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पत्रकारिता में ही लोकहित की भावना-कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज
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विश्व संवाद केंद्र की ओर से डा. भीमराव आंबेडकर राजकीय कॉलेज में नारद जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें नारद मुनि और मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज, मुख्यवक्ता के तौर पर वरिष्ठ पत्रकार दीपक वशिष्ठ और कार्यक्रम अध्यक्ष के तौर पर राजकीय कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. सुनीता अरोड़ा उपस्थित रहीं।
मुख्य वक्ता ने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र चुनौतियों से भरा है और इसमें जज्बे और मेहनत के बल पर ही टिका जा सकता है। पत्रकारों को ब्रेकिंग न्यूज के चक्कर में न पड़कर खबरों को जांच-पड़ताल कर ही प्रकाशित करना चाहिए। पत्रकारिता क्षेत्र में भविष्य तलाशने वाले विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत करनी होगी। उन्हें पत्रकारिता की पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल यानि फील्ड में भी काम करना होगा।
मुख्यातिथि कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने कहा कि नारद जी को देवर्षि का दर्जा प्राप्त है। वे भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक हैं। यदि नारद को हम पत्रकार के रूप में देखें तो पता चलता है कि वे बेबाकी से असुरों, देवों, आम व्यक्ति और किसी से भी किसी भी समय बात कर सकते थे। उनके द्वारा किये जाने वाले संचार में लोकहित की भावना विद्यमान रहती थी। ऐसे ही पत्रकार भी अलग-अलग विचार के लोगों से विभिन्न मुद्दों पर चरचा करता है। एक पत्रकार को सूचनाओं की प्रमाणिकता जांचना चाहिए और घटनाओं का विश्लेषण करना चाहिए।
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कार्यक्रम की अध्यक्ष प्रो. सुनीता अरोड़ा ने कहा की मीडिया का फील्ड अपार संभावनाओं से भरा हुआ है। किसी भी अन्य उद्योग की तुलना में इसकी विकास दर अधिक है यानि इसमें रोजगार के अत्यधिक अवसर हैं। आज ग्राफिक्स, एनीमेशन, गेम, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, न्यू मीडिया और नागरिक पत्रकारिता ने नौकरियों के अनेक अवसर पैदा कर दिए हैं। मंच संचालन डॉ. अभिषेक गोयल ने किया। इस अवसर पर डॉ. मेहर सिंह, प्रो. अमित पाहवा, लैब सहायक रामभगत और विश्व संवाद केंद्र के विभाग प्रमुख ऋषिपाल, मुकेश जिंदल, संजय रावत, सुभाष गिल, सुरेंदर सैनी, सचिन, प्रदीप सभी सदस्य उपस्थित थे।
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मुख्य वक्ता ने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र चुनौतियों से भरा है और इसमें जज्बे और मेहनत के बल पर ही टिका जा सकता है। पत्रकारों को ब्रेकिंग न्यूज के चक्कर में न पड़कर खबरों को जांच-पड़ताल कर ही प्रकाशित करना चाहिए। पत्रकारिता क्षेत्र में भविष्य तलाशने वाले विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत करनी होगी। उन्हें पत्रकारिता की पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल यानि फील्ड में भी काम करना होगा।
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मुख्यातिथि कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने कहा कि नारद जी को देवर्षि का दर्जा प्राप्त है। वे भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक हैं। यदि नारद को हम पत्रकार के रूप में देखें तो पता चलता है कि वे बेबाकी से असुरों, देवों, आम व्यक्ति और किसी से भी किसी भी समय बात कर सकते थे। उनके द्वारा किये जाने वाले संचार में लोकहित की भावना विद्यमान रहती थी। ऐसे ही पत्रकार भी अलग-अलग विचार के लोगों से विभिन्न मुद्दों पर चरचा करता है। एक पत्रकार को सूचनाओं की प्रमाणिकता जांचना चाहिए और घटनाओं का विश्लेषण करना चाहिए।
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कार्यक्रम की अध्यक्ष प्रो. सुनीता अरोड़ा ने कहा की मीडिया का फील्ड अपार संभावनाओं से भरा हुआ है। किसी भी अन्य उद्योग की तुलना में इसकी विकास दर अधिक है यानि इसमें रोजगार के अत्यधिक अवसर हैं। आज ग्राफिक्स, एनीमेशन, गेम, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, न्यू मीडिया और नागरिक पत्रकारिता ने नौकरियों के अनेक अवसर पैदा कर दिए हैं। मंच संचालन डॉ. अभिषेक गोयल ने किया। इस अवसर पर डॉ. मेहर सिंह, प्रो. अमित पाहवा, लैब सहायक रामभगत और विश्व संवाद केंद्र के विभाग प्रमुख ऋषिपाल, मुकेश जिंदल, संजय रावत, सुभाष गिल, सुरेंदर सैनी, सचिन, प्रदीप सभी सदस्य उपस्थित थे।