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रोडवेज का बेड़ा हुआ खाली, प्राइवेट बसों की संख्या बड़ी
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रोडवेज डिपो के बेड़े से हर महीने बसों की संख्या घटती जा रही है। अब हालात ऐसे हो गए है कि कैथल में रोडवेज की बसों की संख्या 100 से कम तो वहीं प्राइवेट बसें 100 से अधिक हो चुकी हैं। पिछले पांच साल में कैथल डिपो को 17 रोडवेज की बसें मिली हैं, लेकिन कंडम 55 बसें हो चुकी हैं। 23 बसें और जुलाई माह के अंत तक डिपो से बाहर हो जाएंगी। जो अपनी किलोमीटर की आयु सीमा पूरा कर लेंगी। इस प्रकार छह साल में 78 बसें कंडम होंगी। डिपो के पास 200 बसों की स्वीकृति है, लेकिन डिपो के बेड़े में 85 बसें ही रह जाएगी। वहीं पांच मिनी बसों को सिविल अस्पताल में एंबुलेंस के लिए प्रयोग किया जा रहा है। पहले से ही परेशानी झेल रहे डिपो को और अब ज्यादा समस्या बढऩे वाली है। समय पर बस नहीं मिलने से घंटों यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ेगा। पिछले दो साल में डिपो को डिमांड के बाद भी रोडवेज की बसें नहीं मिली है। हालांकि विभाग के आला अधिकारियों की ओर से मुख्यालय में पत्राचार किया जा चुका हैं, लेकिन बसों की संख्या बढ़ाने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। डिपो में 106 प्राइवेट गाड़ियां ऑन रूट हैं।
नई रोडवेज बस जब बेड़े में शामिल होती है तो उसकी आयु सीमा व किलोमीटर तय होते हैं। नई बस की आयु सीमा अब 10 वर्ष होती है। इनको 10 वर्ष तक रूटों पर दौड़ाया जाता है और आठ लाख किलोमीटर तय करने होते हैं। जब बसों की आयु और किलोमीटर पूरे हो जाते हैं तो कुछ अच्छी बसों के किलोमीटर बढ़वा दिए जाते है। 10 वर्ष के बाद बसों को कंडम घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद इन बसों को रूटों पर नहीं दौड़ाया जाता।
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नई रोडवेज बस जब बेड़े में शामिल होती है तो उसकी आयु सीमा व किलोमीटर तय होते हैं। नई बस की आयु सीमा अब 10 वर्ष होती है। इनको 10 वर्ष तक रूटों पर दौड़ाया जाता है और आठ लाख किलोमीटर तय करने होते हैं। जब बसों की आयु और किलोमीटर पूरे हो जाते हैं तो कुछ अच्छी बसों के किलोमीटर बढ़वा दिए जाते है। 10 वर्ष के बाद बसों को कंडम घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद इन बसों को रूटों पर नहीं दौड़ाया जाता।
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