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Kaithal News: डस ले सांप तो सीधे पहुंच जाएं अस्पताल

Tue, 24 Jun 2025 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 24 Jun 2025 01:31 AM IST
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If a snake bites you, go straight to the hospital
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। बारिश का मौसम शुरू होते ही सांपों के बिलों में पानी भरने लगता है, जिससे उनके बाहर निकलने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में सांप के डसने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। जिला नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डाॅ. दिनेश कंसल का कहना है कि यदि सांप काट ले तो झाड़-फूंक या देसी इलाज में समय गंवाने की बजाय सीधे अस्पताल पहुंचें और इलाज करवाएं।

जिला अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है, जिससे समय रहते इलाज हो तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। वर्ष 2024 से अब तक जिले में सांप के डसने का केवल एक मामला सामने आया है। पिछले साल बुढ़ा खेड़ा गांव में एक 10 वर्षीय बच्चे की सांप के काटने से मौत हो गई थी।
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सांप के काटने पर तुरंत 108 नंबर पर कॉल करें और एम्बुलेंस बुलाएं। पीड़ित को शांत रखें और उसे हिलने-डुलने न दें। काटने वाली जगह को साबुन और पानी से धोएं और साफ कपड़े से ढक दें। अस्पताल ले जाने से पहले, आभूषण और तंग कपड़े हटा दें।
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डॉक्टरों ने बताया कि सांप के काटने के बाद, पीड़ित को अस्पताल में एंटीवेनम इंजेक्शन की आवश्यकता हो सकती है, जो जिला अस्पताल में आसानी से मिल जाता है। कुछ मामलों में, सांप के काटने के बाद, पीड़ित को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) की आवश्यकता हो सकती है। सांप के काटने से बचने के लिए, ऊंची घास और झाड़ियों में न जाएं, और रात में बिना जूते के न चलें।

बारिश के मौसम में सांपों का निकलना आम बात होती है इसलिए डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते, लोग इन्हें देखकर डर जाते हैं।

जिले में सांपों की तीन प्रमुख प्रजातियां

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किंग कोबरा : ये थोड़ा भारी होता है। इसके फन पर त्रिशूल जैसा निशान होता है। इसकी पहचान लगभग कोबरा जैसी होती है लेकिन ये देखने में डरावना होता है।

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कॉमन क्रेट : इसे साइलेंट किलर भी कहते हैं। यह रात के समय बाहर निकलता है और जून से अक्तूबर तक सक्रिय रहता है। ये चारपाई और बेड पर सोए व्यक्ति को ऊपर चढ़कर कान के पीछे काटता है। ये हमेशा सीधा रेंगता है। इसके डसने का दर्द नहीं होता। ऐसा लगता है मानो किसी मच्छर ने काटा हो। कई मामलों में इसके डसने के बाद नींद में व्यक्ति की मौत हो जाती है। ये पतला और लंबा होता है। काले रंग के साथ सफेद गोले बने होते हैं।

n रसेल वाइपर : दिखने में अजगर जैसा होता है लेकिन आकार छोटा होता है, मुंह पतला और शरीर पीछे से मोटा होता है। यह सर्दियों में ज्यादा दिखता है। ये रेंगते समय एस का आकार बनाता है।

मानसून के दौरान सांपों के बिलों में पानी भरने से वे बाहर निकल आते हैं। ऐसे में सांप काटने की घटनाएं बढ़ती हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम मौजूद है। डॉ. दिनेश कंसल, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल, कैथल

जिला अस्पताल में सभी प्रकार के जहरीले सांपों के इलाज के लिए एंटी वेनम उपलब्ध है। यदि मरीज सांप की पहचान बता सके तो सटीक इलाज में मदद मिलती है। इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। - डॉ. सचिन मांडले, फॉरेंसिक एक्सपर्ट, जिला नागरिक अस्पताल, कैथल


रात में सोए व्यक्ति को काटता है कॉमन क्रेट



सांप के डसने पर ये करें  

g मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाएं, जिला अस्पताल में एंटी स्नैक वेनम उपलब्ध है।

g डसने की जगह को नीचे रखें, ताकि ज़हर दिल तक न पहुंचे।

g मरीज को शांत रखें और हिलने-डुलने न दें।

g सांप की पहचान संभव हो तो कर लें या उसकी फोटो लें।

ये गलती कतई न करें

g झाड़-फूंक या देसी इलाज करने में समय

न गंवाएं।

g जहर को चूसने की कोशिश न करें।

g डसने की जगह पर ब्लेड या चीरा न लगाएं।

g टाइट कपड़े या रस्सी से अंग को कसकर

न बांधें।

कुछ सांप नहीं होते जहरीले

जिले में पाए जाने वाले अन्य सांपों में वाटर स्नैक, कॉमन सैंड बोआ (दो मुंह वाला), वूल्फ स्नैक, ब्लाइंड स्नैक, बेंडेंड कूकरी और हुरवा जैसे सांप शामिल हैं। ये सांप जहरीले नहीं होते और इनके काटने से जान को खतरा नहीं होता। खास बात यह है कि रेट स्नैक या घोड़ापछाड़ भी जिले में मिलता है, जो जहरीला नहीं होता और किसानों का मित्र माना जाता है। इनसे डरने की कतई जरूरत नहीं होती।
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