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Kaithal News: वन विभाग चलाएगा अभियान, पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
Thu, 05 Jun 2025 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 05 Jun 2025 12:54 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। वन विभाग की ओर से हर वर्ष चलाए जाने वाले अभियान के तहत इस बार भी मानसून में विशेष अभियान चलाया जाएगा। ऐसे में जिले में वन विभाग ने इस साल पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस समय जिले में वन क्षेत्र 7216 हेक्टेयर है।
मानसून के बाद वन विभाग पौधे लगाने का अभियान शुरू करेगा। ये पौधे वन विभाग की अलग-अलग नर्सरी में तैयार हो चुके हैं। अलग-अलग स्कीम के तहत ये पौधे लगाए जाएंगे। इनमें 120 हेक्टेयर में सफेदे लगाए जाएंगे और एक हेक्टेयर में 1100 सफेदे लगने हैं।
करीब 150 हेक्टेयर एरिया में सड़कों की साइड में पौधे लगाए जाएंगे और एक हेक्टेयर में 500 पौधे लगेंगे। करीब 10 हजार पौधे स्कूलों की सहायता से लगाए जाने हैं। वन विभाग की योजना के अनुसार मूल्यांकन करने के बाद करीब 12 साल के बाद पुराने वृक्षों को काटना होता है। इसमें ऐसे वृक्षों की पहचान की जाती है, जो पुराने हो चुके हैं, जो पेड़ गिरने वाले हों या जिन वृक्षों के कारण कोई कार्य प्रभावित हो रहा है। इन्हें काटने के बाद नए वृक्ष भी लगाने होते हैं। जिले में ऐसा नहीं किया जा रहा है।
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यहां करीब 20 सालों से वृक्षों की कटाई विभाग की तरफ से नहीं करवाई गई है। आंधी में जो पेड़ गिरते हैं इनमें ज्यादातर पुराने और सूखे पेड़ होते हैं। नियम के अनुसार पुराने पेड़ काट कर उनकी जगह पर नए पेड़ लगाने होते हैं। पिछले 25 दिनों में चार बार तूफान आ चुका है और इसमें करीब दो हजार पेड़ टूट चुके हैं। जो वृक्ष टूट रहे हैं उनकी लकड़ियां भी लोग उठा कर ले जाते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, जिले की आबादी करीब 13 लाख है और जिले भर में करीब 12 लाख वृक्ष हैं। इनमें जिले के पांच जंगलों के वृक्षों का आंकड़ा नहीं है। विभाग की तरफ से साल 2024 में वृक्षों की गिनती करवाई गई थी। सभी वृक्षों पर नंबर के हिसाब से मार्किंग की गई है।
हर नर्सरी में तैयार हो रहे पौधे : जिले की हर नर्सरी में करीब पांच हजार पौधे तैयार किए जा रहे हैं। ये पौधे बरगद, पीपल, लिसोड़ा, नीम, पिलखन, कजेलिया और शीशम के हैं। इनके अलावा फलों के पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं। पौधे लगाने के कार्य में शहर की विभिन्न संस्थाएं और शिक्षा विभाग भी सहयोग करेगा। वन विभाग की तरफ से पिछले साल लगाए गए पौधों की रक्षा के लिए गमले लगाए जाएंगे।
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कैथल। वन विभाग की ओर से हर वर्ष चलाए जाने वाले अभियान के तहत इस बार भी मानसून में विशेष अभियान चलाया जाएगा। ऐसे में जिले में वन विभाग ने इस साल पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस समय जिले में वन क्षेत्र 7216 हेक्टेयर है।
मानसून के बाद वन विभाग पौधे लगाने का अभियान शुरू करेगा। ये पौधे वन विभाग की अलग-अलग नर्सरी में तैयार हो चुके हैं। अलग-अलग स्कीम के तहत ये पौधे लगाए जाएंगे। इनमें 120 हेक्टेयर में सफेदे लगाए जाएंगे और एक हेक्टेयर में 1100 सफेदे लगने हैं।
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करीब 150 हेक्टेयर एरिया में सड़कों की साइड में पौधे लगाए जाएंगे और एक हेक्टेयर में 500 पौधे लगेंगे। करीब 10 हजार पौधे स्कूलों की सहायता से लगाए जाने हैं। वन विभाग की योजना के अनुसार मूल्यांकन करने के बाद करीब 12 साल के बाद पुराने वृक्षों को काटना होता है। इसमें ऐसे वृक्षों की पहचान की जाती है, जो पुराने हो चुके हैं, जो पेड़ गिरने वाले हों या जिन वृक्षों के कारण कोई कार्य प्रभावित हो रहा है। इन्हें काटने के बाद नए वृक्ष भी लगाने होते हैं। जिले में ऐसा नहीं किया जा रहा है।
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यहां करीब 20 सालों से वृक्षों की कटाई विभाग की तरफ से नहीं करवाई गई है। आंधी में जो पेड़ गिरते हैं इनमें ज्यादातर पुराने और सूखे पेड़ होते हैं। नियम के अनुसार पुराने पेड़ काट कर उनकी जगह पर नए पेड़ लगाने होते हैं। पिछले 25 दिनों में चार बार तूफान आ चुका है और इसमें करीब दो हजार पेड़ टूट चुके हैं। जो वृक्ष टूट रहे हैं उनकी लकड़ियां भी लोग उठा कर ले जाते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, जिले की आबादी करीब 13 लाख है और जिले भर में करीब 12 लाख वृक्ष हैं। इनमें जिले के पांच जंगलों के वृक्षों का आंकड़ा नहीं है। विभाग की तरफ से साल 2024 में वृक्षों की गिनती करवाई गई थी। सभी वृक्षों पर नंबर के हिसाब से मार्किंग की गई है।
हर नर्सरी में तैयार हो रहे पौधे : जिले की हर नर्सरी में करीब पांच हजार पौधे तैयार किए जा रहे हैं। ये पौधे बरगद, पीपल, लिसोड़ा, नीम, पिलखन, कजेलिया और शीशम के हैं। इनके अलावा फलों के पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं। पौधे लगाने के कार्य में शहर की विभिन्न संस्थाएं और शिक्षा विभाग भी सहयोग करेगा। वन विभाग की तरफ से पिछले साल लगाए गए पौधों की रक्षा के लिए गमले लगाए जाएंगे।