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Kaithal News: अष्टमी में सांझी माता का विसर्जन शुरू
Sat, 12 Oct 2024 04:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 12 Oct 2024 04:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। घरों की दीवारों पर सजी सांझी माता का अष्टमी सायंकाल में विसर्जन आरंभ हो गया। अनेक महिलाएं अपने घरों की दीवारों पर लगी सांझी माता को कपिल सरोवर में विसर्जन करती नजर आईं।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि सांझी पर्व हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व है और यह त्योहार साल में चार बार आता है। इनमें शारदीय नवरात्र सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान लोग नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का पूजन करते हैं।
सबसे खास बात है कि शारदीय नवरात्र में कई घरों में सांझी माता का भी पूजन किया जाता है, जो कि कला व लोकसंस्कृति को दर्शाता है। सांझी माता के पूजन के बाद उनका विसर्जन किया जाता है। विसर्जन से पहले सांझी को पूजा जाता है और उनको भोग लगाया जाता है। इसके बाद उसे दीवार से उतारकर आसपास मौजूद किसी तालाब में विसर्जित कर दिया जाता है।
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सांझी पर्व पर सांझी माता घर पर ही बनाई जाती है। इसे बनाने के लिए मिट्टी का उपयोग किया जाता है। मिट्टी की मदद से एक आकृति का रूप दिया जाता है और फिर उसे गोबर का उपयोग कर दीवार पर चिपकाया जाता है।
सांझी माता की तस्वीर के साथ ही दीवार में नौ नवरात्र, सूरज और चंदा भी बनाए जाते हैं। सांझी माता का चूड़ी, बिंदी के साथ शृंगार किया जाता है। एक खूबसूरत रूप देने के बाद नवरात्र के पहले दिन इनकी पूजा होती है। सांझी पर्व मुख्यतौर पर महिलाओं व कन्याओं का है। श्राद्ध पक्ष में ही महिलाएं माटी से सांझी माता बनाना शुरू कर देती हैं। वे मिलकर सांझी बनाती हैं और फिर नौ दिनों तक नियमानुसार पूजा-अर्चना करती हैं।
लड़कियां शाम के समय सांझी माता की आरती व भजन गाती है और फिर उन्हें भोग लगाती हैं। सभी लड़कियां मिलकर एक-दूसरे के घर जाकर सांझी पूजती हैं। कुछ परिवारों में अष्टमी को कंजक पूजन के बाद सांझी माता का विसर्जन किया जाता है। कुछ परिवार नौ दिनों के बाद सांझी माता को विसर्जित करते हैं।
ऐसी मानी जाती हैं मान्यताएं
सांझी माता की पूजा मुख्य रूप से नवरात्र में ही की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, सांझी माता को मां दुर्गा या माता पार्वती का प्रतीक ही माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि नवरात्र के 9 दिनों में जो कोई भी सांझी की पूजा करता है उसके घर में सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। आरती महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा की जाती है।
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कलायत। घरों की दीवारों पर सजी सांझी माता का अष्टमी सायंकाल में विसर्जन आरंभ हो गया। अनेक महिलाएं अपने घरों की दीवारों पर लगी सांझी माता को कपिल सरोवर में विसर्जन करती नजर आईं।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि सांझी पर्व हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व है और यह त्योहार साल में चार बार आता है। इनमें शारदीय नवरात्र सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान लोग नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का पूजन करते हैं।
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सबसे खास बात है कि शारदीय नवरात्र में कई घरों में सांझी माता का भी पूजन किया जाता है, जो कि कला व लोकसंस्कृति को दर्शाता है। सांझी माता के पूजन के बाद उनका विसर्जन किया जाता है। विसर्जन से पहले सांझी को पूजा जाता है और उनको भोग लगाया जाता है। इसके बाद उसे दीवार से उतारकर आसपास मौजूद किसी तालाब में विसर्जित कर दिया जाता है।
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सांझी पर्व पर सांझी माता घर पर ही बनाई जाती है। इसे बनाने के लिए मिट्टी का उपयोग किया जाता है। मिट्टी की मदद से एक आकृति का रूप दिया जाता है और फिर उसे गोबर का उपयोग कर दीवार पर चिपकाया जाता है।
सांझी माता की तस्वीर के साथ ही दीवार में नौ नवरात्र, सूरज और चंदा भी बनाए जाते हैं। सांझी माता का चूड़ी, बिंदी के साथ शृंगार किया जाता है। एक खूबसूरत रूप देने के बाद नवरात्र के पहले दिन इनकी पूजा होती है। सांझी पर्व मुख्यतौर पर महिलाओं व कन्याओं का है। श्राद्ध पक्ष में ही महिलाएं माटी से सांझी माता बनाना शुरू कर देती हैं। वे मिलकर सांझी बनाती हैं और फिर नौ दिनों तक नियमानुसार पूजा-अर्चना करती हैं।
लड़कियां शाम के समय सांझी माता की आरती व भजन गाती है और फिर उन्हें भोग लगाती हैं। सभी लड़कियां मिलकर एक-दूसरे के घर जाकर सांझी पूजती हैं। कुछ परिवारों में अष्टमी को कंजक पूजन के बाद सांझी माता का विसर्जन किया जाता है। कुछ परिवार नौ दिनों के बाद सांझी माता को विसर्जित करते हैं।
ऐसी मानी जाती हैं मान्यताएं
सांझी माता की पूजा मुख्य रूप से नवरात्र में ही की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, सांझी माता को मां दुर्गा या माता पार्वती का प्रतीक ही माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि नवरात्र के 9 दिनों में जो कोई भी सांझी की पूजा करता है उसके घर में सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। आरती महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा की जाती है।