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Kaithal News: सड़कों पर बढ़ रहा बेसहारा गोवंश का जमावड़ा, दुर्घटनाओं का रहता है खतरा
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अंबाला रोड पर खड़े दो बेसहारा पशु। संवाद
कैथल। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बेसहारा गोवंश की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी बन रही है। शाम होते ही मुख्य सड़कों, चौक-चौराहों और बाजारों में गाय, बछड़े और नंदी के झुंड दिखाई देने लगते हैं। सड़क के बीच बैठने या अचानक दौड़ने वाले इन पशुओं के कारण वाहन चालकों को हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान में शहर और आसपास के क्षेत्रों में एक हजार से अधिक बेसहारा पशु खुले में घूम रहे हैं।
नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद समय-समय पर पशु पकड़ने के अभियान चलाने और उन्हें गोशालाओं में भेजने का दावा करती है लेकिन इसका स्थायी असर दिखाई नहीं देता। मुख्य मार्गों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक बेसहारा गोवंश की मौजूदगी लगातार बनी हुई है। रात के समय स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि कई पशु सड़क के बीच बैठ जाते हैं या आपस में भिड़ने लगते हैं।
इन मार्गों पर सबसे अधिक परेशानी
छोटूराम चौक, पिहोवा चौक, जींद रोड, अंबाला रोड और कुरुक्षेत्र रोड पर शाम के बाद सबसे अधिक गोवंश देखे जाते हैं। इसके अलावा माता गेट, छात्रावास रोड, चंदाना रोड, डोगरा गेट, भगत सिंह कॉलोनी, डिफेंस कॉलोनी, स्टेडियम क्षेत्र, बस अड्डा, कबूतर चौक, रेलवे गेट और कमेटी चौक के आसपास भी अक्सर पशुओं के झुंड सड़क पर डेरा जमाए रहते हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
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अभियान जारी लेकिन नहीं दिख रहा स्थायी समाधान
नगर परिषद की ओर से बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए समय-समय पर ठेके दिए जाते हैं, जिन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। संबंधित विभाग के अनुसार पिछले दो वर्षों में पांच हजार से अधिक पशुओं को पकड़कर विभिन्न गोशालाओं में पहुंचाया गया है और वर्तमान में भी अभियान चलाया जा रहा है। इसके बावजूद शहर की सड़कों पर गोवंश की संख्या कम होती नजर नहीं आ रही।
खेतों में भी फसलों को पहुंच रहा नुकसान
ग्योंग निवासी सुनील ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में भी समस्या लगातार बढ़ रही है। शाम होते ही बेसहारा पशु खेतों में घुस जाते हैं और ज्वार, मक्का सहित हरे चारे की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए रातभर निगरानी करनी पड़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस समस्या के स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
कुछ दिन बाद फिर लौट आती है पुरानी स्थिति
शहर निवासी राजेंद्र के अनुसार प्रशासन की ओर से समय-समय पर गोवंश पकड़ने की कार्रवाई जरूर होती है लेकिन कुछ ही दिनों में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। रात में सड़क पर बैठे या अचानक दौड़ते पशु वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बनते हैं। कई बार आपस में लड़ते हुए गोवंश सड़क पर आ जाते हैं जिससे दुर्घटनाएं होने के साथ वाहनों को भी नुकसान पहुंचता है।
गोशालाओं को मिली आर्थिक सहायता, फिर भी बनी चुनौती
पिछले वर्ष गोशाला आयोग के तत्कालीन चेयरमैन श्रवण गर्ग ने गोशाला संचालकों की बैठक लेकर सड़कों से बेसहारा गोवंश हटाने के निर्देश दिए थे। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। पशु पकड़ने पर बछड़े के लिए 300 रुपये, गाय के लिए 600 रुपये और नंदी के लिए 800 रुपये तक भुगतान निर्धारित किया गया था। जिले की 22 गोशालाओं को 3.88 करोड़ रुपये की सहायता भी जारी की गई लेकिन विशेष रूप से नंदी के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने से चुनौती अभी भी बनी हुई है।
