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जीटी रोड बेल्ट के विधायकों को मिल सकती है कैबिनेट में हिस्सेदारी, आकाओं के दरबार में हाजिरी भर रहे विधायक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Oct 2019 01:27 AM IST
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GT belt political news
बेशक अभी तक भाजपा की सरकार प्रदेश में नहीं बनी हो, लेकिन आत्मविश्वास से लबरेज भाजपा विधायक मंत्री पद को लेकर अभी से जोड़तोड़ करने में जुट गए हैं। खासकर जीटी रोड बैल्ट की बात करें तो यहां पर कई विधायकों के नाम मंत्रीमंडल में शामिल होने की अटकले हैं और वे इसको लेकर खासे उत्साहित भी हैं। इनमें करनाल के घरौंडा से दोबारा विधायक चुने गए हरविंद्र कल्याण का नाम सबसे ऊपर है। साफ छवि और नम्र स्वभाव के धनी कल्याण सीएम के विश्वास पात्रों में शामिल हैं। पिछली सरकार में वे हैफेड के चेयरमैन बनाए गए थे। इसके अलावा, यमुनानगर से कंवरपाल, कैथल से लीलाराम, कलायत से कमलेश ढांडा को भी कैबिनेट में शामिल करने की चर्चाएं हैं। वहीं, पानीपत से प्रमोद विज और महिपाल ढांडा भी मंत्रीमंडल में शामिल होने को लेकर जोड़ तोड़ कर रहे हैं। अगर सरकार निर्दलियों के सहारे बनी तो पूंडरी से रणधीर गोलन और नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंदर को भी मंत्रीमंडल में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, जातिगत समीकरणों को भी साधा जा रहा है। देखना यह है कि भाजपा जेजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाती है या फिर आजाद विधायकों के साथ मिलकर। इसके बाद ही मंत्रीमंडल की तस्वीर साफ हो सकेगी।
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गौरतलब है कि पिछली बार जीटी रोड बेल्ट से भी मंत्री थे। इनमें अंबाला से अनिल विज, यमुनानगर से कंवर पाल गुर्जर, करनाल से सीएम मनोहर लाल, इंद्री से कर्णदेव कांबोज और पानीपत के इसराना से कृष्ण लाल पंवार मंत्री थे। सोनीपत की बात करें तो यहां पर कविता जैन और उनके पति को सरकार में अहम जिम्मेदारियां दी गई थी। याद रखने योग्य बात ये भी है कि पिछली बार पंचकूला से लेकर सोनीपत तक जीटी रोड पर 31 सीटों में से भाजपा के पास 21 थी। इस बार विस चुनाव में भाजपा को 15 सीटें आई हैं। इसी प्रकार कांग्रेस की सीट पहले छह थी, इस बार बढ़कर 12 हो गई है। ऐसे में अपने पुराने गढ़ को बचाने और तवज्जो देने के लिए भाजपा जीटी रोड के विधायकों को पावर बना सकती है। इसलिए विधायक आकाओं के दरबार में हाजिरी भी भर रहे हैं।
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कलायत से दूसरी महिला विधायक बनी कमलेश डांढा
कलायत। हरियाणा निर्माण के 53 वर्षों के पश्चात कलायत हलका में पहली बार कमल खिला है जिसके चलते मतदाताओं ने कमलेश ढांढा को अपना पूरा समर्थन देते विधानसभा में पहुंचाने का कार्य किया है। भाजपा प्रत्याशी कमलेश ढांढा ने कांग्रेस उम्मीदवार जयप्रकाश को 8,974 मतों से हराया। कमलेश ढांढा हलका कलायत से दूसरी महिला विधायक बनी है। इस बार हुए चुनाव में गत चुनाव की अपेक्षा कम ही महिला विधायक चुनी गई है।
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सुरजेवाला को हराने का इनाम मिल सकता है लीला राम को
कैथल। कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तरीय नेता रणदीप सुरजेवाला को हराकर विधायक बनें लीला राम को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। लीला राम जीत हासिल करने के बाद अपने-अपने संपर्क के भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से आशीर्वाद लेने पहुंचे। साथ ही उनके समर्थकों ने भी उन्हें कैबिनेट में जगह दिलवाने की कवायद तेज कर दी है। लीला राम कैथल विधानसभा से 72664 मत लेकर विजयी हुए हैं। जबकि उनके प्रतिद्वंदी रणदीप सुरजेवाला भी उनसे महज 1246 वोट पीछे रह गए और 71418 वोट लेकर भी रणदीप सुरजेवाला को हार का मुंह देखना पड़ा। लीला राम को कांग्रेस के बड़े नेता को हराने का इनाम भाजपा में मिल सकता है। वहीं गुर्जर समाज से महज 2 विधायक इस बार चुनकर आए हैं। ऐसे में मंत्रालय में समाज के एक विधायक को जगह मिलने की संभावनाएं हैं।
सुधा भीु ठोक रहे ताल
कुरुक्षेत्र। मनोहर कृपा हुई तो थानेसर से विधायक सुभाष सुधा हरियाणा के मंत्री बन सकते हैं। सुभाष सुधा लगातार दूसरी बार थानेसर विधानसभा सीट से विजयी हुई हैं। हालांकि, इस बार सुधा की जीत और प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी अशोक अरोड़ा की हार का अंतर बेहद कम रहा है। सुभाष सुधा विधानसभा चुनाव 2014 से ऐन पहले कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे और थानेसर विधानसभा सीट से टिकट हासिल कर 25 हजार से ऊपर वोटों से जीत दर्ज करने में भी सफल हुए थे। तब सुधा 2014 से इस उम्मीद में थे कि सरकार उन्हें मंत्री बना सकती है, लेकिन पूरे पांच साल उनकी उम्मीद पूरी नहीं हुई थी, जबकि उनकी पहचान सीएम के करीबी की जरूर बनी।

गोलन ने दिल्ली में डाला डेरा
पूंडरी। आजाद विधायक रणधीर गोलन को भाजपा के मंत्रीमंडल में जगह मिलने की संभावना है। वे देर रात ही चुनाव जीतने के बाद भाजपा नेताओं के साथ दिल्ली चले गए थे। इसके बाद दिन भर गोलन द्वारा भाजपा को समर्थन दिए जाने की सूचना नेशनल मीडिया में चलती रही। गोलन 30 साल से भी अधिक समय से भाजपा में ही काम कर रहे हैं, लेकिन इस बार उन्हें टिकट ना मिलने पर आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
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