फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Fireworks smoke increased air pollution

पटाखों के धुएं ने बढ़ाया वायु प्रदूषण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Oct 2022 12:45 AM IST
विज्ञापन
Fireworks smoke increased air pollution
36-कैथल। अंबाला रोड पर फैला समॉग। - फोटो : Kaithal
कैथल। हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू सामान्य पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद जिले में जमकर आतिशबाजी हुई। असर यह रहा कि पटाखों के धुएं ने जिले में प्रदूषण के स्तर (एयर क्वालिटी इंडेक्स) को बढ़ा दिया। शनिवार तक प्रदूषण का स्तर 150 पीएम तक था, जो दिवाली के अगले दिन मंगलवार को बढ़कर 250 से ऊपर पहुंच गया। एयर क्वालिटी इंडेक्स 278 पीएम रहा।
विज्ञापन

सरकार की ओर से इस बार केवल ग्रीन पटाखों को ही चलाने की अनुमति दी गई थी हालांकि इसके बावजूद लोगों ने जमकर पटाखे फोड़े। ऐसे में दिवाली के अगले दिन से ही स्मॉग शुरू हो गया। इस कारण सुबह व शाम के समय आंखों में जलन होती रही। यह प्रदूषण का स्तर बढ़ने का असर था। वहीं, प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर अधिकारियों का कहना था कि वे स्मॉग से बचाव के लिए कार्य कर रहे हैं। इसके लिए शहर में पानी का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि स्मॉग कुछ हद तक कम हो पाए।
विज्ञापन

बता दें कि हर बार दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ना शुरू हो जाता है। इस कारण वाहन चालकों को भी काफी परेशानियां झेलनी पड़ती है। माना जाता है कि ऐसा दिवाली रात में आतिशबाजी के कारण होता है। इसके अलावा पराली में आग की घटनाएं भी इसका कारण बनती हैं। यदि रिकॉर्ड की बात करें तो पिछली दिवाली से अबकी हालात बेहतर रहे क्योंकि गत वर्ष दिवाली पर एयर क्वालिटी इंडेक्स 373 रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिले में यह है पिछले एक सप्ताह का प्रदूषण का स्तर-
तिथि प्रदूषण का स्तर
18 अक्तूबर 129
19 अक्तूबर 218
20 अक्तूबर 217
21 अक्तूबर 180
22 अक्तूबर 202
23 अक्तूबर 164
24 अक्तूबर 229
25 अक्तूबर 278
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ विकास कुमार ने कहा कि कैथल में प्रदूषण का स्तर पिछले सालके मुकाबले अच्छे स्तर पर है। इसे पेड़-पौधों व सड़कों पर पानी की छिड़काव करवाकर कम करवाने का प्रयास किया जाएगा।
पराली में आग लगाने का आया एक मामला
जिले में मंगलवार को खेतों में पराली में आग लगाने का एक मामला सामने आया है। यह मामला गांव धनौरी में आया है। इसे कृषि विभाग की तरफ से सैटेलाइट के माध्यम से सत्यापित किया गया है। गत वर्ष इस दिन जिले में पराली जलाने के कुल 34 मामले सामने आए थे। इस बार केवल एक ही मामला सामने आया है। कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि इस बार पराली जलाने के मामलों में कमी आई है। विभाग की तरफ से किसानों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

ग्रीन पटाखों और पारंपरिक पटाखों में फर्क
ग्रीन पटाखों में एल्युमिनियम, बेरियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन जैसे खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इनमें सामान्य पटाखों की तुलना में आवाज भी कम ही होती है। हालांकि प्रदूषण ग्रीन और पारंपरिक पटाखे दोनों को जलाने से फैलता है। दोनों में तुलनात्मक फर्क की बात करें तो ग्रीन पटाखों से 30 प्रतिशत प्रदूषण कम होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed