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Kaithal News: ट्रैक्टर-ट्रॉली के टायर तले दबे सरकारी नियम
Wed, 29 Oct 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 29 Oct 2025 01:41 AM IST
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नई मंडी में ट्रैक्टर-ट्राली में लोडिंग करते श्रमिक। संवाद
- फोटो : गौसपुर गांव के पास भीगी फसल।
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की मंडियों में इन दिनों धान के उठान का काम तेज़ी से चल रहा है, लेकिन यह काम सरकारी नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। अधिकतर जगहों पर धान की लोडिंग ट्रैक्टर-ट्रॉली में की जा रही है, जबकि नियमों के मुताबिक इन वाहनों का व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित है।
ट्रैक्टर-ट्रॉली कृषि प्रयोजनों के लिए पंजीकृत होती हैं, परंतु मंडियों में इन्हें व्यावसायिक ढुलाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे न केवल सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि राजस्व को भी नुकसान हो रहा है। व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकृत
वाहनों की फीस कृषि श्रेणी की तुलना में अधिक होती है।
इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ओवरलोडिंग भी आम बात है। ओवरलोड ट्रॉली जब सड़कों पर दौड़ती हैं, तो हादसों का खतरा बढ़ जाता है, वहीं शहर में जाम की स्थिति भी बनती है। इसके बावजूद परिवहन विभाग के अधिकारी और टीमें धरातल से नदारद हैं। शहरवासियों में इस लापरवाही को लेकर रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्ती बरतनी चाहिए।
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सड़क घेर कर चलते हैं वाहन ः सड़क पर दौड़ते ज्यादातर ट्रैक्टर-ट्रॉली कृषि कार्यों के लिए पंजीकृत हैं, लेकिन इनका नियमों के विपरीत व्यावसायिक प्रयोग किया जा रहा है। इन ट्रॉली में धान, भूसा और पराली को ओवरलोड भरकर ले जाया जाता है, जिससे उनकी ऊंचाई और चौड़ाई इतनी बढ़ जाती है कि वे पूरी सड़क घेर लेते हैं।
दूसरे वाहन चालकों को निकलने में मुश्किल होती है और आए दिन जाम के हालात बन जाते हैं। यही नहीं, खनन कार्य में प्रयोग हो रहे ट्रक और डंपर भी इसी तरह नियमों के विरुद्ध ओवरलोड होकर चलते हैं।
हमारी टीम लगातार ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई कर रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। बहुत जल्द ही मंडियों से बाहर निकलने वाले ऐसे वाहनों पर जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। -गिरीश चावला, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारी
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कैथल। जिले की मंडियों में इन दिनों धान के उठान का काम तेज़ी से चल रहा है, लेकिन यह काम सरकारी नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। अधिकतर जगहों पर धान की लोडिंग ट्रैक्टर-ट्रॉली में की जा रही है, जबकि नियमों के मुताबिक इन वाहनों का व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित है।
ट्रैक्टर-ट्रॉली कृषि प्रयोजनों के लिए पंजीकृत होती हैं, परंतु मंडियों में इन्हें व्यावसायिक ढुलाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे न केवल सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि राजस्व को भी नुकसान हो रहा है। व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकृत
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वाहनों की फीस कृषि श्रेणी की तुलना में अधिक होती है।
इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ओवरलोडिंग भी आम बात है। ओवरलोड ट्रॉली जब सड़कों पर दौड़ती हैं, तो हादसों का खतरा बढ़ जाता है, वहीं शहर में जाम की स्थिति भी बनती है। इसके बावजूद परिवहन विभाग के अधिकारी और टीमें धरातल से नदारद हैं। शहरवासियों में इस लापरवाही को लेकर रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्ती बरतनी चाहिए।
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सड़क घेर कर चलते हैं वाहन ः सड़क पर दौड़ते ज्यादातर ट्रैक्टर-ट्रॉली कृषि कार्यों के लिए पंजीकृत हैं, लेकिन इनका नियमों के विपरीत व्यावसायिक प्रयोग किया जा रहा है। इन ट्रॉली में धान, भूसा और पराली को ओवरलोड भरकर ले जाया जाता है, जिससे उनकी ऊंचाई और चौड़ाई इतनी बढ़ जाती है कि वे पूरी सड़क घेर लेते हैं।
दूसरे वाहन चालकों को निकलने में मुश्किल होती है और आए दिन जाम के हालात बन जाते हैं। यही नहीं, खनन कार्य में प्रयोग हो रहे ट्रक और डंपर भी इसी तरह नियमों के विरुद्ध ओवरलोड होकर चलते हैं।
हमारी टीम लगातार ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई कर रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। बहुत जल्द ही मंडियों से बाहर निकलने वाले ऐसे वाहनों पर जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। -गिरीश चावला, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारी