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Kaithal News: चार लाख रुपये रिश्वत लेते पूर्व पार्षद रंगेहाथों गिरफ्तार
Sun, 20 Apr 2025 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 20 Apr 2025 01:34 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एंटी करप्शन ब्यूरो कैथल की टीम ने शहर के पूर्व पार्षद कमल मित्तल को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया है। पूर्व पार्षद पर व्यापारियों को प्रशासनिक कार्रवाई और आरटीआई के नाम पर ब्लैकमेल करने का आरोप है। इस मामले में पूर्व पार्षद कमल मित्तल ने एक कपड़ों के शोरूम के मालिक को धमकाया था कि उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कर शोरूम को सील करवा देगा।
मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में आरोपी पूर्व पार्षद की गिरफ्तारी के समय उससे चार लाख रुपये बरामद किए गए। वहीं, एसीबी की ओर से आरोपी के घर से दबिश के बाद 43 लाख 20 हजार रुपये बरामद किए हैं। इसकी पुष्टि एसीबी ने विज्ञप्ति में की है। अब आरोपी पूर्व पार्षद को रविवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
गौरतलब है कि इस मामले में पुराना बस स्टैंड स्थित बालाजी गारमेंट्स के मालिक संदीप गर्ग ने एसीबी टीम को शिकायत दी थी कि सेक्टर 19 निवासी पूर्व पार्षद कमल मित्तल ने शोरूम को सील करवाने की धमकी देकर उसने डीसी के नाम पर नौ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से वह पांच लाख रुपये पहले ही ले चुका था। एसीबी की टीम ने शनिवार को कमेटी चौक स्थित बाजार में आरोपी कमल मित्तल को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों दबोचा।
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आरोपी पूर्व पार्षद और उसके साथियों की ओर से शहर के 25 से ज्यादा व्यापारियों को आरटीआई, जीएसटी और इनकम टैक्स विभाग में शिकायत देकर ब्लैकमेल करने का आरोप भी लगा है। संदीप गर्ग ने 18 मार्च को एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत दी थी। बताया कि उसकी पुराने बस स्टैंड के पास जमीन है, जिस पर उसने बिल्डिंग बनवाई थी। आरोपी ने शिकायत कर बिल्डिंग सील करवा दिया था। इसके लिए उसे सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने पड़े, कुछ कागज भी तैयार कराए, लेकिन मामला उलझा ही रहा।
पांच लाख 20 हजार रुपये लेकर सील खुलवाई ः व्यापारी संदीप गर्ग ने बताया कि बिल्डिंग बनाने में उसका काफी रुपया खर्च हो गया था। वह बिल्डिंग को शुरू करने ही जा रहा था कि उसे सील करा दिया गया। इसके बाद उसके शिकायतकर्ता कमल मित्तल से संपर्क साधा। उसने पांच लाख 20 हजार रुपये लेकर सील को खुलवा दिया। इसके बाद भी आरोपी ने आरटीआई और सीएम विंडो पर उसकी शिकायत कर दी।
बड़े डॉक्टर और व्यापारियों को बनाता था निशाना
आरोपी ने शिकायतें कर और समझौता करने की एवज में रुपये लेने को अपना धंधा बना रखा था। उसने कई लोगों के खिलाफ सीएम विंडो और आरटीआई लगाई हुई है, जिसमें डॉक्टर, व्यापारी, मिष्ठान भंडार संचालक, मार्बल विक्रेता व बड़े दुकानदार शामिल हैं। यह भी पता चला है कि आरोपी ने कई तरह के व्यापार संबंधित व अन्य संस्थाओं के पहचान पत्र बनवा रखे थे। उसके जरिए लोगों पर दबाव बनाता था और ब्लैकमेल करता था। आरोपी कई लोगों से करीब 25 लाख रुपये हड़प चुका था।
कांग्रेस का समर्थक, 2005 में बना था पार्षद
एसीबी की टीम की शुरुआती जांच में पता चला कि पकड़े गए कमल मित्तल ने 2005 में पार्षद का चुनाव लड़ा था। सेक्टर 19 में वार्ड नंबर 10 है और वह इसी वार्ड से पार्षद चुना गया था। उस समय कांग्रेस की सरकार थी। इसके बाद वह चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन तभी से वह सरकारी कार्यप्रणाली जान चुका था कि यहां कैसे काम होता है और कैसे लोगों से वसूली की जाती है।
डीसी के नाम पर मांग रहा था चार लाख रुपये
व्यापारी संदीप गर्ग ने बताया कि बिल्डिंग की सील खुल गई थी। वह खुश था कि तभी पता चला कि कमल मित्तल ने उसकी दोबारा शिकायत कर दी है। उसने फिर कमल से संपर्क किया और पूछा कि वह तो रुपये दे चुका है और सील भी खुल चुकी है, अब शिकायत क्यों। कमल ने जवाब दिया कि डीसी को रुपये देने है। संदीप गर्ग ने बताया कि वह परेशान हो गया था। सोचा कि यदि अब रुपये दे दिए तो कमल कोई न कोई शिकायत कर उसे परेशान करता रहेगा। इसीलिए उसने एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी।
आमजन की शिकायत निवारण के लिए समाधान शिविर सहित कई जगह सरकार की ओर से व्यवस्थाएं की हैं। यदि कोई व्यक्ति आमजन से किसी अधिकारी का भय दिखाकर वसूली करता है तो इस संबंध में समाधान शिविर सहित उनसे मिल कर शिकायत दें सकते है। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। -उपायुक्त प्रीति
