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डिजिटल युग में भी मूल्यवान कौशल है लिखावट : तरसेम

Tue, 26 Aug 2025 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 26 Aug 2025 12:55 AM IST
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Handwriting is a valuable skill even in the digital age: Tarsem
37 कलायत। चौशाला के प्राथमिक कक्षा के बच्चों को सुंदर लेखन सिखाते तरसेम शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। अक्षरों की लिखावट के जादूगर के रूप में पहचाने जाने वाले तरसेम शर्मा ने गांव चौशाला के सरकारी प्राथमिक स्कूल में बच्चों को सुंदर लेखन के गुण सिखाए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में भी लिखावट बच्चों और बड़ों दोनों के लिए उतना ही मूल्यवान कौशल है। यह न केवल लेखन सौंदर्य बढ़ाती है, बल्कि संज्ञानात्मक व रचनात्मक लाभ भी देती है, जो जीवन पर सकारात्मक असर डालते हैं।

उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी की वर्णमाला के अक्षरों को सही ढंग से और आकर्षक तरीके से लिखने की विभिन्न विधाओं पर बच्चों को सरल व समझ में आने वाली शैली में प्रशिक्षण दिया।
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तरसेम शर्मा ने कहा कि सुंदर लिखावट का अभ्यास बचपन से ही शुरू होता है। प्राथमिक स्तर पर यदि बच्चा लिखावट पर ध्यान केंद्रित करता है, तो आगे चलकर उसकी हस्तलिपि प्रभावशाली और सुंदर बनती है। लिखावट केवल कागज पर कलम चलाना नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की व्यक्तिगत अभिव्यक्ति है, जो हर किसी में अलग-अलग रूप में दिखाई देती है।
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उन्होंने बताया कि साफ-सुथरी, प्रवाहपूर्ण और कलात्मक लिखावट चाहे जैसी भी हो, यह संचार, सीखने और रचनात्मक अभिव्यक्ति का अहम हिस्सा बनी रहती है। एक सुसंगत और पठनीय लिपि व्यक्तिगत संवाद को बेहतर बनाती है और बच्चे के व्यक्तित्व को निखारती है।

तरसेम ने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की लेखन कला को विकसित करने के लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं है। हिंदी निदेशालय समय-समय पर वर्णमाला में बदलाव करता है, लेकिन स्कूलों में अक्सर पुराने स्वरूप ही पढ़ाए जाते हैं। उन्होंने अध्यापकों और अभिभावकों की संयुक्त भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। अक्षर निर्माण, रिक्ति, संरेखण, झुकाव, आकार और दबाव की एकरूपता जैसे पहलुओं पर उन्होंने विस्तार से जानकारी दी।


स्कूल मुखिया प्रदीप कुमार और अध्यापक मुकेश धानिया ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद बच्चों की लिखावट में आश्चर्यजनक सुधार देखने को मिला। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे विषय-विशेषज्ञ अध्यापक अपने अनुभव अन्य स्कूलों से भी साझा करें तो परिणाम बेहद शानदार हो सकते हैं। अंत में प्रदीप कुमार ने तरसेम शर्मा का आभार जताया और कहा कि इस विशेष सत्र से न सिर्फ बच्चों ने बल्कि स्टाफ सदस्यों ने भी बहुत कुछ नया सीखा।
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