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Kaithal News: आज से 16 दुर्लभ संयोगों के साथ शुरू हो रहे गुप्त नवरात्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Feb 2024 03:35 AM IST
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Gupt Navratri starting from today with 16 rare coincidences
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। साल में चार नवरात्र माघ, चैत्र, आषाढ़ और अश्विन में आते हैं। इनमें माघ और आषाढ़ में आने वाले नवरात्र को ‘गुप्त’ नवरात्र कहते हैं। 10 फरवरी से माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इसमें साधक देवी मां की 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से साधना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि सनातन धर्म में साल में चार नवरात्र आते हैं। इसमें दो प्रत्यक्ष अथवा प्रकट रूप से आते हैं। इनमें गृहस्थ जीवन वाले दुर्गा माता की पूजा-अर्चना करते हैं और दो गुप्त रूप से आते हैं इनमें साधु, संन्यासी, सिद्धि पाने वाले व तांत्रिक साधना किया करते है। गुप्त नवरात्र में देवी की 10 महाविद्याओं की पूजा तंत्र शक्ति और सिद्धियों के लिए किया जाता हैं।
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मान्यता है कि 10 महाविद्या आदिशक्ति की अवतार स्वरूप मानी जाती हैं और विभिन्न दिशाओं की अधिष्ठात्री शक्तियां कहलाती हैं। उन्होंने बताया कि इस साल माघ गुप्त नवरात्र 10 फरवरी से 18 फरवरी तक रहेंगे।
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इस साल ये गुप्त नवरात्र बहुत खास है क्योंकि इन न ौ दिनों में कई अद्भुत योग का संयोग बन रहा है। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा, पाठ करने से साधक को शत्रु, रोग, दोष, आर्थिक संकट से छुटकारा मिलेगा। उन्होंने बताया कि शनिवार से शुरू होने वाले माघ गुप्त नवरात्र के नौ दिनों में छह रवि योग, दो सर्वार्थ सिद्धि, त्रिपुष्कर, सिद्धि, साध्य, शुभ, शुक्ल, इंद्र, अमृत सिद्धि, शिव योग बन रहे हैं अर्थात कुल 16 योग बन रहे हैं। इस दौरान माता दुर्गा की सुबह-शाम विधिवत पूजा, आरती करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।


पंडित शांडिल्य ने बताया कि गुप्त नवरात्रि में तंत्र साधना के लिए मुख्य रूप से 10 महाविद्याओं की पूजा सिद्धि को पाने के लिए गुप्त रूप से करते हैं। ये 10 महाविद्याएं क्रमश: हैं काली मां, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी माता और कमला देवी। इन 10 महाविद्याओं में दो कुल होते है काली कुल और श्रीकुल। काली मां, तारा देवी और भुवनेश्वरी माता काली कुल में आती हैं और माता बगलामुखी, त्रिपुर सुंदरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मातंगी माता और कमला देवी श्रीकुल में आती हैं। मान्यता है कि इन 10 महाविद्याओं में संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्तियों का स्रोत है। नवरात्र सभी साधकों और तांत्रिकों के लिए विभिन्न पूजा अनुष्ठान जैसे हवन, तांत्रिक मंत्र का जाप, शाबर मंत्र का जाप, ध्यान, हठ योग और सख्त उपवास करके सिद्धि प्राप्त करने का सही समय है।

माघ गुप्त नवरात्र

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10 फरवरी: माघ गुप्त नवरात्र प्रतिपदा तिथि, घटस्थापना मुहूर्त

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11 फरवरी : माघ गुप्त नवरात्र द्वितीया

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12 फरवरी : माघ गुप्त नवरात्र तृतीया

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13 फरवरी : माघ गुप्त नवरात्र चतुर्थी

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14 फरवरी : माघ गुप्त नवरात्र पंचमी

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15 फरवरी : माघ गुप्त नवरात्र षष्ठी

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16 फरवरी : माघ गुप्त नवरात्र सप्तमी

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17 फरवरी : माघ गुप्त नवरात्र महाष्टमी

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18 फरवरी : माघ गुप्त नवरात्र महानवमी
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