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कैथल। एंटी करप्शन ब्यूरो कैथल की टीम ने शहर के पूर्व पार्षद कमल मित्तल को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया है। पूर्व पार्षद पर व्यापारियों को प्रशासनिक कार्रवाई और आरटीआई के नाम पर ब्लैकमेल करने का आरोप है। इस मामले में पूर्व पार्षद कमल मित्तल ने एक कपड़ों के शोरूम के मालिक को धमकाया था कि उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कर शोरूम को सील करवा देगा।
मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में आरोपी पूर्व पार्षद की गिरफ्तारी के समय उससे चार लाख रुपये बरामद किए गए। वहीं, एसीबी की ओर से आरोपी के घर से दबिश के बाद 43 लाख 20 हजार रुपये बरामद किए हैं। इसकी पुष्टि एसीबी ने विज्ञप्ति में की है। अब आरोपी पूर्व पार्षद को रविवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
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गौरतलब है कि इस मामले में पुराना बस स्टैंड स्थित बालाजी गारमेंट्स के मालिक संदीप गर्ग ने एसीबी टीम को शिकायत दी थी कि सेक्टर 19 निवासी पूर्व पार्षद कमल मित्तल ने शोरूम को सील करवाने की धमकी देकर उसने डीसी के नाम पर नौ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से वह पांच लाख रुपये पहले ही ले चुका था। एसीबी की टीम ने शनिवार को कमेटी चौक स्थित बाजार में आरोपी कमल मित्तल को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों दबोचा।
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आरोपी पूर्व पार्षद और उसके साथियों की ओर से शहर के 25 से ज्यादा व्यापारियों को आरटीआई, जीएसटी और इनकम टैक्स विभाग में शिकायत देकर ब्लैकमेल करने का आरोप भी लगा है। संदीप गर्ग ने 18 मार्च को एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत दी थी। बताया कि उसकी पुराने बस स्टैंड के पास जमीन है, जिस पर उसने बिल्डिंग बनवाई थी। आरोपी ने शिकायत कर बिल्डिंग सील करवा दिया था। इसके लिए उसे सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने पड़े, कुछ कागज भी तैयार कराए, लेकिन मामला उलझा ही रहा।
पांच लाख 20 हजार रुपये लेकर सील खुलवाई ः व्यापारी संदीप गर्ग ने बताया कि बिल्डिंग बनाने में उसका काफी रुपया खर्च हो गया था। वह बिल्डिंग को शुरू करने ही जा रहा था कि उसे सील करा दिया गया। इसके बाद उसके शिकायतकर्ता कमल मित्तल से संपर्क साधा। उसने पांच लाख 20 हजार रुपये लेकर सील को खुलवा दिया। इसके बाद भी आरोपी ने आरटीआई और सीएम विंडो पर उसकी शिकायत कर दी।
बड़े डॉक्टर और व्यापारियों को बनाता था निशाना
आरोपी ने शिकायतें कर और समझौता करने की एवज में रुपये लेने को अपना धंधा बना रखा था। उसने कई लोगों के खिलाफ सीएम विंडो और आरटीआई लगाई हुई है, जिसमें डॉक्टर, व्यापारी, मिष्ठान भंडार संचालक, मार्बल विक्रेता व बड़े दुकानदार शामिल हैं। यह भी पता चला है कि आरोपी ने कई तरह के व्यापार संबंधित व अन्य संस्थाओं के पहचान पत्र बनवा रखे थे। उसके जरिए लोगों पर दबाव बनाता था और ब्लैकमेल करता था। आरोपी कई लोगों से करीब 25 लाख रुपये हड़प चुका था।
कांग्रेस का समर्थक, 2005 में बना था पार्षद
एसीबी की टीम की शुरुआती जांच में पता चला कि पकड़े गए कमल मित्तल ने 2005 में पार्षद का चुनाव लड़ा था। सेक्टर 19 में वार्ड नंबर 10 है और वह इसी वार्ड से पार्षद चुना गया था। उस समय कांग्रेस की सरकार थी। इसके बाद वह चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन तभी से वह सरकारी कार्यप्रणाली जान चुका था कि यहां कैसे काम होता है और कैसे लोगों से वसूली की जाती है।
डीसी के नाम पर मांग रहा था चार लाख रुपये
व्यापारी संदीप गर्ग ने बताया कि बिल्डिंग की सील खुल गई थी। वह खुश था कि तभी पता चला कि कमल मित्तल ने उसकी दोबारा शिकायत कर दी है। उसने फिर कमल से संपर्क किया और पूछा कि वह तो रुपये दे चुका है और सील भी खुल चुकी है, अब शिकायत क्यों। कमल ने जवाब दिया कि डीसी को रुपये देने है। संदीप गर्ग ने बताया कि वह परेशान हो गया था। सोचा कि यदि अब रुपये दे दिए तो कमल कोई न कोई शिकायत कर उसे परेशान करता रहेगा। इसीलिए उसने एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी।
आमजन की शिकायत निवारण के लिए समाधान शिविर सहित कई जगह सरकार की ओर से व्यवस्थाएं की हैं। यदि कोई व्यक्ति आमजन से किसी अधिकारी का भय दिखाकर वसूली करता है तो इस संबंध में समाधान शिविर सहित उनसे मिल कर शिकायत दें सकते है। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। -उपायुक्त प्रीति