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क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग कर रहा नए मरीजों की पहचान
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Health department is identifying new patients under the tuberculosis eradication campaign
- फोटो : Kaithal
क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग जिले में क्षय रोग के नए मरीजों की पहचान कर रहा है। एक ओर जहां संभावित मरीजों की पहचान करके उन्हें जांच के लिए प्रेरित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला वासियों को टीबी से बचाव बारे भी जागरूक किया जा रहा है। विभाग की 29 टीमें लोगों के घर-द्वार पर जाकर अभियान को गति दे रही हैं। इन टीमों में रोजाना 60 से ज्यादा कर्मचारी पुरानी खांसी और अन्य लक्षणों की पहचान करके लोगों को जांच और बचाव बारे प्रेरित कर रहे हैं।
वर्ष 2020 में मिले थे टीबी के 1347 मरीज, 21 में अब तक मिले हैं 1107
वर्ष 2020 में पूरे वर्ष में जहां विभाग द्वारा 1347 नए मरीजों की पहचान की गई थी, इस बार अब तक 1107 नए मरीजों की पहचान की जा चुकी है। विभाग की टीमें संभावित मरीजों की पहचान के बाद उन्हें पास के स्वास्थ्य केंद्रों में जांच के लिए भेज रही है। विभाग द्वारा जिले में टीबी की जांच के लिए 11 केंद्र बनाए गए हैं। ये केंद्र नागरिक अस्पताल कैथल के अलावा पुराना अस्पताल, सीवन, गुहला, कौल, पूंडरी, कलायत, राजौंद, खरकां पाई और बालू के अस्पतालों में बनाए गए हैं।
मरीजों की दवाइयों से संबंधित पूरा खर्च उठा रहा स्वास्थ्य विभाग-मरीजों की दवाइयों से लेकर अन्य प्रकार के सारे खर्च विभाग द्वारा वहन किए जा रहे हैं। यही नहीं जिन मरीजों को टीबी की पुष्टि होती है, उन्हें विभाग की ओर से प्रतिमाह 500 रुपये राशि भी दी जा रही। इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में टीबी का मरीज आने पर उसे इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में भेजने वाले लोगों को भी प्रोत्साहन के रूप में 1000 रुपये राशि दी जा रही है।
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सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि टीबी से बचाव के लिए विभाग का अभियान लगातार जारी है। उन्होंने जिला वासियों से अपील की कि खांसी, खून में बलगम, छाती में दर्द, सांस फूलना और गर्दन या बगल में गांठ हो तो टीबी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाएं ताकि समय रहते बीमारी पर काबू पाया जा सके।
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वर्ष 2020 में मिले थे टीबी के 1347 मरीज, 21 में अब तक मिले हैं 1107
वर्ष 2020 में पूरे वर्ष में जहां विभाग द्वारा 1347 नए मरीजों की पहचान की गई थी, इस बार अब तक 1107 नए मरीजों की पहचान की जा चुकी है। विभाग की टीमें संभावित मरीजों की पहचान के बाद उन्हें पास के स्वास्थ्य केंद्रों में जांच के लिए भेज रही है। विभाग द्वारा जिले में टीबी की जांच के लिए 11 केंद्र बनाए गए हैं। ये केंद्र नागरिक अस्पताल कैथल के अलावा पुराना अस्पताल, सीवन, गुहला, कौल, पूंडरी, कलायत, राजौंद, खरकां पाई और बालू के अस्पतालों में बनाए गए हैं।
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मरीजों की दवाइयों से संबंधित पूरा खर्च उठा रहा स्वास्थ्य विभाग-मरीजों की दवाइयों से लेकर अन्य प्रकार के सारे खर्च विभाग द्वारा वहन किए जा रहे हैं। यही नहीं जिन मरीजों को टीबी की पुष्टि होती है, उन्हें विभाग की ओर से प्रतिमाह 500 रुपये राशि भी दी जा रही। इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में टीबी का मरीज आने पर उसे इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में भेजने वाले लोगों को भी प्रोत्साहन के रूप में 1000 रुपये राशि दी जा रही है।
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सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि टीबी से बचाव के लिए विभाग का अभियान लगातार जारी है। उन्होंने जिला वासियों से अपील की कि खांसी, खून में बलगम, छाती में दर्द, सांस फूलना और गर्दन या बगल में गांठ हो तो टीबी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाएं ताकि समय रहते बीमारी पर काबू पाया जा सके।