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रिकॉर्ड में कम हो गई तीन कालोनियों की करीब एक हजार से अधिक घरों की जमीन
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Wed, 26 Apr 2017 12:18 AM IST
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डीसी से मिलने पहुंचे लोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वर्ष 2003-04 में सेक्टर 18 के लिए अधिग्रहित जमीन के निकट की कई एकड़ की जमीन में बनें करीब एक हजार से अधिक घरों की जमीन इंतकाल में अचानक कम हो गई। इसकी जानकारी मिलते ही फ्रेंड्स कालोनी, बालाजी कालोनी व सुभाष नगर के निवासियों में हड़कंप मच गया। लोगों को इस बात का पता चलते ही लघु सचिवालय पहुंचे। जहां डीसी से मामले की जांच कर उनकी जमीन पूरी किए जाने की मांग की।
पार्षद दीपक शर्मा, समाजसेवी विनोद शर्मा, सोमदत्त, कर्मबीर, संदीप कुमार, बलबीर सिंह, रणधीर सिंह, रामदिया, ज्ञानचंद, प्रेमचंद शर्मा, ज्ञानचंद गोयल, रमेश फौजी, सुरेश कुमार, सतनारायण सहित अन्य ने कहा कि करीब 1000 से अधिक घरों की जमीन इंतकाल में अचानक कम हो गई। अब जो नई जमाबंदी जारी हुई है। उसमें जो प्लाट 200 गज का था, इंतकाल में वह अब 140 गज का रह गया है। फ्रेंड्स कालोनी, बालाजी कालोनी एवं सुभाष नगर के सैकड़ों परिवारों ने सेक्टर 18 में जमीन का अधिग्रहण किए जाने का विरोध किया था। उस समय उनके प्लाटों की रजिस्ट्री की प्रतियां ली गई थीं। उन्हें अधिग्रहण होने वाली जमीन से बाहर कर दिया गया था। लेकिन अब उन्हें पता चला कि हुडा द्वारा अपनी जमीन पूरी करने के लिए उनके एरिया की जमीन का इंतकाल अपने नाम करवा लिया गया है। जिसका प्लाट 200 गज का था, वह 140 गज का रह गया है। उनका सवाल है कि आखिर अब उनकी जमीन कैसे कम हो गई। जब उनकी जमीन पर खून पसीने की मेहनत के बाद उन्होंने मकान बना लिए हैं। उनकी मांग है कि उनकी जमीन कागजों में पूरी की जाए।
मामले को लेकर सभी लोग एकत्रित होकर डीसी से मिलने पहुंचे। डीसी ने तहसीलदार को बुलाकर समस्या के समाधान के निर्देश दिए। तहसीलदार ने कहा कि वे शीघ्र ही पता करवाएंगे कि क्या मामला है। इसके बाद कालोनियों के लोगों की पांच सदस्यीय कमेटी के साथ मिलकर रिपोर्ट तैयार करके डीसी को देंगे।
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मुश्किल से बनाया है आशियाना साहब
कालोनी निवासी विनोद का कहना है कि मुश्किल से आशियाना बनाया है। जब से यह बात सामने आई है, तभी से चिंता दूर नहीं हो रही। घर बचेगा या नहीं। सरकार से यही मांग है कि इस तरह से उजाड़ने का काम ना करें। पहले मुश्किल से संघर्ष कर हुडा के अधिग्रहण से बचे थे। अब जमीन जबरन छीन ली गई तो वे कहां जाएंगे।
जब नगर परिषद के अधीन तो कैसे करवा लिए गए इंतकाल
लोगों के मन में इस बात का असंतोष था कि उनके पास रजिस्ट्री है, इंतकाल हैं। नगर परिषद का हाउस टैक्स देने की रसीदें हैं। इसके बावजूद कैसे उनके इंतकाल की जमीन किसी दूसरे के नाम हो सकती है।
हुडा की जमीन पूरी करने के लिए किया गया है इंतकाल
एक पटवारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इस जमीन पर हुडा की अभी भी धारा 6 लगी हुई है। हुडा द्वारा अपनी जमीन पूरी करने के लिए ये इंतकाल करवाए गए हैं। अब इस मामले में कोर्ट का ही सहारा लिया जा सकता है।
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पार्षद दीपक शर्मा, समाजसेवी विनोद शर्मा, सोमदत्त, कर्मबीर, संदीप कुमार, बलबीर सिंह, रणधीर सिंह, रामदिया, ज्ञानचंद, प्रेमचंद शर्मा, ज्ञानचंद गोयल, रमेश फौजी, सुरेश कुमार, सतनारायण सहित अन्य ने कहा कि करीब 1000 से अधिक घरों की जमीन इंतकाल में अचानक कम हो गई। अब जो नई जमाबंदी जारी हुई है। उसमें जो प्लाट 200 गज का था, इंतकाल में वह अब 140 गज का रह गया है। फ्रेंड्स कालोनी, बालाजी कालोनी एवं सुभाष नगर के सैकड़ों परिवारों ने सेक्टर 18 में जमीन का अधिग्रहण किए जाने का विरोध किया था। उस समय उनके प्लाटों की रजिस्ट्री की प्रतियां ली गई थीं। उन्हें अधिग्रहण होने वाली जमीन से बाहर कर दिया गया था। लेकिन अब उन्हें पता चला कि हुडा द्वारा अपनी जमीन पूरी करने के लिए उनके एरिया की जमीन का इंतकाल अपने नाम करवा लिया गया है। जिसका प्लाट 200 गज का था, वह 140 गज का रह गया है। उनका सवाल है कि आखिर अब उनकी जमीन कैसे कम हो गई। जब उनकी जमीन पर खून पसीने की मेहनत के बाद उन्होंने मकान बना लिए हैं। उनकी मांग है कि उनकी जमीन कागजों में पूरी की जाए।
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मामले को लेकर सभी लोग एकत्रित होकर डीसी से मिलने पहुंचे। डीसी ने तहसीलदार को बुलाकर समस्या के समाधान के निर्देश दिए। तहसीलदार ने कहा कि वे शीघ्र ही पता करवाएंगे कि क्या मामला है। इसके बाद कालोनियों के लोगों की पांच सदस्यीय कमेटी के साथ मिलकर रिपोर्ट तैयार करके डीसी को देंगे।
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मुश्किल से बनाया है आशियाना साहब
कालोनी निवासी विनोद का कहना है कि मुश्किल से आशियाना बनाया है। जब से यह बात सामने आई है, तभी से चिंता दूर नहीं हो रही। घर बचेगा या नहीं। सरकार से यही मांग है कि इस तरह से उजाड़ने का काम ना करें। पहले मुश्किल से संघर्ष कर हुडा के अधिग्रहण से बचे थे। अब जमीन जबरन छीन ली गई तो वे कहां जाएंगे।
जब नगर परिषद के अधीन तो कैसे करवा लिए गए इंतकाल
लोगों के मन में इस बात का असंतोष था कि उनके पास रजिस्ट्री है, इंतकाल हैं। नगर परिषद का हाउस टैक्स देने की रसीदें हैं। इसके बावजूद कैसे उनके इंतकाल की जमीन किसी दूसरे के नाम हो सकती है।
हुडा की जमीन पूरी करने के लिए किया गया है इंतकाल
एक पटवारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इस जमीन पर हुडा की अभी भी धारा 6 लगी हुई है। हुडा द्वारा अपनी जमीन पूरी करने के लिए ये इंतकाल करवाए गए हैं। अब इस मामले में कोर्ट का ही सहारा लिया जा सकता है।