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इंदिरा गांधी अस्पताल में खुलेगा एमआरआई सेंटर
कैथल
Updated Tue, 25 Feb 2014 11:23 PM IST
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इंदिरा गांधी मल्टीस्पेशलिएटी अस्पताल में अब जिले के लोगों को एमआरआई व सीटी स्कैन की सुविधा मिल सकेगी। जिलास्तर पर सरकारी अस्पतालों में दोनों तरह की सेवाएं देने वाला कैथल पहला जिला होगा जहां निजी केंद्रों में पांच से दस हजार रुपये में होने वाले ये परीक्षण सरकारी अस्पताल में मामूली दरों पर हो सकेंगे। सिर, रीढ़ की हड्डी, दिमाग आदि में चोट लगने के बाद बारीकि से जांच के लिए सीटी स्कैन और एमआरआई की जरूरत पड़ती है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले अधिकतर लोगों को सीटी स्कैन एवं एमआरआई करवाने की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में ये सुविधा न होने के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ता है। लोगों को मजबूरी में कई बार तो निजी केंद्रों पर पांच से दस हजार रुपये तक का भुगतान करना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा न होने के कारण केवल निजी केंद्र ही लोगों के लिए यह सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं। दुर्घटनाओं के अलावा रीढ़ की हड्डी में कोई अन्य दिक्कत हो, पेट की कोई भी बीमारी, छाती की बीमारी, कैंसर के मामलों में 90 प्रतिशत जांच का कार्य भी सीटी स्कैन से हो जाता है।
दस करोड़ में बनेंगे दोनों सेंटर
सिविल सर्जन डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोनों ही केेंद्रों के लिए लगभग 3500 वर्ग फुट जगह में भवन तैयार किया जाएगा। इन केंद्रों पर करीब 10 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिससे लोगों को काफी लाभ पहुंचेगा। सरकारी अस्पताल में न्यूनतम लागत पर लोगों को ये सुविधाएं दी जाएंगी। प्रयास किया जाएगा कि आपातकालीन वार्ड के पास ही ये भवन बनाए जाएं ताकि मरीजों को सीटी स्कैन एवं एमआरआई के लिए ज्यादा दूर न जाने पड़े। इस समय सुविधा न होने के कारण लोगों को रेफर करना पड़ता है।
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दस करोड़ में बनेंगे दोनों सेंटर
सिविल सर्जन डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोनों ही केेंद्रों के लिए लगभग 3500 वर्ग फुट जगह में भवन तैयार किया जाएगा। इन केंद्रों पर करीब 10 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिससे लोगों को काफी लाभ पहुंचेगा। सरकारी अस्पताल में न्यूनतम लागत पर लोगों को ये सुविधाएं दी जाएंगी। प्रयास किया जाएगा कि आपातकालीन वार्ड के पास ही ये भवन बनाए जाएं ताकि मरीजों को सीटी स्कैन एवं एमआरआई के लिए ज्यादा दूर न जाने पड़े। इस समय सुविधा न होने के कारण लोगों को रेफर करना पड़ता है।
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