठेंगे
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Sun, 07 May 2017 11:53 PM IST
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चंदे पर हिसाब मांग रहे गुट ने की पत्रकार वार्ता
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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देवबन कैंची पर आरक्षण के लिए दिए गए धरने में आए चंदे पर हिसाब मांग रहे लोगों ने एक बार फिर हिसाब-किताब पर सवाल उठाए और कहा कि संघर्ष समिति की जांच टीम ने सही ढंग से जांच नहीं की।
रविवार को एक रेस्तरां में मीडिया से बातचीत मेें धरने का संचालन करने वाली पांच सदस्यीय कोर कमेटी में शामिल रहे तीन सदस्यों ने आरोप लगाया कि धरने के दौरान आए चंदे व खर्च में लाखों रुपये का गोलमाल हुआ और इसकी जांच के लिए जो कमेटी बनाई गई थी उसने मामले की सही जांच नहीं की। दूसरे पक्ष के प्रभाव में आकर क्लीन चिट दे दी, लेकिन बाद में जांच कमेटी ने खुद माना कि चंदे में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच करके पैसे हड़पने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 14 मई को महापंचायत बुलाकर समाज के लोग बड़ा निर्णय लेंगे। भरत सिंह बैनीवाल व संजय जागलान ने कहा कि उन्होंने देवबन कैंची पर धरने के दौरान आए चंदे व खर्चे का हिसाब मांगा था, लेकिन उन्हें सामान के बिल के साथ सही जानकारी नहीं दी गई।
भरत सिंह बैनीवाल ने कहा कि संघर्ष समिति की जांच टीम ने उनके सामने स्वीकार किया था कि हिसाब-किताब में छोटीमोटी गड़बड़ी थी, जो अनजाने में हुई और ठीक करवा दी गई है। जबकि मामले की सच्चाई ये है कि कमेटी ने दुकानों पर जाकर गड़बड़ी की जांच नहीं की।
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साढ़े 4 लाख की मलाई खाने का आरोप
बैनीवाल ने आरोप लगाया कि धरने पर करीब पांच से छह क्विंटल दूध आता था। हलवाई के साथ मिलकर उसकी मलाई उतारी जाती थी। करीब 18 से 20 किलो मलाई प्रतिदिन उतारी जाती थी। कई बार गोलमाल करने वाले दो सदस्यों के घर बारी-बारी चुपके से मलाई भेजी गई। जिसकी कीमत करीब साढ़े चार लाख रुपये बनती है।
यशपाल मलिक देश का सबसेे बड़ा ठग
प्रेस वार्ता में शामिल इंद्र सिंह खरक पांडवा ने कहा कि यशपाल मलिक ने समाज के साथ धोखा किया है। उन्होंने यशपाल मलिक का नहीं समाज का साथ दिया था, लेकिन धोखा मिला। वह देश का सबसे बड़ा ठग है। हम समाज के साथ धरने पर बैठे थे, मलिक के साथ नहीं बैठे थे।
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रविवार को एक रेस्तरां में मीडिया से बातचीत मेें धरने का संचालन करने वाली पांच सदस्यीय कोर कमेटी में शामिल रहे तीन सदस्यों ने आरोप लगाया कि धरने के दौरान आए चंदे व खर्च में लाखों रुपये का गोलमाल हुआ और इसकी जांच के लिए जो कमेटी बनाई गई थी उसने मामले की सही जांच नहीं की। दूसरे पक्ष के प्रभाव में आकर क्लीन चिट दे दी, लेकिन बाद में जांच कमेटी ने खुद माना कि चंदे में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच करके पैसे हड़पने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 14 मई को महापंचायत बुलाकर समाज के लोग बड़ा निर्णय लेंगे। भरत सिंह बैनीवाल व संजय जागलान ने कहा कि उन्होंने देवबन कैंची पर धरने के दौरान आए चंदे व खर्चे का हिसाब मांगा था, लेकिन उन्हें सामान के बिल के साथ सही जानकारी नहीं दी गई।
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भरत सिंह बैनीवाल ने कहा कि संघर्ष समिति की जांच टीम ने उनके सामने स्वीकार किया था कि हिसाब-किताब में छोटीमोटी गड़बड़ी थी, जो अनजाने में हुई और ठीक करवा दी गई है। जबकि मामले की सच्चाई ये है कि कमेटी ने दुकानों पर जाकर गड़बड़ी की जांच नहीं की।
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साढ़े 4 लाख की मलाई खाने का आरोप
बैनीवाल ने आरोप लगाया कि धरने पर करीब पांच से छह क्विंटल दूध आता था। हलवाई के साथ मिलकर उसकी मलाई उतारी जाती थी। करीब 18 से 20 किलो मलाई प्रतिदिन उतारी जाती थी। कई बार गोलमाल करने वाले दो सदस्यों के घर बारी-बारी चुपके से मलाई भेजी गई। जिसकी कीमत करीब साढ़े चार लाख रुपये बनती है।
यशपाल मलिक देश का सबसेे बड़ा ठग
प्रेस वार्ता में शामिल इंद्र सिंह खरक पांडवा ने कहा कि यशपाल मलिक ने समाज के साथ धोखा किया है। उन्होंने यशपाल मलिक का नहीं समाज का साथ दिया था, लेकिन धोखा मिला। वह देश का सबसे बड़ा ठग है। हम समाज के साथ धरने पर बैठे थे, मलिक के साथ नहीं बैठे थे।