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कई सदियों का इतिहास समेटे है कैथल का वृद्धकेदार सरोवर
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historical place
- फोटो : Kaithal
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शहर में रेलवे गेट के पास स्थित वृद्ध केदार तीर्थ कई सदियों का इतिहास समेेटे हुए है। तीर्थ का पूरा वर्णन वामन पुराण में मिलता है। यह देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रहा है, तीर्थ के चारों तरफ 16 मंदिर हैं। प्राचीन काल में जिले के साथ-साथ देश में भी ये तीर्थ महत्वपूर्ण माना जाता था। लेकिन उपेक्षा के चलतेे अपने अस्तित्व को खोता जार रहा था। कई वर्षों तक उपेक्षा का शिकार तीर्थ की इस झील को अब सुंदर रूप दिया गया है और इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है, जिसे चिल्ड्रन पार्क व बिद्क्यार झील के नाम से जाना जाता है। यह स्थान पर्यटकों के लिए तो आकर्षण का केंद्र है ही, साथ में पिकनिक मनाने के लिए भी अच्छा है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की ओर से वृद्ध केदार तीर्थ को और ज्यादा सुंदर बनाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।
विश्व में ऐसे छह तीर्थ : कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य गोपाल सैनी ने बताया कि कालांतर में इसका नाम बदलकर बिद्क्यार झील हो गया था, जिसे अब फिर से वृद्ध केदार के नाम से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में ऐसे छह तीर्थ हैं। यहां भगवान शिव के मंदिरों में पूजा अर्चना करने का सिलसिला महाभारत काल से भी पहले का है। ऐसी मान्यता है कि तीर्थ में वृहेद केदार नाम से स्वयं भगवान शिव विद्यमान हैं। यहां स्नान करने के बाद दिंडि नाम का वाद्य यंत्र बजाया जाता था और उसके माध्यम से रुद्र देव का अर्चन करने से मनुष्य को अंर्तध्यान की शक्ति प्राप्त हो जाती है। मनुष्य सीधा शिवलोक जैसे आनंद की अनुभूति करता है।
दो विशाल द्वारों का किया जाएगा निर्माण : गोपाल सैनी ने बताया कि भविष्य में तीर्थ पर दो विशाल द्वारों का निर्माण करवाया जाएगा। इनमें से एक गंगा और दूसरा सरस्वती द्वार होगा। एक का निर्माण चिल्ड्रन पार्क की तरफ किया जाएगा व दूसरा कमेटी चौक की तरफ बनाया जाएगा। ये दोनों द्वार तीर्थ में आने और जाने के लिए लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाएंगे और तीर्थ का आकर्षण बढ़ाएंगे।
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तीर्थ में लगाया जाएगा ध्वज दंड - कैथल अर्थात कपिस्थल को श्री हनुमान जी की जन्म स्थली माना जाता है। इस तीर्थ के एक तरफ हनुमान जी का मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान की 51 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। गोपाल ने बताया कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड अब यहां पर रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई का ध्वज दंड लगाएगा ताकि इसका आकर्षण और ज्यादा बढ़ सके। केडीबी की ओर से अन्य कार्यों के लिए बड़ा बजट तैयार किया जा रहा है।
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विश्व में ऐसे छह तीर्थ : कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य गोपाल सैनी ने बताया कि कालांतर में इसका नाम बदलकर बिद्क्यार झील हो गया था, जिसे अब फिर से वृद्ध केदार के नाम से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में ऐसे छह तीर्थ हैं। यहां भगवान शिव के मंदिरों में पूजा अर्चना करने का सिलसिला महाभारत काल से भी पहले का है। ऐसी मान्यता है कि तीर्थ में वृहेद केदार नाम से स्वयं भगवान शिव विद्यमान हैं। यहां स्नान करने के बाद दिंडि नाम का वाद्य यंत्र बजाया जाता था और उसके माध्यम से रुद्र देव का अर्चन करने से मनुष्य को अंर्तध्यान की शक्ति प्राप्त हो जाती है। मनुष्य सीधा शिवलोक जैसे आनंद की अनुभूति करता है।
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दो विशाल द्वारों का किया जाएगा निर्माण : गोपाल सैनी ने बताया कि भविष्य में तीर्थ पर दो विशाल द्वारों का निर्माण करवाया जाएगा। इनमें से एक गंगा और दूसरा सरस्वती द्वार होगा। एक का निर्माण चिल्ड्रन पार्क की तरफ किया जाएगा व दूसरा कमेटी चौक की तरफ बनाया जाएगा। ये दोनों द्वार तीर्थ में आने और जाने के लिए लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाएंगे और तीर्थ का आकर्षण बढ़ाएंगे।
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तीर्थ में लगाया जाएगा ध्वज दंड - कैथल अर्थात कपिस्थल को श्री हनुमान जी की जन्म स्थली माना जाता है। इस तीर्थ के एक तरफ हनुमान जी का मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान की 51 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। गोपाल ने बताया कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड अब यहां पर रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई का ध्वज दंड लगाएगा ताकि इसका आकर्षण और ज्यादा बढ़ सके। केडीबी की ओर से अन्य कार्यों के लिए बड़ा बजट तैयार किया जा रहा है।

historical place- फोटो : Kaithal