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Kaithal News: भाद्रपद पूर्णिमा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
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मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद
कलायत। भाद्रपद मास की पूर्णिमा पर कलायत के श्री कपिल मुनि धाम में भक्तों की भारी भीड़ जुटी। अलसुबह श्रद्धालुओं ने पवित्र तीर्थ में स्नान कर दीपदान किया और भाद्रपद मास की कथा का श्रवण किया। मंदिर में भाद्रपद मास की कथा पुजारी अनिरुद्ध गौतम की ओर से सुनाई जा रही थी। कथा व्यास गौतम ने कहा कि हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को पूजा-पाठ, व्रत, स्नान और दान के लिए विशेष माना जाता है। भाद्रपद महीने की पूर्णिमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके अगले दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। ऐसे में इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कार्यों का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि इस पूर्णिमा पर सभी देवता, चारों वेद व भगवान स्वयं जल में निवास करते हैं।
उन्होंने कहा कि पूरे माह तक व्रत रखने वाले व आसमान का तारा देखकर भोजन करने वाले श्रद्धालु भक्तों की ओर से पूर्णिमा पर कपिल तीर्थ में स्नान करने पर न केवल मोक्ष की प्राप्ति होती है बल्कि मनोकामना भी पूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि श्री कपिल मुनि जी ने जब अवतार लिया तो उस समय सतयुग समाप्त हो रहा था और त्रेता युग का आरंभ हो रहा था जिसका वर्णन श्रीमद्भागवत में है। श्री कपिल मुनि जी को श्रीमद्भागवत के अनुसार ही पंचम अवतार माना गया है। उन्होंने कहा कि कपिल मुनि जी ने अपनी माता देवहूति को सांख्य शास्त्र का ज्ञान दिया था जिसके कारण ही उन्हें ज्ञान का अवतार भी कहा जाता है। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने, स्नान-दान करने और जरूरतमंदों की मदद करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
भगवान विष्णु की पूजा करना रहता है शुभ
अनिरुद्ध गौतम ने कहा कि भाद्रपद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके बाद पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। इस वजह से कई परिवार इस दिन घर में पूजा-पाठ करते हैं और धार्मिक कार्यों के साथ दान-पुण्य करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, स्नान, दान, व्रत और चंद्रमा को अर्घ्य देना प्रमुख धार्मिक कार्य माने जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि पूरे माह तक व्रत रखने वाले व आसमान का तारा देखकर भोजन करने वाले श्रद्धालु भक्तों की ओर से पूर्णिमा पर कपिल तीर्थ में स्नान करने पर न केवल मोक्ष की प्राप्ति होती है बल्कि मनोकामना भी पूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि श्री कपिल मुनि जी ने जब अवतार लिया तो उस समय सतयुग समाप्त हो रहा था और त्रेता युग का आरंभ हो रहा था जिसका वर्णन श्रीमद्भागवत में है। श्री कपिल मुनि जी को श्रीमद्भागवत के अनुसार ही पंचम अवतार माना गया है। उन्होंने कहा कि कपिल मुनि जी ने अपनी माता देवहूति को सांख्य शास्त्र का ज्ञान दिया था जिसके कारण ही उन्हें ज्ञान का अवतार भी कहा जाता है। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने, स्नान-दान करने और जरूरतमंदों की मदद करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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भगवान विष्णु की पूजा करना रहता है शुभ
अनिरुद्ध गौतम ने कहा कि भाद्रपद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके बाद पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। इस वजह से कई परिवार इस दिन घर में पूजा-पाठ करते हैं और धार्मिक कार्यों के साथ दान-पुण्य करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, स्नान, दान, व्रत और चंद्रमा को अर्घ्य देना प्रमुख धार्मिक कार्य माने जाते हैं।

मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद
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