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Kaithal News: संस्कृत विवि में महर्षि वाल्मीकि जयंती सप्ताह का भव्य शुभारंभ

Wed, 08 Oct 2025 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 08 Oct 2025 12:44 AM IST
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Grand inauguration of Maharishi Valmiki Jayanti week in Sanskrit University
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती सप्ताह का शुभारंभ विश्वविद्यालय सभागार, टीक परिसर में गरिमामय उद्घाटन समारोह के साथ किया गया। आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के जीवन, कृतित्व और उनके महाकाव्य रामायण के शाश्वत मूल्यों को समर्पित यह सप्ताह 13 अक्टूबर 2025 तक चलेगा।

इस आयोजन का मार्गदर्शन कुलगुरु प्रो. राजबीर सिंह कर रहे हैं। उन्होंने सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान वाल्मीकि सम्पूर्ण विश्व के लिए आदर्श हैं, और हमें उनके मूल्यों और विचारों पर चलना चाहिए।
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उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता शैक्षणिक अधिष्ठाता एवं कुलसचिव प्रो. संजय गोयल ने की। उन्होंने छात्रों को आदि कवि वाल्मीकि के कृतित्व से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और बताया कि जयंती सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों की रचनात्मक और बौद्धिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। यह सप्ताह 13 अक्तूबर को वाल्मीकि रामायण में सामाजिक समरसता विषय पर संगोष्ठी के साथ समापन करेगा।
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उद्घाटन समारोह का संचालन ज्योतिष विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नवीन शर्मा ने महर्षि वाल्मीकि और भगवान श्रीराम की वंदना से प्रारंभ किया। समारोह का विधिवत शुभारंभ सभी आचार्यों द्वारा महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

हिंदू अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण चंद्र पांडेय ने रामायण से मिलने वाली महान सीखों को छात्रों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि बुराई पर अच्छाई की विजय रामायण का सबसे बड़ा संदेश है। उन्होंने त्याग के आदर्श को रेखांकित किया, उदाहरण स्वरूप भगवान राम का पिता के वचन का पालन करते हुए राजपाट छोड़कर वनवास स्वीकार करना। राम-लक्ष्मण के बीच प्रेम और वफादारी तथा सीता-राम के बीच समर्पण को आदर्श संबंधों की नींव बताया।

छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ. जगत नारायण ने रामायण में निहित नैतिकता और सदाचार पर अपने विचार रखे। उन्होंने क्षमा के महत्व को समझाया और बताया कि रामायण विविधता में एकता का पाठ पढ़ाती है। इस अवसर पर दर्शन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. कुलदीप चन्द्र, डॉ. सत्येन्द्र गौतम, रोहित, अधीक्षक सुभाष और विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी सक्रिय सहभागिता की।

रामायण और गायत्री मंत्र के बीच बताया संबंध

वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने रामायण और गायत्री मंत्र के बीच गहरे संबंध को उजागर किया। उन्होंने बताया कि रामायण के 24,000 श्लोकों में से प्रत्येक 1,000 श्लोक के बाद आने वाला पहला अक्षर गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में से एक है, जो महाकाव्य की संरचनात्मक दिव्यता को दर्शाता है।
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