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Kaithal News: मानवाधिकार आयोग सख्त, सुनवाई 19 मार्च को
Sat, 27 Dec 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 27 Dec 2025 01:06 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका। गुहला उपमंडल के गांव खुशहाल माजरा में राइस मिलों से फैल रहे गंभीर जल एवं वायु प्रदूषण तथा इसके कारण ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे घातक प्रभावों के मामले में अब निर्णायक मोड़ आ गया है। मानवाधिकार आयोग ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संज्ञान लिया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित की है।
इस संबंध में गांव की सरपंच सरबजीत कौर ने बताया कि उनके गांव में सबसे पहले प्रदूषित पानी आने और हवा में जहरीले तत्व घुलने की शिकायत उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखी थी, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने पर उन्हें मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आयोग द्वारा आदेश पारित किए जाने के बाद यह मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सरपंच ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत को मानवाधिकार आयोग ने मानव जीवन, स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण से जुड़े मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए गंभीर विषय के रूप में लिया है।
आयोग के समक्ष प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्टों में यह स्वीकार किया गया कि गांव के चारों ओर संचालित राइस मिलों से जल व वायु प्रदूषण की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिपोर्टों में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस प्रदूषण का सीधा प्रभाव ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेशों में राइस मिलों की मौके पर जांच, वैज्ञानिक पद्धति से प्रदूषण मानकों की जांच तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में आयोग ने अगली सुनवाई तय करते हुए संबंधित सभी विभागों से एक्शन टेकन रिपोर्ट भी तलब की है।
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प्रदूषण विभाग का खुलासा, कई राइस मिलें सील
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि मानव अधिकार आयोग के आदेशों के अनुपालन में कई राइस मिलों की जांच की गई। जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ राइस मिलें ईटीपी (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) के बिना ही रिचार्ज बोर के माध्यम से गंदा पानी सीधे जमीन में छोड़ रही थीं। उन्होंने बताया कि इस
गंभीर लापरवाही के आधार पर कोहिनूर राइस मिल, पूनम राइस मिल और आरएस फूड को सील कर दिया गया है। इसके अलावा राधा कृष्ण राइस मिल को भी सील करने के लिए विभाग द्वारा उच्च अधिकारियों से अनुमति मांगी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वार्ड नंबर 12, खरौदी रोड चीका क्षेत्र में भी राइस मिलों के कारण हालात गांव खुशहाल माजरा जैसे बनते जा रहे हैं, जिससे वहां के लोगों में भी चिंता बढ़ती जा रही है।
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गुहला चीका। गुहला उपमंडल के गांव खुशहाल माजरा में राइस मिलों से फैल रहे गंभीर जल एवं वायु प्रदूषण तथा इसके कारण ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे घातक प्रभावों के मामले में अब निर्णायक मोड़ आ गया है। मानवाधिकार आयोग ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संज्ञान लिया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित की है।
इस संबंध में गांव की सरपंच सरबजीत कौर ने बताया कि उनके गांव में सबसे पहले प्रदूषित पानी आने और हवा में जहरीले तत्व घुलने की शिकायत उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखी थी, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने पर उन्हें मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आयोग द्वारा आदेश पारित किए जाने के बाद यह मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सरपंच ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत को मानवाधिकार आयोग ने मानव जीवन, स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण से जुड़े मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए गंभीर विषय के रूप में लिया है।
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आयोग के समक्ष प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्टों में यह स्वीकार किया गया कि गांव के चारों ओर संचालित राइस मिलों से जल व वायु प्रदूषण की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिपोर्टों में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस प्रदूषण का सीधा प्रभाव ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेशों में राइस मिलों की मौके पर जांच, वैज्ञानिक पद्धति से प्रदूषण मानकों की जांच तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में आयोग ने अगली सुनवाई तय करते हुए संबंधित सभी विभागों से एक्शन टेकन रिपोर्ट भी तलब की है।
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प्रदूषण विभाग का खुलासा, कई राइस मिलें सील
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि मानव अधिकार आयोग के आदेशों के अनुपालन में कई राइस मिलों की जांच की गई। जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ राइस मिलें ईटीपी (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) के बिना ही रिचार्ज बोर के माध्यम से गंदा पानी सीधे जमीन में छोड़ रही थीं। उन्होंने बताया कि इस
गंभीर लापरवाही के आधार पर कोहिनूर राइस मिल, पूनम राइस मिल और आरएस फूड को सील कर दिया गया है। इसके अलावा राधा कृष्ण राइस मिल को भी सील करने के लिए विभाग द्वारा उच्च अधिकारियों से अनुमति मांगी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वार्ड नंबर 12, खरौदी रोड चीका क्षेत्र में भी राइस मिलों के कारण हालात गांव खुशहाल माजरा जैसे बनते जा रहे हैं, जिससे वहां के लोगों में भी चिंता बढ़ती जा रही है।