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सब्जियों पर महंगाई की मार, टमाटर हुआ और लाल
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Inflation hit vegetables, tomatoes turned red
- फोटो : Kaithal
कैथल। सब्जियों पर बढ़ रही महंगाई ने किचन का बजट बिगाड़ दिया है। नया आलू 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है तो वहीं टमाटर की कीमत 60 से लेकर 70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। लोगों का कहना है कि जहां पहले वे एक किलो टमाटर खरीदा करते थे वहीं कीमतों को देखते हुए अब उन्हें आधा किलो टमाटर खरीदकर ही काम चलाना पड़ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि थोक बाजार में ही टमाटर के दाम बढ़ने 60 से 70 रुपये प्रति किलो से ज्यादा हो गए हैं। मंडी में टमाटर की एक क्रेट 1300 रुपये से लेकर 1500 रुपये में मिल रही है। इस समय तक स्थानीय टमाटर की फसल बाजार पहुंचने लगती थी, लेकिन सितंबर और अक्तूबर के अंत तक हुई बारिश से जो फसल किसानों ने लगाई थी, वह खराब हो गई। किसानों ने दोबारा से टमाटर की फसल लगाई है, जिसके तैयार होने में अभी समय है। व्यापारियों का कहना है कि लोकल टमाटर की आवक होने पर कीमतों में कमी आएगी।
अभी महाराष्ट्र, दिल्ली से ही टमाटर पहुंच रहा है
टमाटर उत्पादक जसन ने बताया कि इस बार बारिश होने के कारण टमाटर की फसल खराब हो गई थी। जिस कारण से दोबारा फसल लगानी पड़ी। अब तक फसल पूरी तरह से पककर तैयार नहीं हुई है। इस वजह से अभी टमाटर दूसरे राज्यों से आ रहा है।
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सब्जी उत्पादक राजेश ने बताया कि इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। मंडियों में टमाटर की आवक कम है और मांग अधिक है। जिस वजह से टमाटर महंगा मिल रहा है। दिसंबर माह में स्थानीय टमाटर की आवक शुरू होगी तब कीमतें घटेंगी।
व्यापारी सुखदेव ने कहा कि थोक में भी टमाटर के रेट बढ़े हैं। जिस कारण रिटेल में इसकी कीमत 70 रुपये से अधिक है। थोक में उन्हें यह करीब 60 रुपये तक में मिल रहा है। इसी कारण उपभोक्ताओं तक पहुंचने में यह महंगा है। स्थानीय फसल की आवक होने के बाद ही राहत मिलने की संभावनाएं हैं।
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व्यापारियों का कहना है कि थोक बाजार में ही टमाटर के दाम बढ़ने 60 से 70 रुपये प्रति किलो से ज्यादा हो गए हैं। मंडी में टमाटर की एक क्रेट 1300 रुपये से लेकर 1500 रुपये में मिल रही है। इस समय तक स्थानीय टमाटर की फसल बाजार पहुंचने लगती थी, लेकिन सितंबर और अक्तूबर के अंत तक हुई बारिश से जो फसल किसानों ने लगाई थी, वह खराब हो गई। किसानों ने दोबारा से टमाटर की फसल लगाई है, जिसके तैयार होने में अभी समय है। व्यापारियों का कहना है कि लोकल टमाटर की आवक होने पर कीमतों में कमी आएगी।
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अभी महाराष्ट्र, दिल्ली से ही टमाटर पहुंच रहा है
टमाटर उत्पादक जसन ने बताया कि इस बार बारिश होने के कारण टमाटर की फसल खराब हो गई थी। जिस कारण से दोबारा फसल लगानी पड़ी। अब तक फसल पूरी तरह से पककर तैयार नहीं हुई है। इस वजह से अभी टमाटर दूसरे राज्यों से आ रहा है।
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सब्जी उत्पादक राजेश ने बताया कि इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। मंडियों में टमाटर की आवक कम है और मांग अधिक है। जिस वजह से टमाटर महंगा मिल रहा है। दिसंबर माह में स्थानीय टमाटर की आवक शुरू होगी तब कीमतें घटेंगी।
व्यापारी सुखदेव ने कहा कि थोक में भी टमाटर के रेट बढ़े हैं। जिस कारण रिटेल में इसकी कीमत 70 रुपये से अधिक है। थोक में उन्हें यह करीब 60 रुपये तक में मिल रहा है। इसी कारण उपभोक्ताओं तक पहुंचने में यह महंगा है। स्थानीय फसल की आवक होने के बाद ही राहत मिलने की संभावनाएं हैं।