शहर से बेसहारा पशुओं को नियमित अभियान चलाकर गोशालाओं में भेजा जाता है। कुछ समय पहले भी बड़ी संख्या में पशुओं को गोशाला पहुंचाया गया था। जल्द ही दोबारा अभियान चलाकर सड़कों से गोवंश को हटाया जाएगा।
— संदीप सोलंकी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, कैथल
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नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद समय-समय पर पशु पकड़ने के अभियान चलाने और उन्हें गोशालाओं में भेजने का दावा करती है लेकिन इसका स्थायी असर दिखाई नहीं देता। मुख्य मार्गों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक बेसहारा गोवंश की मौजूदगी लगातार बनी हुई है। रात के समय स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि कई पशु सड़क के बीच बैठ जाते हैं या आपस में भिड़ने लगते हैं।
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इन मार्गों पर सबसे अधिक परेशानी
छोटूराम चौक, पिहोवा चौक, जींद रोड, अंबाला रोड और कुरुक्षेत्र रोड पर शाम के बाद सबसे अधिक गोवंश देखे जाते हैं। इसके अलावा माता गेट, छात्रावास रोड, चंदाना रोड, डोगरा गेट, भगत सिंह कॉलोनी, डिफेंस कॉलोनी, स्टेडियम क्षेत्र, बस अड्डा, कबूतर चौक, रेलवे गेट और कमेटी चौक के आसपास भी अक्सर पशुओं के झुंड सड़क पर डेरा जमाए रहते हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
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अभियान जारी लेकिन नहीं दिख रहा स्थायी समाधान
नगर परिषद की ओर से बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए समय-समय पर ठेके दिए जाते हैं, जिन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। संबंधित विभाग के अनुसार पिछले दो वर्षों में पांच हजार से अधिक पशुओं को पकड़कर विभिन्न गोशालाओं में पहुंचाया गया है और वर्तमान में भी अभियान चलाया जा रहा है। इसके बावजूद शहर की सड़कों पर गोवंश की संख्या कम होती नजर नहीं आ रही।
खेतों में भी फसलों को पहुंच रहा नुकसान
ग्योंग निवासी सुनील ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में भी समस्या लगातार बढ़ रही है। शाम होते ही बेसहारा पशु खेतों में घुस जाते हैं और ज्वार, मक्का सहित हरे चारे की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए रातभर निगरानी करनी पड़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस समस्या के स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
कुछ दिन बाद फिर लौट आती है पुरानी स्थिति
शहर निवासी राजेंद्र के अनुसार प्रशासन की ओर से समय-समय पर गोवंश पकड़ने की कार्रवाई जरूर होती है लेकिन कुछ ही दिनों में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। रात में सड़क पर बैठे या अचानक दौड़ते पशु वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बनते हैं। कई बार आपस में लड़ते हुए गोवंश सड़क पर आ जाते हैं जिससे दुर्घटनाएं होने के साथ वाहनों को भी नुकसान पहुंचता है।
गोशालाओं को मिली आर्थिक सहायता, फिर भी बनी चुनौती
पिछले वर्ष गोशाला आयोग के तत्कालीन चेयरमैन श्रवण गर्ग ने गोशाला संचालकों की बैठक लेकर सड़कों से बेसहारा गोवंश हटाने के निर्देश दिए थे। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। पशु पकड़ने पर बछड़े के लिए 300 रुपये, गाय के लिए 600 रुपये और नंदी के लिए 800 रुपये तक भुगतान निर्धारित किया गया था। जिले की 22 गोशालाओं को 3.88 करोड़ रुपये की सहायता भी जारी की गई लेकिन विशेष रूप से नंदी के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने से चुनौती अभी भी बनी हुई है।
शहर से बेसहारा पशुओं को नियमित अभियान चलाकर गोशालाओं में भेजा जाता है। कुछ समय पहले भी बड़ी संख्या में पशुओं को गोशाला पहुंचाया गया था। जल्द ही दोबारा अभियान चलाकर सड़कों से गोवंश को हटाया जाएगा।
— संदीप सोलंकी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, कैथल

अंबाला रोड पर खड़े दो बेसहारा पशु। संवाद