{"_id":"5fe4e01f8ebc3e3b6074c7ab","slug":"fire-kaithal-news-knl553472101","type":"story","status":"publish","title_hn":"फायर एनओसी में दमकल व जनस्वास्थ्य विभाग के विवाद में अब पीडब्ल्यूडी की इंट्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फायर एनओसी में दमकल व जनस्वास्थ्य विभाग के विवाद में अब पीडब्ल्यूडी की इंट्री
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जिले की सरकार जहां बैठकर सरकारी योजनाओं को क्रियान्वित करती है, वह परिसर अभी तक अगजनी की घटनाओं से सुरक्षित नहीं है। पिछले दिनों कृषि विभाग कार्यालय में लगी आग के दौरान फायर फाइटिंग सिस्टम काम नहीं आया था। क्योंकि यह अधूरा है और दमकल विभाग से एनओसी नहीं मिली है। दमकल विभाग द्वारा जनस्वास्थ्य विभाग को एनओसी के लिए फाइल तैयार करने के लिए तीन नोटिस जारी किए जा चुके हैं। लेकिन किसी नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। जनस्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दमकल के नियमानुसार दो एकड़ से अधिक की फायर फाइटिंग स्कीम का काम पीडब्ल्यूडी द्वारा किया जाना है। पीडब्ल्यूडी विभाग का कहना है कि वे कोर्ट परिसर की फायर फाइटिंग स्कीम तैयार कर रहे हैं, लघु सचिवालय के लिए एनओसी जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा हासिल की जानी है। अब देखना होगा कि तीन विभागों में उलझा यह मामला कैसे सुलझता है।
तीन मंजिला लघु सचिवालय भवन के लिए जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा 30 लाख रुपये की लागत से साल भर पहले फायर फाइटिंग के उपकरण लगवाए गए थे। इसके बाद जब विभाग ने दमकल विभाग को एनओसी के लिए आवेदन किया तो दमकल विभाग द्वारा बताया गया कि पहले पूरे 14 एकड़ के परिसर की एनओसी बनेगी, इसके लिए पूरे परिसर की ड्राइंग के साथ आवेदन किया जाए। इसी बात पर मामला लटक गया। दमकल विभाग के अधिकारी गुरमेल सिंह ने बताया कि पिछले तीन माह में तीन नोटिस जनस्वास्थ्य विभाग को भेजे जा चुके हैं कि पूरे परिसर के लिए ड्राइंग बनाकर फाइल जमा करवाएं, लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं आया है। जब तक वे फाइल अपडेट नहीं करेंगे, विभाग एनओसी नहीं दे सकता।
जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन कर्णवीर ने कहा कि विभाग ने 30 लाख रुपये की लागत से 2 एकड़ की लघु सचिवालय की फाइल जमा करवाकर एनओसी अप्लाई की थी। लेकिन दमकल विभाग का कहना है कि पूरे कैंपस की पूरी एनओसी देंगे। जो 14 एकड़ से अधिक का है। यह काम पीडब्ल्यूडी का है। फायर फाइटिंग के सारे काम पीडब्ल्यूडी को शिफ्ट हो गए हैं। अब पीडब्ल्यूडी की ओर से पूरे परिसर की एनओसी अप्लाई की जाएगी। हमने जो काम करवाया है, उसे दमकल ऑफिसर की मौजूदगी में चालू हालत में पीडब्ल्यूडी को हैंड ओवर कर दिया जाएगा।
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वहीं पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन कुलदीप चंद ने कहा कि विभाग कोर्ट परिसर की फायर फाइटिंग स्कीम तैयार कर रहा है। लगभग 32 लाख रुपये का शीघ्र ही टेंडर लगा दिया जाएगा। लघु सचिवालय में काम जनस्वास्थ्य विभाग ने किया है, उसी विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि एनओसी लें। हम केवल लघु सचिवालय के लिए एनओसी नहीं ले सकते। हम केवल इतना कर सकते हैं कि जब पूरे परिसर में फायर फाइटिंग स्कीम बन जाएगी, तब लघु सचिवालय की स्कीम भी उसमें जोड़ दी जाएगी। लेकिन जो काम पब्लिक हेल्थ ने किया है, उसकी जिम्मेदारी भी उसी विभाग की है।
आरटीआई एक्टिविस्ट जयपाल ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करके लघु सचिवालय में सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे। जिन पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे।
