फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Irritability in animals, milk production reduced by 10%

Kaithal News: पशुओं में चिड़चिड़ापन, 10% घटा दूध उत्पादन

Tue, 04 Jun 2024 05:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 04 Jun 2024 05:42 AM IST
विज्ञापन
Irritability in animals, milk production reduced by 10%
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। तापमान 45 डिग्री पार चल रहा है। झुलसाने वाली इस भीषण गर्मी से न केवल मानव जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि इस गर्मी का पशुओं पर भी काफी असर देखा जा रहा है। गर्मी में पशुओं में चिड़चिड़ापन हो रहा है। वे अपने आप को सहज महसूस नहीं कर पा रहे हैं। खुराक कम होने के कारण पशुओं की दूध देने की क्षमता 10 प्रतिशत घट गई है।

पशुपालन विभाग के डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते गांव स्तर पर बने अस्पतालों में भी 10 से 15 प्रतिशत पशुओं की ओपीडी बढ़ गई है। गर्मी से पशुओं में दस्त से लेकर बुखार की शिकायतें बढ़ गई हैं।
विज्ञापन


खेतों में हरा चारा कम ः गर्मी के कारण खेतों में हरे चारे की कमी हो जाती है। इन दिनों खेतों में पशुचारा न के बराबर है। पशुपालक अपने पशुओं को सूखी तूड़ी खिलाने को मजबूर हैं। गर्मी के मौसम में पशुओं में दूध की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में पशुओं को लोबिया घास खिलाना चाहिए। यह घास फाइबर, प्रोटीन और औषधीय गुणों से भरपूर होती है, जो पशुओं में दूध की मात्रा बढ़ाने में कारगर है। इसके अलावा रोजाना 200 से 300 ग्राम सरसों का तेल और 250 ग्राम गेहूं का आटा लें। इसका मिश्रण बनाकर रख लें।
विज्ञापन
विज्ञापन


शाम को जब पशु चारा पानी खा लें तो ये मिश्रण 7-8 दिन तक लगातार पशु को खिलाएं। इसका असर दूध उत्पादन पर 10 दिनों के अंदर दिखने लगेगा। वहीं, पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को पशुओं के लिए प्रोटीन, फाइबर, चौकर आदि से युक्त खल-बांड देने की सलाह दी है।

पशुओं को लू लगने का खतरा ः पशु चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इन दिनों तपिश बढऩे और गर्म हवा चलने से पशुओं को लू लगने की आशंका है। लू लगने से पशु को तेज बुखार हो जाता है और पशु सुस्त होकर खाना-पीना बंद कर देता है। पशु के सांस लेने की व नाड़ी की गति तेज हो जाती है।

उन्होंने बताया कि पशुओं में यह दशा रुक-रुककर यदि दो महीने से अधिक समय तक बनी रहती है तो पशु को सांस लेने में परेशानी होने लगती है तो वह हांफने लगता है और वह बेहोश हो जाता है। ठीक से उपचार न मिलने पर उसकी मौत भी हो सकती है। डॉ. सुरेंद्र कुमार ने सलाह दी कि पशुओं को पशुपालक ज्यादा देर तक धूप न रहने दें। समय-समय पर चारा पानी देकर छाया में ही बांधे।

ऐसे बचाएं गर्मी से

n
उचित प्रबंध कर ही हम पशुओं के गर्मी से बचा सकते हैं। नई तूड़ी भी पशुओं को पानी में भिगोकर दें। पशुओं को पंखे और कूलर की हवा दें, ज्यादा से ज्यादा ठंडे एरिया में ही रखें, लोहे की टीन के नीचे पशुओं को न रखे, यदि टीन के नीचे पशु हैं तो उस पर पराली डालें, पशुओं को छायादार पेड़ के नीचे ही रखें

n
यदि पशु को कमरे में रख रहे हैं तो कमरे में हवा की व्यवस्था हो। पशुओं को लू से बचाने के लिए धूप में न जाने दें, बार-बार पानी पिलाएं। दिन में दो बार सुबह और शाम जरूर नहलाएं।

दूध कम देने के कारण



आमतौर पर, पशु चारे से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग शारीरिक रखरखाव, वृद्धि और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में करते हैं। ठंड के दिनों में उनको तापमान नियंत्रित रखने के लिए अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है, जिसे वे आंतरिक स्रोत से पूरा करती हैं। ऐसे में, शारीरिक विकास और दूध उत्पादन दोनों घट जाता है।


भीषण गर्मी के चलते पशुओं की 10 से 15 प्रतिशत ओपीडी बढ़ी है। गर्मी से बचाव के लिए पशुओं को छाया में बांधे, दिन में कई बार पानी पिलांए व सुबह शाम पशुओं को नहलाएं। -डॉ. नरेंद्र यादव, पशु उपनिदेशक कैथल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed