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Kaithal News: मुआवजे के लिए भटक रहे किसान
Sun, 23 Nov 2025 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 23 Nov 2025 11:32 PM IST
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बारिश में खराब हुई फसल। आर्काइव
कैथल। फसल खराबे का मुआवजा न मिलने के कारण किसानों का सब्र जवाब दे रहा है। वह रोजाना सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सटीक जवाब नहीं मिल पा रहा है। वह परेशान हो चुके हैं पर कोई आशा की किरण नजर नहीं आ रही। मुआवजा राशि जारी न होने के चलते किसानों पर आर्थिक संकट आया गया है। किसान सरकार से जल्द से जल्द मुआवजा राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं। कांगथली गांव के किसान सुरेंद्र ने बताया कि बारिश के चलते उसकी फसल पर पानी फिर गया था। जिसके बाद उन्होंने मुआवजा राशि के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अप्लाई किया था, लेकिन मुआवजा राशि न मिलने के कारण अब उनके सामने आर्थिक संकट आकर खड़ा हो गया है। उनको अपने परिवार का गुजर-बसर करना मुश्किल हो रखा है। क्योड़क गांव के किसान ऋषिपाल ने बताया कि उसने 4 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर धान की फसल लगाई थी। लेकिन अत्यधिक बारिश के चलते उसकी सारी फसल बर्बाद हो गई। लंबे समय से मुआवजे का इंतजार करने के बाद भी उन्हें मुआवजा राशि नहीं मिल रही है।
किसान नेता विक्रम कसाना ने बताया कि प्रति एकड़ धान तैयार करने पर 20-25 हजार रुपये खर्च आ जाता है। जमीन का ठेका भी 60 से 70 हजार एकड़ प्रति वर्ष का चल रहा है। अब खेतों में धान कम निकला है तथा सरकार ने अभी तक बाढ़ व बारिश के कारण जलभराव का मुआवजा नहीं दिया है इसी कारण जमीन ठेके पर लेने वाले किसान के हाथ तो कुछ नहीं आएगा। किसान घाटे में जा रहा है, लेकिन सरकार में बैठे लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ऐसी स्थिति में किसान जाए तो जाए कहां। सरकार को संज्ञान लेना चाहिए।
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किसान नेता विक्रम कसाना ने बताया कि प्रति एकड़ धान तैयार करने पर 20-25 हजार रुपये खर्च आ जाता है। जमीन का ठेका भी 60 से 70 हजार एकड़ प्रति वर्ष का चल रहा है। अब खेतों में धान कम निकला है तथा सरकार ने अभी तक बाढ़ व बारिश के कारण जलभराव का मुआवजा नहीं दिया है इसी कारण जमीन ठेके पर लेने वाले किसान के हाथ तो कुछ नहीं आएगा। किसान घाटे में जा रहा है, लेकिन सरकार में बैठे लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ऐसी स्थिति में किसान जाए तो जाए कहां। सरकार को संज्ञान लेना चाहिए।
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