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Kaithal News: डीएसपी पर आरोप लगाने वाले हेड कांस्टेबल सुनील संधू बर्खास्त

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2026 12:17 AM IST
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Head constable Sunil Sandhu, who had levelled allegations against the DSP, was dismissed.
कैथल। कैथल पुलिस विभाग में चल रहे डीएसपी और हेड कांस्टेबल के विवाद ने अब बड़ा प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। पहले जहां एसपी उपासना ने नशा जागरूकता टीम के सदस्य हेड कांस्टेबल सुनील संधू सहित पूरी टीम को अनुशासनहीनता के आरोप में लाइन हाजिर किया था। वहीं अब विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए सुनील संधू को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
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सोशल मीडिया के माध्यम से डीएसपी ललित कुमार पर आरोप लगाने वाले हेड कांस्टेबल सुनील संधू को एसपी उपासना ने शनिवार को बर्खास्त कर दिया। एसपी उपासना ने प्रेस वार्ता कर यह जानकारी पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि सुनील संधू ने कलायत डीएसपी पर धमकाने के आरोप लगाए थे। उन्हें इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों को करने के बजाय सोशल मीडिया पोस्ट की, इससे पुलिस विभाग की छवि खराब हुई। दूसरी ओर सुनील संधू नशा मुक्ति अभियान के दौरान नशे के साथ आरोपियों को पकड़ने के वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर डालते थे, जो कि नियमों के खिलाफ है। अनुशासनहीनता को लेकर सुनील संधू पर कार्रवाई की गई है।
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बताया कि सुनील संधू उनकी नशा मुक्ति टीम का सदस्य था। सिटी थाने के अंतर्गत टीम की ओर से 16 फरवरी को एक छापेमारी कार्रवाई की गई थी। सुनील संधू हेड कॉन्स्टेबल थे, फिर भी उन्होंने छापेमारी के दौरान एनडीपीएस एक्ट के नियमों का पालन नहीं किया। एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई मौके पर ही की जाती है। एंट्री करके कार्रवाई के लिए जाते हैं जिसके बाद राजपत्रित अधिकारी के सामने तलाशी ली जाती है। वहां ऐसा नहीं हुआ, जिससे पूरा केस खराब हो गया और छापेमारी असफल रही।
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डीएसपी गुरविंद्र कर रहे थे मामले की जांच
एसपी ने बताया कि इसकी जांच डीएसपी गुरविंद्र कर रहे थे कि नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ। जांच का परिणाम निकला कि यह सुनील संधू की वजह से हुआ। जांच के दौरान डीएसपी कलायत आए थे। 23 फरवरी को सुनील संधू की तरफ से डीएसपी कलायत पर गंभीर आरोप लगाए गए। अगर सुनील संधू के साथ कुछ हुआ था, तो उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने के बजाय उन्हें उच्चाधिकारियों के पास जाना चाहिए था। उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया।




सोशल मीडिया पर ट्रायल शुरू हुआ

उन्होंने बताया कि सुनील संधू ने कलायत डीएसपी पर जो आरोप लगाए थे, उसकी जांच गुहला डीएसपी को दी गई थी। डीएसपी ने संधू को जांच के लिए बुलाया, जिसके बाद संधू ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर स्टेटमेंट दी कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। ऐसा भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे अपने भाइयों को बुलाएंगे। ऐसे में भय का माहौल हो गया और जांच नहीं हो पा रही थी। सोशल मीडिया पर ट्रायल शुरू हो गया। डीएसपी ने लिखकर भेज दिया कि सोशल मीडिया पर माहौल खराब हो गया है। जांच कराने पर सामने आया कि संधू ने डीएसपी कलायत पर तथ्यहीन आरोप लगाए थे।




पुलिस के खिलाफ भ्रामक खबरें फैलाई
एसपी ने कहा कि सुनील ने वर्दी का दुरुपयोग किया। पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट है, लेकिन उन्होंने अपने फॉलोअर्स के लिए अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो अपलोड किए, जो नियमों के खिलाफ है। उसके बाद उन्होंने कहा कि वे भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। उन्होंने धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया। पुलिस के खिलाफ भ्रामक खबरें आईं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 (2) बी में यह कार्रवाई की गई है। सुनील की ओर से पंजाब पुलिस नियमावली के नियम 14.8 व 14.44 की अवहेलना की गई है। बता दें कि इससे पहले सुनील संधू की एससी एसटी मामले को लेकर एक शिकायत कैथल पुलिस को मिली थी। जिसकी जांच डीएसपी ललित कुमार की ओर से की गई थी। जिसमें तथ्य नहीं पाए जाने पर डीएसपी ने शिकायत को खारिज कर दिया था। अगर डीएसपी को कोई पर्सनल रंजिश होती तो उस केस में सुनील के खिलाफ कार्रवाई कर सकते थे।







यह है पूरा मामला
23 फरवरी को सुनील संधू ने फेसबुक पोस्ट कर कलायत डीएसपी ललित यादव पर नशे के झूठे केस में फंसाने की धमकी देने के आरोप लगाए थे। संधू की इस पोस्ट के बाद एसपी उपासना सिंह ने गुहला डीएसपी कुलदीप बेनीवाल को जांच सौंपी थी। इस विवाद के बाद दो दिन पहले ही सुनील संधू समेत नशा मुक्ति टीम के नौ सदस्यों को लाइन हाजिर किया गया था। जिला पुलिस मुख्यालय की तरफ से कहा गया कि इन पुलिसकर्मियों ने अनुशासन और नियमों का पालन नहीं किया। सुनील संधू इस विवाद के बाद से बीमार चल रहे हैं। वह कैथल में ही एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हैं।
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