आखिर कौन लेगा लघु सचिवालय की जिम्मेवारी -लघु सचिवालय में डीसी, एसपी सहित जिले के विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों के कार्यालय हैं। जहां महत्वपूर्ण रिकॉर्ड रुम भी है। इसके अलावा विभागों का अलग-अलग रिकॉर्ड भी रखा हुआ है। ऐसे में यदि कोई हादसा हुआ तो कौन जिम्मेवार होगा? यह बड़ा सवाल है। तीनों विभागों में आपसी कब तालमेल होगा और एक से दूसरे कार्यालय में भेजी जा रही फाइल पर आखिर एनओसी कब मिलेगी? यह भी बड़ा सवाल है। जिले के आला अधिकारियों को इस बारे में ध्यान देना चाहिए।
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तीन मंजिला लघु सचिवालय भवन के लिए जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा 30 लाख रुपये की लागत से साल भर पहले फायर फाइटिंग के उपकरण लगवाए गए थे। इसके बाद जब विभाग ने दमकल विभाग को एनओसी के लिए आवेदन किया तो दमकल विभाग द्वारा बताया गया कि पहले पूरे 14 एकड़ के परिसर की एनओसी बनेगी, इसके लिए पूरे परिसर की ड्राइंग के साथ आवेदन किया जाए। इसी बात पर मामला लटक गया। दमकल विभाग के अधिकारी गुरमेल सिंह ने बताया कि पिछले तीन माह में तीन नोटिस जनस्वास्थ्य विभाग को भेजे जा चुके हैं कि पूरे परिसर के लिए ड्राइंग बनाकर फाइल जमा करवाएं, लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं आया है। जब तक वे फाइल अपडेट नहीं करेंगे, विभाग एनओसी नहीं दे सकता।
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जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन कर्णवीर ने कहा कि विभाग ने 30 लाख रुपये की लागत से 2 एकड़ की लघु सचिवालय की फाइल जमा करवाकर एनओसी अप्लाई की थी। लेकिन दमकल विभाग का कहना है कि पूरे कैंपस की पूरी एनओसी देंगे। जो 14 एकड़ से अधिक का है। यह काम पीडब्ल्यूडी का है। फायर फाइटिंग के सारे काम पीडब्ल्यूडी को शिफ्ट हो गए हैं। अब पीडब्ल्यूडी की ओर से पूरे परिसर की एनओसी अप्लाई की जाएगी। हमने जो काम करवाया है, उसे दमकल ऑफिसर की मौजूदगी में चालू हालत में पीडब्ल्यूडी को हैंड ओवर कर दिया जाएगा।
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वहीं पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन कुलदीप चंद ने कहा कि विभाग कोर्ट परिसर की फायर फाइटिंग स्कीम तैयार कर रहा है। लगभग 32 लाख रुपये का शीघ्र ही टेंडर लगा दिया जाएगा। लघु सचिवालय में काम जनस्वास्थ्य विभाग ने किया है, उसी विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि एनओसी लें। हम केवल लघु सचिवालय के लिए एनओसी नहीं ले सकते। हम केवल इतना कर सकते हैं कि जब पूरे परिसर में फायर फाइटिंग स्कीम बन जाएगी, तब लघु सचिवालय की स्कीम भी उसमें जोड़ दी जाएगी। लेकिन जो काम पब्लिक हेल्थ ने किया है, उसकी जिम्मेदारी भी उसी विभाग की है।
आरटीआई एक्टिविस्ट जयपाल ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करके लघु सचिवालय में सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे। जिन पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे।
आखिर कौन लेगा लघु सचिवालय की जिम्मेवारी -लघु सचिवालय में डीसी, एसपी सहित जिले के विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों के कार्यालय हैं। जहां महत्वपूर्ण रिकॉर्ड रुम भी है। इसके अलावा विभागों का अलग-अलग रिकॉर्ड भी रखा हुआ है। ऐसे में यदि कोई हादसा हुआ तो कौन जिम्मेवार होगा? यह बड़ा सवाल है। तीनों विभागों में आपसी कब तालमेल होगा और एक से दूसरे कार्यालय में भेजी जा रही फाइल पर आखिर एनओसी कब मिलेगी? यह भी बड़ा सवाल है। जिले के आला अधिकारियों को इस बारे में ध्यान देना चाहिए।