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पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा का बड़ा आरोप
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पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने कहा कि कलायत व राजौंद ब्लॉक में कोरोना काल में भ्रष्टाचारी आपदा में अवसर ढूंढ रहे हैं। यहां दोनों ब्लॉकों में रिचार्ज बोर के नाम पर दो करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया जा रहा है। जबकि केवल एक गांव फरियाबाद में रिचार्ज बोर लगाया जा रहा है। वह भी अभी शुरू किया गया है, बाकी अनेकों गांवों के रिचार्ज बोर लगाए जाने के फर्जी बिल तैयार करके बीडीपीओ कार्यालय में प्रस्तुत किए गए हैं।
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव ने कहा कि फरवरी माह में सरपंचों से कार्यभार वापस ले लिया गया था। इस समय बीडीपीओ प्रशासक हैं। इस अवधि में तीन बड़े घोटाले हुए हैं। पहला गांवों में नालियां व नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का बिल पास करवाया गया। इसके बाद तालाबों की खुदाई के नाम पर फर्जी बिल पास करवाए गए। अब गांवों में रिचार्ज बोर के नाम पर दो करोड़ रुपये से अधिक के बिल पास करने का दबाव डाला जा रहा है।
बिलों में 700 से 800 फुट की गहराई पर बोर लगाने की बात कही जा रही है, जबकि ये बोर 100 से 200 फुट पर लग जाते हैं। इतनी गहराई पर लगाने की अनुमति नहीं है। इससे पीने के पानी का जोन खराब हो जाता है। केवल फरियाबाद में एक बोर लगाया जा रहा है, जबकि उसके साइड में पहले से ही एक अन्य बोर लगा हुआ है। माजरा ने कहा कि असंध की एक फर्म शिवशंकर हार्डवेयर मशीनरी स्टोर के नाम पर कई गांवों की पंचायतों से ये बिल पास करवाए जा रहे हैं। तालाबों की सफाई में न केवल जिला परिषद बल्कि ब्लॉक समिति से भी वही बिल पास करवाए गए हैं। ऐसे में इस पूरे घोटाले की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। माजरा ने यह भी कहा कि फर्जीवाड़े का यह खेल सत्ता में शामिल एक बड़े नेता के इशारे पर खेला जा रहा है। इस संबंध में बीडीपीओ कलायत व राजौंद का काम संभाल रहे बीडीपीओ फूल सिंह से बात नहीं हो सकी। वहीं डीडीपीओ जसविंद्र सिंह ने कहा कि वे इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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पूर्व मुख्य संसदीय सचिव ने कहा कि फरवरी माह में सरपंचों से कार्यभार वापस ले लिया गया था। इस समय बीडीपीओ प्रशासक हैं। इस अवधि में तीन बड़े घोटाले हुए हैं। पहला गांवों में नालियां व नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का बिल पास करवाया गया। इसके बाद तालाबों की खुदाई के नाम पर फर्जी बिल पास करवाए गए। अब गांवों में रिचार्ज बोर के नाम पर दो करोड़ रुपये से अधिक के बिल पास करने का दबाव डाला जा रहा है।
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बिलों में 700 से 800 फुट की गहराई पर बोर लगाने की बात कही जा रही है, जबकि ये बोर 100 से 200 फुट पर लग जाते हैं। इतनी गहराई पर लगाने की अनुमति नहीं है। इससे पीने के पानी का जोन खराब हो जाता है। केवल फरियाबाद में एक बोर लगाया जा रहा है, जबकि उसके साइड में पहले से ही एक अन्य बोर लगा हुआ है। माजरा ने कहा कि असंध की एक फर्म शिवशंकर हार्डवेयर मशीनरी स्टोर के नाम पर कई गांवों की पंचायतों से ये बिल पास करवाए जा रहे हैं। तालाबों की सफाई में न केवल जिला परिषद बल्कि ब्लॉक समिति से भी वही बिल पास करवाए गए हैं। ऐसे में इस पूरे घोटाले की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। माजरा ने यह भी कहा कि फर्जीवाड़े का यह खेल सत्ता में शामिल एक बड़े नेता के इशारे पर खेला जा रहा है। इस संबंध में बीडीपीओ कलायत व राजौंद का काम संभाल रहे बीडीपीओ फूल सिंह से बात नहीं हो सकी। वहीं डीडीपीओ जसविंद्र सिंह ने कहा कि वे इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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