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कपास को फसल कीट से बचाने की जानकारी दी
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Information given to protect cotton from crop pest
- फोटो : Kaithal
कृषि विभाग की ओर से गांव खेड़ी शेरखां में प्रमोशन ऑफ कॉटन कल्टीवेशन के तहत फॉर्मर फील्ड स्कूल का आयोजन किया गया।
उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद व एसडीओ डॉ. सतीश नारा के मार्गदर्शन में आयोजित फील्ड स्कूल में खंड कृषि अधिकारी डॉ. रामेश्वर श्योकंद किसानों से रूबरू हुए। डॉ. रामेश्वर श्योकंद ने कपास में लगने वाले रोग व कीट पतंगों के नियंत्रण एवं प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस समय चूसक कीट कपास की फसल में सर्वाधिक नुकसान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चूसक कीटों में भी सबसे अधिक घातक सफेद मक्खी का प्रकोप होता है। यदि इस कीट की रोकथाम समय पर न की जाए तो कपास की फसल की पैदावार बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है। उन्होंने किसानों को कपास के खेत में जाकर फसल के मित्र व शत्रु कीटों की पहचान भी करवाई। उन्होंने कहा कि जिस दवा की आवश्यकता हो केवल उसी दवा का फसल पर स्प्रे करना चाहिए।
कीटनाशक विक्रेता जानकारी के अभाव में किसानों को अंधाधुंध दवाएं बांधते हैं। इनके प्रयोग से खेत में मौजूद मित्र कीट भी मर जाते हैं। किसानों को अपने खेत में दवा का स्प्रे करने से पहले विशेषज्ञ की राय अवश्य लेनी चाहिए। खंड प्रौद्योगिकी प्रबंधक डॉ. जोगिंदर सिंह ने बताया कि बॉयो गैस प्लांट लगवाने पर 12 हजार रुपये अनुदान राशि दी जा रही है। किसानों को खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन व खुंबी उत्पादन भी करना चाहिए। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक डॉ. राजेश मोर ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में सुनील, वीरेंद्र, राजेश व सतीश रहे थे। संवाद
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उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद व एसडीओ डॉ. सतीश नारा के मार्गदर्शन में आयोजित फील्ड स्कूल में खंड कृषि अधिकारी डॉ. रामेश्वर श्योकंद किसानों से रूबरू हुए। डॉ. रामेश्वर श्योकंद ने कपास में लगने वाले रोग व कीट पतंगों के नियंत्रण एवं प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस समय चूसक कीट कपास की फसल में सर्वाधिक नुकसान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चूसक कीटों में भी सबसे अधिक घातक सफेद मक्खी का प्रकोप होता है। यदि इस कीट की रोकथाम समय पर न की जाए तो कपास की फसल की पैदावार बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है। उन्होंने किसानों को कपास के खेत में जाकर फसल के मित्र व शत्रु कीटों की पहचान भी करवाई। उन्होंने कहा कि जिस दवा की आवश्यकता हो केवल उसी दवा का फसल पर स्प्रे करना चाहिए।
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कीटनाशक विक्रेता जानकारी के अभाव में किसानों को अंधाधुंध दवाएं बांधते हैं। इनके प्रयोग से खेत में मौजूद मित्र कीट भी मर जाते हैं। किसानों को अपने खेत में दवा का स्प्रे करने से पहले विशेषज्ञ की राय अवश्य लेनी चाहिए। खंड प्रौद्योगिकी प्रबंधक डॉ. जोगिंदर सिंह ने बताया कि बॉयो गैस प्लांट लगवाने पर 12 हजार रुपये अनुदान राशि दी जा रही है। किसानों को खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन व खुंबी उत्पादन भी करना चाहिए। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक डॉ. राजेश मोर ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में सुनील, वीरेंद्र, राजेश व सतीश रहे थे। संवाद
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