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पंचायत चुनाव में बगड़ और कुणबे की भी ‘अग्निपरीक्षा’

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2022 01:30 AM IST
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'Fire test' of Bagad and Kunbe in Panchayat elections
कैथल। पंचायत चुनाव में आपसी भाईचारे व परिवार की एकता मजबूत होती दिख रही है। अक्सर लोगों में इस बात की चर्चा होती है कि आजकल आपसी प्रेम-प्यार व भाईचारा कम हो रहा है, लेकिन पंचायत चुनाव में स्थिति इसके उलट है। गांवों में बगड़ (एक ही परिवार का बड़ा स्वरूप) व कुणबे (एक ही परिवार के लोग, जो गांव के बड़े क्षेत्र में रहते हैं) की अहमियत इस समय उन उम्मीदवारों को पता चल रही है, जो चुनाव लड़ने के लिए इन्हें एकजुट किए हुए हैं। न केवल उम्मीदवार बल्कि बगड़ व कुणबे में रहने वाले लोगों की एकता की भी इस चुनाव में एक तरह से परीक्षा हो रही है।
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लोकसभा या विधानसभा के चुनाव गांव या शहर स्तर पर होते हैं, जिसमें गांव का बड़ा हिस्सा या तो उम्मीदवार के खिलाफ होता है या फिर पक्ष में। पंचायत चुनाव में इकाई गांव या शहर स्तर से भी नीचे जाकर बगड़ या कुणबा या यूं कहें कि परिवार तक पहुंच जाती है। मसलन, गांव खानपुर में सीवनिए, टोहानिए व लोनियों के तीन बगड़ हैं। इनमें से टोहानियों व लोनियों में से एक-एक उम्मीदवार हैं। तीसरा बगड़ किसी एक उम्मीदवार को समर्थन किए हुए है। बगड़ के आधार पर गांव की मुख्य बिरादरी के वोट बंटे हुए हैं। दूसरी ओर गांवों में लोटे में नमक डलवाकर शपथ दिलवाई जा रही है कि वोट फलां उम्मीदवार को दी जानी है।
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इसी प्रकार से बड़े गांवों में पट्टियों के अनुसार वोटों का विभाजन है। गांवों में बगड़ के लोग एकजुट होकर अपने ही उम्मीदवार को आगे किए हुए हैं या फिर उनके बगड़ से उम्मीदवार नहीं हैं तो पूरा बगड़ एक उम्मीदवार का समर्थन कर रहा है। ऐसा नहीं है कि सभी बगड़ या कुणबे एक दूसरे के खिलाफ हैं। कई गांव ऐसे हैं, जहां पूरे के पूरे गांव के बगड़ या कुणबे एक ही उम्मीदवार के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं। इन कुणबों व बगड़ में नेतृत्व की कमान बुजुर्गों के साथ-साथ युवा वर्ग भी थामे हुए हैं।
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कुल मिलाकर पंचायत चुनाव में ग्रामीण क्षेत्र में कुणबे व बगड़ की इकाइयां आपसी एकता एवं भाईचारे की मिसाल बनी हुई हैं। कई गांवों में लोग कुणबों व बगड़ की एकता की मिसाल देते हैं कि संबंधित गांव का यह बगड़ एकजुट होकर मतदान करता है। इसी कारण उसकी अलग से पहचान व पूछ होती है।
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