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मौसम ने बिगाड़ा खाद्य पदार्थों का जायका
ब्यूरो कैथल
Updated Thu, 07 Jul 2016 12:39 AM IST
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सब्जियां की कीमतों में हुआ इजाफा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पहले गर्मी अब बरसाती मौसम ने खाद्य पदार्थों का जायका बिगाड़ दिया है। महंगाई की मार के कारण कीमतें आसमान छू रही है। मौसम की ज्यादा मार सब्जियों पर पड़ी है। कई सब्जियों की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। जिस कारण उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ रही है। दालों और सरसों तेल की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है।
सब्जियों पर है ज्यादा असर, फल भी पीछे नहीं
सब्जियों पर मौसम का बड़ा असर पड़ा है। सब्जी विक्रेता लाला सिंह ने बताया कि विशेष रूप से आलू की एक माह पहले कीमतें प्रति पांच किलो 60 रुपये थी। वही आज 80 रुपये है। इसी प्रकार से टमाटर की कीमतें लगभग तीन गुणा हो गई हैं। सब्जी विक्रेता विक्की ने बताया कि टमाटर की कीमतें ज्यादा बढ़ी हैं। इसके अलावा बैंगन, लौकी, तोरई, फ्रेंच बीन व गोभी की कीमतों पर भी असर हुआ है। सब्जी विक्रेता बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर उत्पादित होने वाली सब्जियों की आपूर्ति बंद हो जाने के बाद बाहर से सब्जियां मंगवाई जा रही हैं, जिस कारण कीमतें बढ़ गई हैं। यह मौसम का असर है। वहीं फल विक्रेता चंदशेखर ने बताया कि फलों में पपीता व आम के रेट बढ़ गए हैं।
दालों की कीमतों में हुई वृद्धि
विक्रेता एसोसिएशन के प्रधान ताराचंद मंगला ने कहा कि दालों पर पिछले एक माह में ज्यादा असर नहीं हुआ है। इनमें केवल चना दाल की कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा अन्य दालों की कीमतें एक माह पहले जो थी, वही लगभग आज बनी हुई हैं।
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सरसों तेल पर असर
महंगाई का असर खाद्य तेलों पर भी हुआ है। खाद्य तेल विक्रेता शंटी गोयल ने बताया कि पिछले एक माह में सरसों के तेल में प्रति लीटर 8 रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा देशी घी की कीमत प्रति टीन करीब 150 रुपये तक बढ़े हैं। चीनी की कीमतें प्रति किलो 2 रुपये तक बढ़ी हैं।
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सब्जियों पर है ज्यादा असर, फल भी पीछे नहीं
सब्जियों पर मौसम का बड़ा असर पड़ा है। सब्जी विक्रेता लाला सिंह ने बताया कि विशेष रूप से आलू की एक माह पहले कीमतें प्रति पांच किलो 60 रुपये थी। वही आज 80 रुपये है। इसी प्रकार से टमाटर की कीमतें लगभग तीन गुणा हो गई हैं। सब्जी विक्रेता विक्की ने बताया कि टमाटर की कीमतें ज्यादा बढ़ी हैं। इसके अलावा बैंगन, लौकी, तोरई, फ्रेंच बीन व गोभी की कीमतों पर भी असर हुआ है। सब्जी विक्रेता बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर उत्पादित होने वाली सब्जियों की आपूर्ति बंद हो जाने के बाद बाहर से सब्जियां मंगवाई जा रही हैं, जिस कारण कीमतें बढ़ गई हैं। यह मौसम का असर है। वहीं फल विक्रेता चंदशेखर ने बताया कि फलों में पपीता व आम के रेट बढ़ गए हैं।
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दालों की कीमतों में हुई वृद्धि
विक्रेता एसोसिएशन के प्रधान ताराचंद मंगला ने कहा कि दालों पर पिछले एक माह में ज्यादा असर नहीं हुआ है। इनमें केवल चना दाल की कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा अन्य दालों की कीमतें एक माह पहले जो थी, वही लगभग आज बनी हुई हैं।
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सरसों तेल पर असर
महंगाई का असर खाद्य तेलों पर भी हुआ है। खाद्य तेल विक्रेता शंटी गोयल ने बताया कि पिछले एक माह में सरसों के तेल में प्रति लीटर 8 रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा देशी घी की कीमत प्रति टीन करीब 150 रुपये तक बढ़े हैं। चीनी की कीमतें प्रति किलो 2 रुपये तक बढ़ी हैं।