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बचपन बीमार, नौ हजार बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Wed, 23 Jul 2014 11:53 PM IST
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कैथल। जिले में एक से 18 वर्ष आयु तक के बच्चों को ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हैं। इंदिरा गांधी बाल स्वास्थ्य योजना के तहत अब तक हुई बच्चों की स्वास्थ्य जांच में पता चला है कि सरकारी स्कूलों में हजारों की संख्या में बच्चे बीमार हैं। इन्हें इलाज की तुरंत आवश्यकता है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लड कैंसर सहित कई बीमारियों से पीड़ित बच्चों को इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ एवं रोहतक रेफर किया है।
74 हजार बच्चों की जांच में खुलासा
जिले भर में इंदिरा गांधी स्वास्थ्य योजना के तहत एक लाख 30 हजार बच्चों की जांच की जानी है। सरकारी स्कूलों एवं आंगनबाड़ी में जाने वाले बच्चों की यह जांच की जाएगी। इस साल अब तक 74 हजार बच्चों की जांच हो चुकी है, जिसमें से 8885 बच्चों में विभिन्न बीमारियां पाई गई हैं। इनमें दो बच्चों को ब्लड कैंसर है, उन्हें इलाज के लिए संबंधित अस्पतालों में रेफर किया गया है। इसके अलावा आंखों के विभिन्न रोगों से ग्रसित बच्चों की संख्या 1017 तो दंत रोगों से पीड़ित 1602 बच्चे पाए गए हैं।
इसके अलावा बच्चे मानसिक रोग से भी ग्रसित हैं। जांच में 105 ऐसे बच्चे पाए गए, जिन्हें गंभीर मानसिक बीमारियां हैं। इस बारे में अभी तक अध्यापक एवं अभिभावक भी शायद अनजान थे। 18 वर्ष तक के बच्चों में हृदय संबंधी गंभीर बीमारियां भी पाई गई हैं। करीब 66 बच्चे हृदय रोग से पीड़ित पाए गए। जिनमें कई बच्चों के दिल में छेद पाया गया।
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इन्हें जांच के बाद पीजीआई अथवा संबंधित अस्पतालों में इलाज के लिए रेफर किया गया है। इसके अलावा गला, कान, त्वचा, हड्डी सहित विभिन्न रोगों से ग्रसित बच्चे पाए गए हैं। बीमार बच्चों की यह संख्या तो करीब आधे बच्चों की जांच में पता चली है। जिले भर में जांच पूरी हो जाएगी तो यह संख्या ओर भी बढ़ सकती है।
यह है योजना
इंदिरा गांधी बाल स्वास्थ्य योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा नोडल टीमों का गठन करते हुए जिले के राजकीय स्कूलों एवं आंगनबाड़ी में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। टीम एक दिन में एक विद्यालय या फिर आंगनबाड़ी केंद्र में जाकर बच्चों की जांच करती है।
जहां रोग से ग्रसित बच्चा पाए जाने पर उसे पहले ब्लॉक स्तरीय अस्पताल, इसके बाद जिला स्तरीय अस्पताल में रेफर किया जाता है। यदि यहां भी संबंधित रोग का इलाज नहीं हो पाता तो बच्चों को पीजीआई या फिर अन्य अस्पताल में रेफर किया जाता है। उस बच्चे के इलाज का पूरा खर्च स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाया जाता है।
बच्चों की समस्याओं पर ध्यान दें अभिभावक : सीएमओ
सीएमओ डा. आदित्य स्वरुप गुप्ता का कहना है कि कई बार अभिभावक बच्चों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे में यह योजना इन बच्चों के लिए वरदान से कम नहीं है। उन्होंने अभिभावकों सहित अध्यापकों का आह्वान किया कि वे बच्चों की स्वास्थ्य जांच करवाएं। कैथल में ब्लड कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियां बच्चों में पाई गई हैं।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लड कैंसर सहित कई बीमारियों से पीड़ित बच्चों को इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ एवं रोहतक रेफर किया है।
74 हजार बच्चों की जांच में खुलासा
जिले भर में इंदिरा गांधी स्वास्थ्य योजना के तहत एक लाख 30 हजार बच्चों की जांच की जानी है। सरकारी स्कूलों एवं आंगनबाड़ी में जाने वाले बच्चों की यह जांच की जाएगी। इस साल अब तक 74 हजार बच्चों की जांच हो चुकी है, जिसमें से 8885 बच्चों में विभिन्न बीमारियां पाई गई हैं। इनमें दो बच्चों को ब्लड कैंसर है, उन्हें इलाज के लिए संबंधित अस्पतालों में रेफर किया गया है। इसके अलावा आंखों के विभिन्न रोगों से ग्रसित बच्चों की संख्या 1017 तो दंत रोगों से पीड़ित 1602 बच्चे पाए गए हैं।
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इसके अलावा बच्चे मानसिक रोग से भी ग्रसित हैं। जांच में 105 ऐसे बच्चे पाए गए, जिन्हें गंभीर मानसिक बीमारियां हैं। इस बारे में अभी तक अध्यापक एवं अभिभावक भी शायद अनजान थे। 18 वर्ष तक के बच्चों में हृदय संबंधी गंभीर बीमारियां भी पाई गई हैं। करीब 66 बच्चे हृदय रोग से पीड़ित पाए गए। जिनमें कई बच्चों के दिल में छेद पाया गया।
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इन्हें जांच के बाद पीजीआई अथवा संबंधित अस्पतालों में इलाज के लिए रेफर किया गया है। इसके अलावा गला, कान, त्वचा, हड्डी सहित विभिन्न रोगों से ग्रसित बच्चे पाए गए हैं। बीमार बच्चों की यह संख्या तो करीब आधे बच्चों की जांच में पता चली है। जिले भर में जांच पूरी हो जाएगी तो यह संख्या ओर भी बढ़ सकती है।
यह है योजना
इंदिरा गांधी बाल स्वास्थ्य योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा नोडल टीमों का गठन करते हुए जिले के राजकीय स्कूलों एवं आंगनबाड़ी में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। टीम एक दिन में एक विद्यालय या फिर आंगनबाड़ी केंद्र में जाकर बच्चों की जांच करती है।
जहां रोग से ग्रसित बच्चा पाए जाने पर उसे पहले ब्लॉक स्तरीय अस्पताल, इसके बाद जिला स्तरीय अस्पताल में रेफर किया जाता है। यदि यहां भी संबंधित रोग का इलाज नहीं हो पाता तो बच्चों को पीजीआई या फिर अन्य अस्पताल में रेफर किया जाता है। उस बच्चे के इलाज का पूरा खर्च स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाया जाता है।
बच्चों की समस्याओं पर ध्यान दें अभिभावक : सीएमओ
सीएमओ डा. आदित्य स्वरुप गुप्ता का कहना है कि कई बार अभिभावक बच्चों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे में यह योजना इन बच्चों के लिए वरदान से कम नहीं है। उन्होंने अभिभावकों सहित अध्यापकों का आह्वान किया कि वे बच्चों की स्वास्थ्य जांच करवाएं। कैथल में ब्लड कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियां बच्चों में पाई गई हैं।