फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   historical place

मुगलकालीन इतिहास को समेटे हुए है कैथल प्राचीन बावड़ी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Sep 2019 11:45 PM IST
विज्ञापन
historical place
historical place - फोटो : Kaithal
शहर में पुराने अस्पताल के पास बनी प्राचीन बावड़ी मुगलकालीन इतिहास समेटे हुए है। प्राचीन होने के साथ-साथ इसे कैथल के मुख्य पर्यटन स्थलों के रूप में देखा जाता है। शहर के बुजुर्गों का कहना है कि कोठी गेट के पास बने भाई उदय सिंह के किले से कैथल की महारानी महताब कौर इस बावड़ी में स्नान करने के लिए आती थी, जबकि इतिहासकारों का कहना है कि यह बावड़ी दिल्ली सल्तनत के समय बनाई गई थी। उस समय यह जल संग्रहण करने का प्रमुख स्रोत थी। बावड़ी में सैनिकों के लिए जल का संग्रहण किया जाता था, ताकि युद्ध व अन्य परिस्थितियों में राज्य में पानी की कमी न रहे। इसका निर्माण कैथल राज्य के भाई शासकों द्वारा सन 1767 से 1843 के मध्य करवाया गया था।
विज्ञापन

बावड़ी के निचले हिस्से में बना है ऐतिहासिक कुआं : निर्माण के समय यह पानी का एक बहुत बड़ा टैंक था। तीन मंजिल में गहराई तक इसे चूना, सुरखी और लाखौरी ईंटों से बनाया गया है। इस आकार स्टेपवेल में हैं, जिसमें अंदर जान के लिए सीढ़ियां दी गई हैं। इस गुंबद के आकार में बनी छत से ढका गया है और अंदर जाने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के दोनों तरफ मोटी-मोटी पुरानी ईंटों की दीवारें बनाई गई हैं। अंदर जाने के लिए अस्पताल के मुख्य गेट के साथ ही इसका गेट बनाया गया है। इसके अलावा दीवारों पर भी ईंटों को काटकर कलाकारी की गई है।
विज्ञापन

जीर्णोद्धार की दरकार : जिला प्रशासन की ओर से करीब साढ़े तीन वर्ष पहले सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से कैथल के प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों के जीर्णोद्धार को लेकर कदम उठाया गया था, लेकिन बाद में इस मुद्दे को फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। हालांकि इस समय बावड़ी में सफाई का कार्य तो सामाजिक संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है, लेकिन अब यह दिन-ब-दिन जर्जर हो रही है। छोटी ईंटों से बनी दीवारों में से ईंटें बाहर निकल रही हैं। दीवारों में भी दरारें आ रही हैं। सामाजिक संस्थाएं इसके जीर्णोद्धार की मांग कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

कैथल के इतिहासकार कमलेश शर्मा ने बताया कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी जिले के लोगों ने बावड़ी का पूरा प्रयोग किया और लाभ उठाया। आज भी सरकार और जिला प्रशासन को ऐतिहासिक स्थलों की देखरेख के प्रबंध करने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed