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कोरोना काल में बढ़ी पेरासिटामोल, एजीथ्रोमाइसिन, विटामिन सी दवाओं की मांग
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कोरोना काल में पेरासिटामोल, एजीथ्रोमाइसिन, विटामिन सी दवाओं की मांग बढ़ गई है। संतोषजनक बात यह है कि जिले में अभी तक इन दवाओं की कमी नजर नहीं आ रही। जिला अस्पताल सहित मार्केट में दवाओं के स्टॉक की कमी नहीं है।
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले के ड्रग वेयरहाउस में इस समय 30 हजार पेरासिटामोल टेबलेट का स्टॉक उपलब्ध हैं। वहीं एजीथ्रोमाइसिन के चार हजार, विटामिन सी के 65 हजार व बीटीएम के 12 हजार टेबलेट उपलब्ध हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर स्टॉक में थोड़ी सी भी कमी दिखती है तो उसी समय दूसरे वेयरहाउस से स्टॉक मंगवाया जा रहा है ताकि किसी भी स्थिति में दवाइयों की कमी से मरीजों को न जूझना पड़े। वेयरहाउस में इस समय 2000 रेमडेसिवीर, करीब दो लाख थ्री लेयर मास्क और छह हजार पीपीई किट उपलब्ध हैं।
वहीं प्राइवेट दवा विक्रेताओं का कहना है कि दवाइयों की लागत तो बढ़ी है, लेकिन कमी किसी दवा की नहीं है। दवा विक्रेता मोहित गोयल ने बताया कि प्राइवेट विक्रेताओं के पास ये सभी दवाइयां आसानी से मिल रही हैं। वैसे तो अस्पतालों में भी ये दवाएं काफी होती हैं, लेकिन फिर भी अगर आने वाले समय में इनकी कमी होती है तो जिलावासी किसी भी मेडिकल स्टोर से ये दवाएं ले सकते हैं। प्रशासन द्वारा निर्धारित रेट में दवाएं बेची जा रही हैं।
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कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन ने दुकानों के बाहर लगवाई रेट लिस्ट
हालांकि जिला प्रशासन की ओर से इस समय ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवाइयों के रेट तो पहले ही निर्धारित किए जा चुके हैं। वीरवार को इन दवाइयों की रेट लिस्ट दुकानों के बाहर भी लगवाई गई। लिस्ट लगाने के लिए पहुंचे खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों ने बताया कि जिस प्रकार से दवाइयों की मांग ज्यादा है, उससे कालाबाजारी की संभावना रहती है। रेट लिस्ट इसलिए लगाई गई है ताकि खरीदार इन दवाओं की कीमत पहले ही जान लें और उसके बाद खरीद करें।
ड्रग वेयरहाउस के मैनेजर डॉ. ललित जांगड़ा ने बताया कि जिले में कोरोना के दौरान प्रयोग होने वाली सभी दवाइयां पर्याप्त मात्रा में हैं। लागत के अनुसार ही स्टॉक मंगवा लेते हैं। स्टॉक कम होने की स्थिति में दूसरे वेयरहाउस से भी दवाइयां मंगवा सकते हैं।
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विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले के ड्रग वेयरहाउस में इस समय 30 हजार पेरासिटामोल टेबलेट का स्टॉक उपलब्ध हैं। वहीं एजीथ्रोमाइसिन के चार हजार, विटामिन सी के 65 हजार व बीटीएम के 12 हजार टेबलेट उपलब्ध हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर स्टॉक में थोड़ी सी भी कमी दिखती है तो उसी समय दूसरे वेयरहाउस से स्टॉक मंगवाया जा रहा है ताकि किसी भी स्थिति में दवाइयों की कमी से मरीजों को न जूझना पड़े। वेयरहाउस में इस समय 2000 रेमडेसिवीर, करीब दो लाख थ्री लेयर मास्क और छह हजार पीपीई किट उपलब्ध हैं।
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वहीं प्राइवेट दवा विक्रेताओं का कहना है कि दवाइयों की लागत तो बढ़ी है, लेकिन कमी किसी दवा की नहीं है। दवा विक्रेता मोहित गोयल ने बताया कि प्राइवेट विक्रेताओं के पास ये सभी दवाइयां आसानी से मिल रही हैं। वैसे तो अस्पतालों में भी ये दवाएं काफी होती हैं, लेकिन फिर भी अगर आने वाले समय में इनकी कमी होती है तो जिलावासी किसी भी मेडिकल स्टोर से ये दवाएं ले सकते हैं। प्रशासन द्वारा निर्धारित रेट में दवाएं बेची जा रही हैं।
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कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन ने दुकानों के बाहर लगवाई रेट लिस्ट
हालांकि जिला प्रशासन की ओर से इस समय ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवाइयों के रेट तो पहले ही निर्धारित किए जा चुके हैं। वीरवार को इन दवाइयों की रेट लिस्ट दुकानों के बाहर भी लगवाई गई। लिस्ट लगाने के लिए पहुंचे खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों ने बताया कि जिस प्रकार से दवाइयों की मांग ज्यादा है, उससे कालाबाजारी की संभावना रहती है। रेट लिस्ट इसलिए लगाई गई है ताकि खरीदार इन दवाओं की कीमत पहले ही जान लें और उसके बाद खरीद करें।
ड्रग वेयरहाउस के मैनेजर डॉ. ललित जांगड़ा ने बताया कि जिले में कोरोना के दौरान प्रयोग होने वाली सभी दवाइयां पर्याप्त मात्रा में हैं। लागत के अनुसार ही स्टॉक मंगवा लेते हैं। स्टॉक कम होने की स्थिति में दूसरे वेयरहाउस से भी दवाइयां मंगवा सकते हैं।