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आठवें दिन किया परिजनों ने मछली पकड़ने के विवाद में मारे गए दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार
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funeral
- फोटो : Kaithal
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पिछले आठ दिनों से पोस्टमार्टम हाउस में रखे शिव कालोनी देवीगढ़ रोड निवासी अनिल व बंटी के शव का आखिरकार मंगलवार अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने संघर्ष समिति सदस्यों व समाज के लोगों की मौजूदगी में करनाल रोड स्थित श्मशान घाट में दोनों का अंत्येष्टि की। इससे पूर्व संघर्ष समिति के सदस्य डीसी सुजान सिंह यादव से मिले और लंबित मांगों को शीघ्र पूरा करने की बात रखी।
संघर्ष समिति में शामिल फूलसिंह गौतम, रणधीर बात्ता, एडवोकेट रजन कल्सन, प्रदीप क्योड़क सहित परिवार के लोग मंगलवार दोपहर डीसी सुजान सिंह यादव से मिलने पहुंचे। जहां डीसी से परिजनों को आर्थिक मदद तुरंत देने, एससीएसटी एक्ट में घर की मरम्मत, मृतकों की पत्नियों को सरकारी नौकरी देने, शस्त्र लाइसेंस देने, मुआवजा राशि 50 लाख रुपये का केस बनाकर भेजने, दूसरे केस में भी 302 की धारा जोड़ने जैसी मांगें रखीं। डीसी ने परिजनों को बताया कि एक्ट के मुताबिक दोनों मृतकों के परिवार को 4-4 लाख रुपये से अधिक की मुआवजा राशि की फाइल प्रदेश मुख्यालय भेज दी गई है। सप्ताह भर में यह राशि खातों में जमा हो जाएगी। डीसी ने यहां तक भी कहा कि यदि नहीं हुई तो आप मुझ से ले जाना। इसके अलावा 50 लाख रुपये की सहायता राशि का केस बनाकर सीएम को भेजने, एक्ट के मुताबिक घर की मरम्मत, सरकारी नौकरी की सिफारिश जैसी फाइलें बनाकर सरकार को भेजने, एक्ट में सभी तरह के प्रावधानों की लिखित मांग आने पर उसी अनुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। डीसी ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि पुलिस में जाम आदि लगाने के आरोप में केस दर्ज हैं तो उसे भी रद्द करवाया जाएगा। डीसी से मिलने के बाद मृतकों के घर पहुंच कर संघर्ष समिति सदस्यों ने परिवार के साथ मिलकर चर्चा की और अंतिम संस्कार करवाने का फैसला लिया। इसके बाद परिजनों ने जिला अस्पताल से दोनों के शव लेकर करनाल रोड स्थित शिवभूमि में अंतिम संस्कार कर दिया।
विदित रहे कि 6 दिसंबर की रात को गांव कुतुबपुर में मछली ठेकेदार व उसके साथियों द्वारा मछली चोरी करने की बात कहते हुए अनिल के साथ मारपीट की बात सामने आई थी। इसके बाद 8 दिंसबर को अनिल कुमार की मौत हो गई थी। परिजनों ने हत्या केस आरोप में केस दर्ज करवाया था। इसके बाद 9 दिसंबर को अनिल के साथ गए बंटी का शव भी गांव के तालाब से ही मिला था। इसके बाद फिर परिजनों ने जाम लगाकर हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस ने दोनों मामलों में हत्या, एससीएसटी के आरोप में केस दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन परिजन मुआवजा राशि मिलने, मृतकों की पत्नियों को सरकारी नौकरी देने जैसी मांगों को लेकर अंतिम संस्कार न करने पर अड़े थे। मंगलवार को दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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संघर्ष समिति में शामिल फूलसिंह गौतम, रणधीर बात्ता, एडवोकेट रजन कल्सन, प्रदीप क्योड़क सहित परिवार के लोग मंगलवार दोपहर डीसी सुजान सिंह यादव से मिलने पहुंचे। जहां डीसी से परिजनों को आर्थिक मदद तुरंत देने, एससीएसटी एक्ट में घर की मरम्मत, मृतकों की पत्नियों को सरकारी नौकरी देने, शस्त्र लाइसेंस देने, मुआवजा राशि 50 लाख रुपये का केस बनाकर भेजने, दूसरे केस में भी 302 की धारा जोड़ने जैसी मांगें रखीं। डीसी ने परिजनों को बताया कि एक्ट के मुताबिक दोनों मृतकों के परिवार को 4-4 लाख रुपये से अधिक की मुआवजा राशि की फाइल प्रदेश मुख्यालय भेज दी गई है। सप्ताह भर में यह राशि खातों में जमा हो जाएगी। डीसी ने यहां तक भी कहा कि यदि नहीं हुई तो आप मुझ से ले जाना। इसके अलावा 50 लाख रुपये की सहायता राशि का केस बनाकर सीएम को भेजने, एक्ट के मुताबिक घर की मरम्मत, सरकारी नौकरी की सिफारिश जैसी फाइलें बनाकर सरकार को भेजने, एक्ट में सभी तरह के प्रावधानों की लिखित मांग आने पर उसी अनुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। डीसी ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि पुलिस में जाम आदि लगाने के आरोप में केस दर्ज हैं तो उसे भी रद्द करवाया जाएगा। डीसी से मिलने के बाद मृतकों के घर पहुंच कर संघर्ष समिति सदस्यों ने परिवार के साथ मिलकर चर्चा की और अंतिम संस्कार करवाने का फैसला लिया। इसके बाद परिजनों ने जिला अस्पताल से दोनों के शव लेकर करनाल रोड स्थित शिवभूमि में अंतिम संस्कार कर दिया।
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विदित रहे कि 6 दिसंबर की रात को गांव कुतुबपुर में मछली ठेकेदार व उसके साथियों द्वारा मछली चोरी करने की बात कहते हुए अनिल के साथ मारपीट की बात सामने आई थी। इसके बाद 8 दिंसबर को अनिल कुमार की मौत हो गई थी। परिजनों ने हत्या केस आरोप में केस दर्ज करवाया था। इसके बाद 9 दिसंबर को अनिल के साथ गए बंटी का शव भी गांव के तालाब से ही मिला था। इसके बाद फिर परिजनों ने जाम लगाकर हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस ने दोनों मामलों में हत्या, एससीएसटी के आरोप में केस दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन परिजन मुआवजा राशि मिलने, मृतकों की पत्नियों को सरकारी नौकरी देने जैसी मांगों को लेकर अंतिम संस्कार न करने पर अड़े थे। मंगलवार को दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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