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बालक की प्रतिभा को निखारना माता पिता की है जिम्मेदारी : साध्वी भारती
Sun, 27 Jul 2025 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 27 Jul 2025 12:58 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आरकेएसडी कॉलेज के सामने प्रोफेसर कॉलोनी में एक दिवसीय संस्कारशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन ‘’मंथन संपूर्ण विकास केंद्र’’ के तत्वावधान में किया गया, जिसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं के भीतर नैतिक मूल्य, आत्म-चेतना, और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को पुनः जागृत करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान साध्वी प्रीति भारती और कंचन भारती ने कहा कि प्रत्येक बालक की एक स्वाभाविक प्रतिभा होती है, और उस प्रतिभा को अनदेखा कर उसे किसी अन्य दिशा में प्रवृत्त करना माता-पिता की सबसे बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक नहीं कि पढ़ाई में कमजोर बच्चा जीवन में असफल रहेगा। जैसे- सचिन तेंदुलकर ने खेल में और लता मंगेशकर ने संगीत के क्षेत्र में असाधारण सफलता प्राप्त की।
उन्होंने कहा कि संगीत, नृत्य, चित्रकला, अभिनय, खेलकूद या अन्य किसी क्षेत्र में बालक का रुझान हो, तो माता-पिता को चाहिए कि उस दिशा में उसे प्रेरित और प्रोत्साहित करें, ताकि वह बिना किसी मानसिक दबाव के जीवन में आगे बढ़ सके।
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संस्कारशाला के मुख्य आकर्षणों में वैदिक मंत्रोच्चारण, ध्यान सत्र, नैतिक कहानियां, योग अभ्यास और आत्म-संयम की विधियां शामिल रहीं। साध्वी बहनों ने बच्चों को राष्ट्रभक्ति, आत्म-चेतना और सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में बच्चों के लिए विभिन्न मनोरंजक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन भी किया गया, जिनके माध्यम से उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष बल दिया गया। बच्चों को पौधे भी बांटे गए।
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कैथल। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आरकेएसडी कॉलेज के सामने प्रोफेसर कॉलोनी में एक दिवसीय संस्कारशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन ‘’मंथन संपूर्ण विकास केंद्र’’ के तत्वावधान में किया गया, जिसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं के भीतर नैतिक मूल्य, आत्म-चेतना, और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को पुनः जागृत करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान साध्वी प्रीति भारती और कंचन भारती ने कहा कि प्रत्येक बालक की एक स्वाभाविक प्रतिभा होती है, और उस प्रतिभा को अनदेखा कर उसे किसी अन्य दिशा में प्रवृत्त करना माता-पिता की सबसे बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक नहीं कि पढ़ाई में कमजोर बच्चा जीवन में असफल रहेगा। जैसे- सचिन तेंदुलकर ने खेल में और लता मंगेशकर ने संगीत के क्षेत्र में असाधारण सफलता प्राप्त की।
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उन्होंने कहा कि संगीत, नृत्य, चित्रकला, अभिनय, खेलकूद या अन्य किसी क्षेत्र में बालक का रुझान हो, तो माता-पिता को चाहिए कि उस दिशा में उसे प्रेरित और प्रोत्साहित करें, ताकि वह बिना किसी मानसिक दबाव के जीवन में आगे बढ़ सके।
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संस्कारशाला के मुख्य आकर्षणों में वैदिक मंत्रोच्चारण, ध्यान सत्र, नैतिक कहानियां, योग अभ्यास और आत्म-संयम की विधियां शामिल रहीं। साध्वी बहनों ने बच्चों को राष्ट्रभक्ति, आत्म-चेतना और सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में बच्चों के लिए विभिन्न मनोरंजक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन भी किया गया, जिनके माध्यम से उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष बल दिया गया। बच्चों को पौधे भी बांटे गए।